
बज्जू. कहने को तो राष्ट्रीय राजमार्ग 15 के सांखला फांटा से बज्जू होकर अंतरराष्ट्रीय सीमा के सैकड़ों गांवों के लिए सड़क बनी है लेकिन वर्तमान में यह स्टेट हाईवे कच्चे रास्ते में तब्दील हो गया है। क्षेत्र की करीब 35 से अधिक पंचायतों के सैकड़ों गांवों के लिए बनी सड़क पूर्व में एमडीआर 37 व अब स्टेट हाइवे 87 ए का दर्जा प्राप्त होने के बाद भी बदतर हालात है।
इस स्टेट हाइवे से डामर गायब हो चुका है और कंकर निकलने के बाद गहरे गड्ढे बन चुके हैं। कुछ जगह तो सड़क के अवशेष तक नही रहे हैं। इस महत्वपूर्ण सड़क की ओर प्रशासन, जनप्रतिनिािध और सरकार ध्यान नही दे रही है, तो उखड़ी सड़क पर विभाग की ओर से कभी-कभार घटिया पेचवर्क कर खानापूर्ति कर ली जाती है। नई सड़क सपने संजोए लोगों ने इसके किनारे पर कच्चे रास्ते बना लिया है तो इस १०८ व १०४ सेवा हर दिन प्रभावित होती है और जर्जर सड़क के कारण कई बार बीच रास्ते में ही अटक जाती है।
३८ किलोमीटर का सफर डेढ़ घंटे में
सांखला फांटा से बज्जू करीब ३८ किलोमीटर दूर है। इससे जर्जर स्टेट हाइवे पर ३८ किमी के सफर में करीब डेढ़ घंटा लग जाता है। वहीं बज्जू से गौडू होकर रणजीतपुरा ४० किमी का सफर भी डेढ घंटे से ज्यादा समय में हो रहा है।
नॉन पैचेबल सड़क होगी दुरुस्त
कोलायत विधायक भंवरसिंह भाटी ने बताया कि पूर्व में इस सड़क को पीपी मोड पर लिया था लेकिन यह योजना सफल नहीं रही। इसके बाद विधानसभा में मुद्दा उठाने पर स्टेट हाइवे ८७ ए में करीब ४० किमी सड़क को नहीं चलने लायक बताया तथा टेण्डर प्रक्रिया निकाली गई। इसमें बज्जू से गौडू नॉन पेचेबल सड़क का टेंडर हो गया तो बज्जू से सांखला फांटा तक का टेंडर अब तक दो बार निरस्त हो चुका है। इसका कारण है सरकार द्वारा टेंडर में कम राशि दिखाना है। इसको लेकर ठेकेदार घाटे का सौदा बता रहे हैं। रणजीतपुरा से गौडू तक सड़क भारतमााला योजना में शामिल है। इसका कार्य भी जल्द शुरू होगा। विधायक भाटी ने बताया कि इस महत्वपूर्ण सड़क के लिए प्रयास जारी है लेकिन सरकार इस सड़क पर ध्यान नही दे रही है। अगले माह में होने वाली विधानसभा में फिर से इस मुद्दे को सरकार के सामने रखूंगा।