Bikaji Bhujia Founder Shivratan Agarwal Death: भारतीय स्नैक उद्योग और भुजिया इंडस्ट्री के दिग्गजों में शुमार बीकाजी के प्रमुख शिवरतन अग्रवाल (फन्ना बाबू) का गुरुवार सुबह चेन्नई में निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे। वे अपनी पत्नी के इलाज के सिलसिले में परिवार सहित चेन्नई में ही ठहरे हुए थे।
बीकानेर। भारतीय स्नैक उद्योग और भुजिया इंडस्ट्री के दिग्गजों में शुमार बीकाजी के प्रमुख शिवरतन अग्रवाल (फन्ना बाबू) का गुरुवार सुबह चेन्नई में निधन हो गया। वे 75 वर्ष के थे। वे अपनी पत्नी के इलाज के सिलसिले में परिवार सहित चेन्नई में ही ठहरे हुए थे। सुबह अचानक होटल में ही तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर मिलते ही बीकानेर सहित देशभर के उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
आठवीं तक शिक्षा प्राप्त सार्दुलगंज निवासी फन्ना बाबू ने साधारण शुरुआत से उस सफर को तय किया, जिसने बीकानेर को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने पारंपरिक भुजिया कारोबार को आधुनिक और तकनीकी सोच से जोड़ा और बीकाजी को ब्रांड के रूप में खड़ा किया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही भुजिया को लोकल उत्पाद से ब्रांडेड और पैकेज्ड उत्पाद में बदलना। मशीन से भुजिया बनाने की शुरुआत कर उन्होंने उत्पादन को बड़े पैमाने पर संभव बनाया, जिसने पूरे उद्योग की दिशा बदल दी।
बिजनेस बंटवारे के बाद फन्ना बाबू ने अपने खानदानी बिजनेस हल्दीराम से अलग होकर खुद का व्यापार शुरू करने का विचार किया। बीकानेर पहुंचे और शिवदीप फूड प्रोडक्ट्स के नाम से 1986 में भुजिया बनाने का काम शुरू किया। इसी कड़ी में उन्होंने 1993 में बीकाजी की स्थापना की। यह वह दौर था, जब नमकीन का कारोबार अधिकतर असंगठित था।
उन्होंने पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मशीन आधारित उत्पादन पर जोर देकर इस क्षेत्र में नई दिशा दी। उनकी सोच थी कि बीकानेर की पहचान रही बीकानेरी भुजिया को देश की सीमाओं से बाहर भी पहुंचाया जाए। उन्होंने ब्रांड का नाम भी बीकानेर शहर के संस्थापक राव बीका के नाम पर रखा। जो सही फैसला साबित हुआ और यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जल्दी ही बड़े ब्रांड्स में शुमार हो गया। भुजिया के साथ-साथ नमकीन, मिठाइयों और रेडी-टू-ईट उत्पादों के विस्तार ने बीकाजी को एक मजबूत पहचान दी।
फन्ना बाबू सिर्फ उद्योगपति नहीं, बल्कि नवाचार के प्रतीक थे। गुणवत्ता, पैकेजिंग और सप्लाई सिस्टम पर उनकी पकड़ ने ब्रांड को अलग पहचान दी। वे सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे और बीकानेर में शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान के कारण उन्हें भामाशाह के रूप में भी जाना गया।
फन्ना बाबू के निधन के साथ बीकानेर ने अपनी पहचान को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने वाले मार्गदर्शक को खो दिया। भुजिया से ब्रांड तक का उनका सफर न केवल उद्योग जगत के लिए, बल्कि हर छोटे शहर के उद्यमी के लिए प्रेरणा बना रहेगा। फन्ना बाबू अपने पीछे पत्नी, पुत्र-पुत्रवधू, पोता-पोती समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
1986 में हल्दीराम से अलग हुए।
1993 में बीकाजी ब्रांड की स्थापना की।
1994 यूएई में निर्यात के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कदम।
1995 बीकाजी पार्टनरशिप फर्म से प्रा. लि. कंपनी में बदल गई।
1996 ऑस्ट्रेलिया में बिजनेस की शुरुआत।
2006 मुंबई में बीकाजी फूड जंक्शन नाम से रेस्टोरेंट की स्थापना।
2019 - सिने दिग्गज अमिताभ बच्चन को बीकाजी का ब्रांड अंबेसडर नियुक्त किया।
2014 पहली बार कंपनी ने प्राइवेट इक्विटी के जरिये फंड हासिल किया।
2022 बीकाजी का आइपीओ लॉन्च। कंपनी ने स्टॉक मार्केट में कदम रखा।