लिपिक ने हैसियत प्रमाण पत्र बनाने की एवज में नापासर निवासी वीरेन्द्र पाण्डिया से रिश्वत ली थी।
बीकानेर. जिला कलक्ट्रेट स्थित तहसील कार्यालय के लिपिक गोपश्वर बस्ती निवासी नंदलाल देवड़ा को सोमवार शाम भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के दल ने रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। उसके पास से रिश्वत के १८०० रुपए बरामद कर लिए गए। लिपिक ने हैसियत प्रमाण पत्र बनाने की एवज में नापासर निवासी वीरेन्द्र पाण्डिया से रिश्वत ली थी।
पुलिस अधीक्षक ममता राहुल बिश्नोई ने बताया कि वीरेन्द पाण्डिया ने शिकायत दर्ज कराई थी। पाण्डिया ने बताया कि हैसियत प्रमाण-पत्र बनाने के लिए ई-मित्र से आवेदन किया, लेकिन प्रमाण-पत्र नहीं मिला। इस पर तहसील कार्यालय में यूडीसी (लिपिक) गंगाशहर थाना क्षेत्र के नंदलाल देवड़ा से संपर्क किया।
इसके लिए उन्होंने दो हजार रुपए देने की मांग की है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रजनीश पूनिया ने शिकायत का सत्यापन किया। इसके बाद लिपिक ने परिवादी से १८०० में सौदा तय किया। परिवादी ने सोमवार सुबह ५०० रुपए दे दिए और शेष राशि दोपहर बाद देना तय हुआ। परिवादी ने लिपिक देवड़ा को १३०० रुपए दिए तभी एसीबी ने कार्यालय में ही उसे पकड़ लिया।
हाल ही में हुआ पदोन्नत
एएसपी पूनिया ने बताया कि आरोपित नंदलाल एक माह पहले ही पदोन्नत होकर यूडीसी से कार्यालय सहायक (ओए) बना था। सप्ताहभर पहले ऑडर जारी कर उसे लूणकरनसर एसडीएम ऑफिस में कार्यालय सहायक के पद पर लगाया गया था, लेकिन वह रिलीव नहीं हुआ था।
७८६० रुपए मिले
एएसपी ने बताया कि ट्रेप की कार्रवाई के दौरान देवड़ा के पास से २५८० रुपए और मिले। उसने रुपए टेबल की ड्रॉ में रखे हुए थे। इन रुपयों के बारे में वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। आरोपित से रिश्वत के लिए १३००, ड्रॉवर में मिले २५८० तथा पर्स से ३९८० रुपए को जब्त कर लिया गया। आरोपित के मकान पर तलाशी ली गई, लेकिन कुछ खास नहीं मिला।
डिपो के लिए आवेदन
पाण्डिया ने बताया कि वह राशन डिपो के लिए आवेदन कर रहा था, जिसके लिए हैसियत प्रमाण-पत्र की जरूरत थी। यूडीसी ने पहले तो कई दिन चक्कर लगवाए, लेकिन बाद में दो हजार रुपए की मांग की। इससे परेशान होकर एसीबी में शिकायत की, ताकि किसी जरूरतमंद को यह कभी परेशान न करे।
यह थी टीम
एएसपी पूनिया के नेतृत्व में पुलिस निरीक्षक मनोज कुमार, अशोक श्रीमाली, नरेन्द्र कुमार, मंगलदास, गिरधारीदान, अनिल कुमार, राजेन्द्र कुमार शामिल थे।