
Bilaspur Train Accident: बिलासपुर रेल हादसे के बाद एक संवेदनशील पहल सामने आई है। बता दें हादसे में जान गंवाने वाले लोको पायलट विद्यासागर कुशवाहा की तीनों बेटियों की शिक्षा और विवाह का पूरा खर्च अब क्लीन कोल इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने उठाने की घोषणा कर दी है। कंपनी के संचालक संजय अग्रवाल ने इस आशय का लिखित पत्र जिला कलेक्टर और डीआरएम, रेलवे बिलासपुर को सौंपा है।
जानकारी मुताबिक हादसे में विद्यासागर कुशवाहा की मौके पर ही मौत हो गई थी। उनकी मृत्यु से परिवार पर गहरा आर्थिक और भावनात्मक आघात पहुंचा है। ऐसे समय में कंपनी का यह निर्णय पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। सिर्फ इतना ही नहीं, कंपनी ने हादसे में मारे गए अन्य रेलकर्मियों और यात्रियों के बच्चों की संपूर्ण शिक्षा में सहयोग करने का भी वचन दिया है। प्रशासन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कदम सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण है।
मृतक लोको पायलट विद्यासागर कुशवाहा बिलासपुर रेल मंडल में पदस्थ एक अनुभवी रेलकर्मी थे। उनकी मृत्यु हो गई। लोको पायलट विद्यासागर पहले मालगाड़ी चलाते थे और लगभग एक माह पहले ही उन्हें पैसेंजर ट्रेन परिचालन के लिए प्रमोशन दिया गया था। रेलवे के नियमों के अनुसार, किसी भी चालक को मालगाड़ी से पैसेंजर ट्रेन में प्रमोशन देने से पहले साइकोलॉजिकल टेस्ट पास करना जरूरी होता है। यह टेस्ट चालक की मानसिक स्थिति, त्वरित निर्णय क्षमता और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया का मूल्यांकन करता है। लेकिन रिपोर्ट में पाया गया कि रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को विद्यासागर के टेस्ट में असफल होने की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने उन्हें ट्रेन चलाने की अनुमति दी। यह वही ट्रेन थी जो 4 नवंबर की शाम हादसे का शिकार हुई।
Bilaspur Train Accident: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 नवंबर की शाम करीब 4 बजे बिलासपुर स्टेशन के आउटर पर गेवरारोड के पास मेमू लोकल ट्रेन अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान वहां खड़ी एक मालगाड़ी से उसकी टक्कर हो गई। इस हादसे में 11 यात्रियों की जान चली गई साथ ही 20 लोग घायल हो गए। वहीं घायलों को तुरंत रेलवे अस्पताल, सिम्स और अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए रेलवे ने तुरंत जांच शुरू की।