बीकानेर

Rajasthan Nikay Election : क्या फ़र्ज़ी सिम्बल लगाकर बदल दिया अधिकृत प्रत्याशी? जानें बीकानेर कांग्रेस विवाद में आई लेटेस्ट अपडेट

Bikaner Congress Ticket Controversy : बीकानेर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस का सिंबल विवाद पुलिस थाने पहुंचा। शहर व देहात अध्यक्ष समेत तीन पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज। जानिए पूरा मामला।
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Updated: 5 Sep 2026, 12:13 PM IST
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Bikaner Congress Ticket Controversy - File Pics

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव 2026 के बीच बीकानेर कांग्रेस का अंदरूनी टिकट विवाद अब पुलिस थाने और अदालत तक पहुंच गया है। शहर के वार्ड नंबर 50 से अधिकृत प्रत्याशी के चुनाव चिह्न को कथित तौर पर बदलकर दूसरे प्रत्याशी को देने के गंभीर आरोपों में पुलिस ने कांग्रेस के शहर जिला अध्यक्ष, देहात अध्यक्ष और एक अन्य प्रत्याशी के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और कूटरचना का केस दर्ज कर लिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने बीकानेर की लोकल पॉलिटिक्स में हड़कंप मचा दिया है क्योंकि एक तरफ जहां पार्टी नेतृत्व पर फर्जीवाड़ा करके सिंबल बदलने का आरोप लगा है, वहीं दूसरी तरफ इस विवाद के बाद हुई मारपीट के सिलसिले में पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत चार लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है। चुनाव के ठीक एन वक्त पर हुए इस बड़े कानूनी और राजनीतिक ड्रामे से न सिर्फ कार्यकर्ताओं में भारी असमंजस की स्थिति बन गई है, बल्कि पार्टी की सामाजिक और राजनीतिक साख पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बीकानेर कांग्रेस जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल। फोटो: पत्रिका


क्या वाकई में 'सिंबल' बदला? 

बीकानेर के सदर थाना क्षेत्र में दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा विवाद रामपुरा बस्ती निवासी दीपक अरोड़ा की शिकायत के बाद शुरू हुआ। दीपक अरोड़ा ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उनके बेटे मोहित अरोड़ा को वार्ड 50 से कांग्रेस पार्टी ने अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया था। पार्टी के आधिकारिक निर्देशों के बाद मोहित ने बाकायदा अपना नामांकन दाखिल किया और वार्ड में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था।

शिकायतकर्ता का दावा है कि 30 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय द्वारा बीकानेर नगर निगम के सभी अधिकृत प्रत्याशियों की लिस्ट और उनके चुनाव चिह्न तैयार करके चुनाव प्रभारी के माध्यम से शहर जिला अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल और देहात अध्यक्ष बिशना राम सियाग को सौंपे गए थे। इस आधिकारिक सूची में स्पष्ट रूप से वार्ड 50 से मोहित अरोड़ा का नाम दर्ज था और उनके नाम पर ही पार्टी का चुनाव चिह्न जारी किया गया था।

बीकानेर जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल से मारपीट मामला - वायरल PIC

फर्जी सिंबल तैयार कर गुमराह करने का आरोप

मामले ने तूल तब पकड़ा जब शिकायतकर्ता के अनुसार 31 अगस्त को पूर्व जिला अध्यक्ष ने सूची और सिंबल देखने के बाद इसकी जानकारी परिवार को दी। आरोप है कि इसके बावजूद शहर जिला अध्यक्ष और देहात अध्यक्ष ने मिलकर कथित रूप से साजिश रची। उन्होंने मोहित अरोड़ा के नाम जारी हुए अधिकृत चुनाव चिह्न को हटा दिया और नवरत्न डागा के नाम से एक कथित फर्जी चुनाव चिह्न तैयार करवा लिया।

इसके बाद इस कथित फर्जी सिंबल को असली बताकर जिला प्रशासन के सामने पेश कर दिया गया और नवरत्न डागा के नामांकन पत्र के साथ संलग्न कर दिया गया। शिकायत में कहा गया है कि इस धोखाधड़ी से न सिर्फ मोहित अरोड़ा की दावेदारी खत्म हुई, बल्कि उनके पूरे परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को भी भारी नुकसान पहुंचा है। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मुख्य आरोपी समेत 4 गिरफ्तार

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। फोटो: पत्रिका

सिंबल विवाद के बाद बीकानेर की राजनीति में माहौल उस समय और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया जब कांग्रेस शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल के साथ मारपीट की घटना सामने आई। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गुरुवार देर रात मुख्य आरोपी मोहित अरोड़ा और उसके तीन साथियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में रविंद्र अरोड़ा, अनुज शर्मा और दिलेर अहमद शामिल हैं। इसके अलावा इस मारपीट प्रकरण में शामिल कुछ अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि चुनावी माहौल में शांति व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बीकानेर जिलाध्यक्ष मारपीट मामले में फरार मुख्य आरोपी मोहित अरोड़ा

निकाय चुनाव पर पड़ेगा असर!

बीकानेर नगर निगम चुनाव में सामने आए इस घटनाक्रम से कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी पूरी तरह से उजागर हो गई है। एक तरफ जहां पीड़ित पक्ष कानूनी लड़ाई लड़कर न्याय की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस में मामला दर्ज होने से संगठन के बड़े पदाधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

स्थानीय मतदाताओं के बीच इस विवाद की तीखी चर्चा है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज और तथ्य यह तय करेंगे कि इस कानूनी लड़ाई का रुख क्या होगा, लेकिन फिलहाल इस पूरे मामले ने बीकानेर के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से गरमा दिया है।

Updated on:
5 Sep 2026, 12:13 PM IST
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