
बीकानेर. राजस्थान कौशल विकास विश्वविद्यालय के कुलपति ललित के. पंवार ने कहा कि प्रदेश के बीकानेर समेत २२ जिलों में राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) के होटलों को स्कूल में बदलने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। विवि इसमें में कौशल विकास की पढ़ाई करवाएगा। विवि में तीन प्रोफेसर की कमेटी हुनर में पारंगत लोगों का लेवल जांच कर दक्ष लोगों को प्रोफेसर की मानद उपाधि देगा। इन उपाधि प्राप्त हुनरमंदों को गेस्ट फैकल्टी के रूप में मान्यता होगी। वे विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में अपने हुनर का प्रशिक्षण दे सकेंगे।
पंवार ने गुरुवार को यहां राजस्थान पत्रिका से बातचीत में कहा कि अगले वर्ष से तीन प्रोफेसर की कमेटी स्किल लेवल तय करने का काम करेगी। दक्ष लोग बीवीओ (बैचलर ऑफ वॉकेशनल) की डिग्री प्राप्त कर सकेंगे। अपनी दक्षता के बलबूते पर ये लोग ब्ल्यू कॉलर से व्हाइट कॉलर बन सकेंगे। यानी कम पढ़े-लिखे लोग अपने हुनर से उच्च स्तर पर जा सकेंगे। अन्य शर्तें पूरी करने पर वे आइएएस की परीक्षा दे सकेंगे।
कौशल से अलग नहीं शिक्षा
पंवार ने कहा कि बीकानेर के उस्ता कलाकार किसी पीएचडी डिग्रीधारी से अपने ज्ञान में कम नहीं है। ऐसे ही सुथारी, लुहारी समेत ३६ कौमों के लोगों की दक्षता का कोई सानी नहीं है। कुलपति ने कहा कि हमारे देश में शिक्षा और दीक्षा कौशल से अलग नहीं है। शिक्षा को हुनर से जिसे अलग किया गया है, कौशल विकास विवि इसे वापस जोडऩे का काम करेगा। परम्परागत ज्ञान को कौशल विकास का मंच दिया जाएगा।
विवि का कार्यालय खासा कोठी में कुलपति ने कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा के लिए राजस्थान कौशल विकास विवि का कार्यालय खासा कोठी में स्थापित किया गया है। विवि ३० मार्च, २०१७ से शुरू हुआ था। इससे ५७ संस्थानों को सम्बद्धता दी गई है। इस विवि के ४ हजार ५०० विद्यार्थी हैं। इसमें १८ संकाय चल रहे हैं। विवि की पहली परीक्षा जुलाई-२०१९ में होगी। प्लेसमेंट के लिए १ जनवरी से विशेषज्ञ लगाया जाएगा।
बन रहा नया पाठ्यक्रम
विवि उद्योगों और शिक्षा के बीच ब्रिज का काम करेगा। देश के पहले इस विवि को केन्द्र सरकार १०० करोड़ रुपए की ग्रांट देगी।
इसका १०० एकड़ में ऊर्जा परिसर बनेगा। कौशल दक्षता के लिए आइटीआई एवं पॉलीटेक्निक को अपग्रेड कर विवि से जोड़ा जाएगा। विवि के स्तर पर कौशल विकास के नए पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं।