
सोहनलाल सारस्वत
हेमेरां. जिले के पशु बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्र में पशुपालन आजीविका का मुख्य साधन है लेकिन गांव के पशु अस्पतालों व उपकेंद्रों में रिक्त पदों के चलते ताले लटक रहे हैं। ऐसे में पशुओं का इलाज करवाने के लिए पशुपालक भटकने को मजबूर हो रहे हैं। गांव-ढाणी में बैठे पशुपालक का पशु बीमार हो जाए तो पशु को वाहन किराए पर कर बीकानेर स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय ले जाना पड़ता है। रिक्त पदों के चलते सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
रिक्त पदों से परेशानी
जानकारी के अनुसार बीकानेर जिले में सिर्फ प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय में ही पद भरे हैं। वहीं 20 पशु चिकित्सालय व पशु उपकेंद्र ताले में बंद है। जिले में 76 में से 50 पशु चिकित्सकों के पद रिक्त है। वहीं 123 पशुधन सहायकों के पद रिक्त है। रिक्त पदों के कारण पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इन केन्द्रों पर ताला
जिले में 20 से अधिक पशु अस्पतालों व पशु उपकेंद्रों पर रिक्त पदों के कारण ताला लटक रहा है। इनमें चारणवाला, नगरासर, भानीपुरा, बज्जू , दो एडीएम, गंगाजली, करणीसर भाटियान, डेली तलाई, 646 आरडी, मोलानिया , जलालसर, रणधीसर, गुड़ा, चानी, खारी चारणान, चांडासर नोखा दैया, अंग्नेऊ, अमरपुरा व पूगल मोबाइल यूनिट बन्द हैं। वही जिले में कई केन्द्रों पर समीप का स्टाफ लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
इनका कहना है
राज्य सरकार की ओर से पशु चिकित्सकों व पशुधन सहायकों की भर्ती प्रक्रियाधीन है। नई भर्ती में रिक्त पद भरे जाएंगे। वही नजदीक के बन्द पशु उपकेंद्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
डॉ. वीरेंद्र नेत्रा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, बीकानेर