नवजात शिशु के लिए मां का दूध अमृत के समान होता है। अस्पताल में शिशुओं का मां का ताजा दूध उपलब्ध कराने के लिए मदर मिल्क बैंक के लिए सामान सहित तमाम व्यवस्था की जा चुकी है। परन्तु इस मदर मिल्क बैंक के ताला लटक रहा है। इसकी वजह भी हैरान करने वाली है। इस […]
नवजात शिशु के लिए मां का दूध अमृत के समान होता है। अस्पताल में शिशुओं का मां का ताजा दूध उपलब्ध कराने के लिए मदर मिल्क बैंक के लिए सामान सहित तमाम व्यवस्था की जा चुकी है। परन्तु इस मदर मिल्क बैंक के ताला लटक रहा है। इसकी वजह भी हैरान करने वाली है। इस मिल्क बैंक की कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। इस वजह से यह आठ साल से शुरू नहीं किया जा रहा है।
असल में कुछ जननी के स्तनों से दूध नहीं उतरता है। ऐसे भी मामले अस्पताल में आते है, जिनमें नवजात को जन्म देने के बाद मां का साया सिर से उठ जाता है। ऐसे बच्चों को पाउडर का दूध पिलाना पड़ता है। दूसरी तरफ ऐसी भी कई महिलाएं अस्पताल में भर्ती रहती है, जिनके स्तनों से भरपूर दूध उतरता है और अपने बच्चे का पेट भरने के बाद शेष दूध उन्हें व्यर्थ में फेंकना पड़ता है। सरकार ने मां के दूध से किसी भी परििस्थति का बच्चा वंचित नहीं रहे, इसके लिए पीबीएम अस्पताल में मदर मिल्क बैंक की स्थापना की है। यह बनकर तैयार भी कर दिया गया, लेकिन इसे उपयोग नहीं लिया जा रहा है।
कौन संभाले जिम्मेदारी?
मिल्क बैंक को संभालने की जिम्मेदारी अस्पताल के प्रसूति रोग विभाग एवं शिशु रोग विभाग के पास है। परन्तु दोनों ही विभाग इसे शुरू करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। मदर मिल्क बैंक में कोई भी महिला अपना दूध डोनेट कर सकती है। जिसे फ्रीज के माध्यम से ताजा रखा जाता है। जरूरतमंद बच्चे को यह दूध पिलाने के लिए दिया जाता है।
आठ साल से बैंक पर ताला
सरकार ने करीब पचास लाख रुपए खर्च कर अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी के सामने मदर मिल्क बैंक 2018-2019 में तैयार कराया। जरूरी सामान की भी खरीद की गई। इसे शुरू करते, इससे पहले कोविड आने से इस मदर मिल्क बैंक के भवन कोविड मरीजों के सैंपल लेने शुरू कर दिए गए। कोविडकाल समाप्त होने के बाद इस पर ताला लगाकर छोड़ दिया गया। अब दोनों विभागों के चिकित्सक कह रहे हैं कि मिल्क बैंक प्रसतुति विभाग से दूर होने की वजह से परेशानी हो रही है। इसके चलते शुरू नहीं किया जा रहा है।
अधीक्षक ने जारी किए आदेश
अस्पताल अधीक्षक ने इस मिल्क बैंक को शुरू करने के लिए प्रसूति रोग विभाग तथा शिशु रोग विभाग को निर्देश भी जारी किए है। दोनों विभागों के चिकित्सक जिद कर रहे है कि मिल्क बैंक को मौजूदा भवन में शुरू नहीं कर इसे प्रसूति रोग विभाग के मैट्रन कक्ष में ही संचालित किया जाए। अस्पताल प्रशासन लाखों रुपए खर्च कर तैयार की मिल्क बैंक की बिल्डिंग का उपयोग नहीं करने का जवाब ढूंढ रहा है।
भवन का उपयोग नहीं हो रहा
सरकार ने मदर मिल्क बैंक खोलने के लिए अलग से भवन बनाकर दिया है। इसमें जरूरी सामान भी उपलब्ध करवा रखा है। बैंक को खोलने के लिए आदेश भी जारी कर रखे है। इसके बाद भी दोनों विभाग बैंक भवन को नहीं खोल रहे हैं। अब वापस मिल्क बैंक खोलने के प्रयास किए जाएंगे।
- डॉ. बीसी घीया, अधीक्षक पीबीएम अस्पताल