हेमू नगर में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन
बिलासपुर. दया धर्म का मूल है जहां दया नहीं वहां धर्म नहीं इसलिए दया के अभाव में जो जीवों की हिंसा की जा रही है। इसलिए प्रकृति में क्षोभ हो रहा है और कई तरह के उत्पाद कोरोना, बाढ़, सुनामी आदि ऐसे कष्ट आते हैं। हम समझ नहीं पाते कि पाप के बोझ की वजह से माता वसुंधरा दुखित होती है। इसलिए जिनके हृदय में करुणा नहीं वो इंसान नहीं। जीवों पर तरह -तरह के अत्याचार किए जा रहे हैं। इसलिए कि वे बेजुबान हैं निर्बल हैं कुछ कर नहीं सकते, लेकिन भगवान का एक नाम है श्री पशुपतिनाथ। भगवान पशुओं के भी नाथ हैं इसलिए हमें सदा दया भाव रखना चाहिए। दया चाहिए तो दया करते रहना खुशी चाहिए तो खुशी देते रहना। उक्त बातें हेमू नगर बंधवापारा स्थित आशीर्वाद भवन आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस को चकरभाटा से बाबा आनंद राम दरबार के संत श्री कृष्ण दास उदासी जी के सान्निध्य में बलराम भैया एकादशी वाले ने कही। उन्होंने बताया कि गाय के सींग के ऊपरी भाग में राई का दाना कितनी देर ठहर सकता है अर्थात एक पल भी नहीं। भगवान के प्रेमी भक्त भगवान से इतना वक्त भी दूर नहीं रह सकते। ऐसे महात्मा शुकदेव जी महाराज जो समाधि में साक्षात भगवान को एकीकार कर रहे थे, वह समाधि का सुख छोड़कर श्री भागवत की कथा कह रहे हैं। इसी से श्री भागवत का महत्व हमें समझ लेना चाहिए। भगवान के 24 अवतार बताए गए जिनमें 24 वां अवतार श्री कल्कि भगवान का संबलपुर उड़ीसा राज्य में होगा। उनके पिता का नाम श्री विष्णु यश होगा। देवदत्त घोड़े पर सवार होकर भगवान कल्कि पापियों का नाश करेंगे तथा धर्म की स्थापना करेंगे। श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन 13 से 19 मार्च तक किया जाएगा। कथा के आरंभ में बंधवापारा समिति के सदस्यों ने मिलकर वक्ता का स्वागत किया। जिनमें अध्यक्ष सुरेश जीवनानी, मोहन जेसवानी, जीवत राम, रोहरा नंद जीवनानी, चंदा पोपटानी ने भाग लिया। भागवत की सेवा श्री भगवानदास सर्व राकेश परिवार ने मिलकर बड़ी श्रद्धा भाव से आरंभ की है।