बीकानेर

प्रवासी पक्षियों को रास आ रहा बीकाणा

बीकानेर. जिले की ओरण, गोचर, तालाब व जोहड़ पायतन में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन व अनुकूल वातावरण मिलने से जलीय व शिकारी प्रवासी पक्षियों को बीकानेर रास आने लगा है। हालांकि राजस्थान के कुछ ही जिलों में इतनी बड़ी संख्या में जलीय व शिकारी पक्षी आते हैं।
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Dec 04, 2018
migratory birds
Migratory birds coming to Bikaner


बीकानेर. जिले की ओरण, गोचर, तालाब व जोहड़ पायतन में प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन व अनुकूल वातावरण मिलने से जलीय व शिकारी प्रवासी पक्षियों को बीकानेर रास आने लगा है। हालांकि राजस्थान के कुछ ही जिलों में इतनी बड़ी संख्या में जलीय व शिकारी पक्षी आते हैं। दूसरे जिलों में इन प्रवासी पक्षियों के खाने के लिए पैदा हो रहे बीज में केमिकल होने से प्रवासी पक्षी बीकाणा में प्रवास करने लगे हैं। पर्यावरण विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. अनिल छंगाणी ने बताया कि बीकानेर में सितम्बर व अक्टूबर में प्रवासी पक्षी आना शुरू हो गए हैं। इस बार कुछ प्रवासी पक्षी समय से पहले ही बीकानेर आ गए हैं।

इस साल साइबेरिया, कजाकिस्तान, तिब्बत, रूस, चीन, मंगोलिया व यूरोप में अतिवृष्टि, अधिक हिमपात व जलवायु परिवर्तन के चलते प्रवासी पक्षियों ने दक्षिण एशिया के देश की ओर रुख किया है। बीकानेर में सितंबर में आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या इस बार सामान्य से अधिक है। सबसे पहले आने वाली प्रवासी पक्षी रोजी स्टारलिंग अगस्त में भी बीकानेर देखे गए। छंगाणी ने बताया कि जिन क्षेत्रों में नहरी पानी व नलकूपों से खेती होती है। वहां प्रवासी पक्षी नहीं जाते है।

जबकि जिन क्षेत्रों में बारानी व बारिश पर निर्भर रहने वाली खेती होती है। वहां यह प्रवासी पक्षी बड़ी तादाद में पाए जाते है। बीकानेर के आस-पास के क्षेत्र में देश-विदेश से आने वाले प्रवासी पक्षियों में जलीय पक्षियों की २३ प्रजातियां मिली है जो जलीय जीवों पर निर्भर रहती है। शिकारी व मांसाहारी पक्षियों की अब तक १८ प्रजातियां देखी जा चुकी है, जो चूहों, पक्षियों, कीट-पतंगों व सरीसृपों पर निर्भर है। अब तक १२ स्थलचर पक्षियों की प्रजातियां देखी जा चुकी है। जिनमें सर्वाधिक कुरजां है। इनके अलावा ९ प्रजातियों के स्कवेन्जिंग बड्र्स आ चुके हैं, जिनमें विभिन्न प्रजातियों के गिद्ध, कौए व मांसाहारी पक्षी है।

सहयोग से ही संरक्षण
'बीकानेर, नोखा व लूणकरणसर क्षेत्र के मृत मवेशी स्थल प्रवासी गिद्धों व कई स्केवेन्जिंग बड्र्स के मुख्य स्थल है। आमजन के सहयोग व सुरक्षित आवास से प्रवासी पक्षियों का संरक्षण किया जा सकता है।
प्रो. अनिलकुमार छंगाणी, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग, एमजीएसयू

Updated on:
04 Dec 2018 12:23 pm
Published on:
04 Dec 2018 12:23 pm