
शैलेन्द्र पाण्डेय/बिलासपुर. वाकई गजब शहर है बिलासपुर, यहां के नेता और अफसर उससे भी अजब। शहर की जनता 15 बरस से जर्जर सड़क, गड्ढे और धूल धक्कड़ से परेशान है। लोग खून के आंसू रो रहे हैं, कोई सुनने वाला नहीं है। शहर से सड़कें ही गायब हैं, और इधर निगम के अफसर-नेता सड़कों की धुलाई के लिए 26 करोड़ का ठेका देने की तैयारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि टेंडर भी जारी कर दिया गया। शहर में सड़क का अता-पता नहीं है, लेकिन निगम प्रशासन ठेका-ठेका खेल रहा है। वह भी तब, जबकि निगम के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने और बिजली बिल चुकाने तक के लिए पैसे नहीं है। आप माजरा समझ गए होंगे, कि आपके चुने हुए जनप्रतिनिधि क्या खेल, खेल रहे हैं। जी हां! आप सही समझ रहे हैं। जनता की आंखों में बार-बार औ अबकी बार फिर से धूल झोंकने की तैयारी की जा रही है। बातें तो स्मार्ट सिटी की कर रहे। शहर की भोली भाली जनता को एक नहीं, अनेक सब्जबाग दिखाए जा रहे। लेकिन हाल ये कि चलने के लिए शहर में सड़क तक नहीं बना पा रहे। उस पर तुर्रा ये कि निगम के जनप्रतिनिधि और अफसर सड़कों की धुलाई के नाम पर करोड़ों रुपए फूंकने की योजना बना रहे हैं। जबकि इससे पहले जनप्रतिनिधियों ने अपने रिश्तेदारों और करीबियों के नाम पर वार्डों और शहर के मुख्यमार्गों की सफाई का ठेका ले रखा है।
दूसरी तरफ एसएसडब्ल्यू साल्यूशन को कचरे के संकलन और डंपिग यार्ड कछार में ले जाकर कचरे के संपूर्ण निदान का ठेका दिया गया है। यानी, चारों तरफ से लूट! अब सड़कों की धुलाई के लिए 26 करोड़ रुपए के ठेका के नाम पर फिर से धूल झोंकने की तैयारी है। बड़ा सवाल यह, कि जब शहर में सड़क ही नहीं है, तो ठेका लेने वाली कंपनी क्या खाक सड़कों की धुलाई करेगी।
90 फीसदी वसूली फिर भी राजस्व वसूली ठेके पर : पिछले कुछ सालों से कार्पोरेट सेक्टर से सांठगांठ कर स्वायत्तशासी संस्था निगम के विभिन्न कार्यों को ठेके पर देने का काम चल रहा है। झारखंड की कंपनी स्पायरो टेक को संपत्तिकर, जलकर, बाजार और लाइसेंस शाखा की वसूली का कार्य ठेके पर दे दिया गया है। जबकि पिछले सत्र में निगम के राजस्व अमले ने 90 फीसदी राजस्व वसूली की थी। इतना ही नहीं, निगम के अफसर ठेका कंपनियों की तरफदारी कर रहे हैं। जबकि सारे कार्यों में केवल नाम का ठेका चल रहा है, लेकिन काम अभी भी निगम के अमले से ही लिया जा रहा है। चाहे वो सफाई का मामला हो या फिर राजस्व वसूली का।
कबाड़ में तब्दील हो रही सवा करोड़ की रोड स्वीपिंग मशीन : पिछले विधानसभा चुनाव के ठीक पूर्व नगरीय प्रशासन विभाग ने अन्य निकायों की तरह बिलासपुर नगर निगम को भी सवा करोड़ की लागत से दो रोड स्वीपिंग मशीन (वाहन) दी थी। तामझाम के साथ नेहरू चौक पर मंत्री से इन वाहनों का उद्घाटन कराकर डेमास्ट्रेशन कराया। लेकिन शहर में इसके लायक सड़क ही नहीं, जिसकी सफाई की जा सके। इसलिए कुछ दिन बाद इन वाहनों को पंप हाउस में खड़ा करा दिया गया, तब से आज तक ये वाहन कबाड़ होते पड़े हैं।
कंपनी एेसे करेगी सफाई और धुलाई : निगम अफसरों के बताए अनुसार, ठेका लेने वाली कंपनी महानगरों की तर्ज पर मशीनों के जरिए पहले सड़क, फुटपाथ और डिवाइडरों की ब्रशिंग कर सफाई करेगी। इसके बाद सड़क पर पानी डालकर धुलाई करेगी। फिर दूसरी ब्रशिंग करके सफाई करेगी।
7 लाख में मरम्मत, चली सिर्फ एक दिन : तत्कालीन अधीक्षण अभियंता भागीरथी वर्मा ने एक रोड स्वीपिंग मशीन की 7 लाख रुपए में मरम्मत कराई थी। लेकिन इसके बाद ये मशीन केवल एक दिन ही चली, फिर ठप पड़ गई। वहीं दूसरी मशीन की मरम्मत के लिए 12 लाख रुपए का खर्च बताया गया है।
पत्रिका व्यू - जख्म भी देते हो, नमक भी डालते हो...: अजब शहर के गजब नेता और अफसरों ने पूरे शहर की छाती छलनी कर दी। इतनी बेदर्दी कि जख्मों पर नमक भी डाल रहे और लोग उफ...! तक नहीं कर पा रहे। एक-दो नहीं, 15 बरस से अधिक हो गए। कागजों में भले ही सड़कें बनीं, लेकिन धरातल पर पूरे शहर की सड़कें गायब हैं। जनता की आंख में धूल झोंककर राजनीति चमकाने वाले और सफाई व अन्य ठेके लेने वाले उनके रिश्तेदार ही खुश होंगे इस व्यवस्था से। उल्टी-सीधी योजनाएं, आधे-अधूरे काम और बंदरबाट, बस यही चल रहा है बरसों से। इसका सारा वित्तीय भार डाल दिया जाता है जनता पर। घोटाले और लूटतंत्र की बानगी तो देखिए, कि जिस शहर में सड़क ही नहीं, उसकी सफाई के लिए 26 करोड़ का टेंडर भी जारी कर दिया हमारे काबिल और विद्वान अफसर-नेताओं ने मिलकर। गौरव पथ से लेकर सारे शहर की सड़कों पर मलाई लूटने वालों का कुछ नहीं बिगड़ा। ठेके लेकर सारे शहर में गंदगी पसारने वालों को भी कोई दंड नहीं। पूरे शहर को 20 साल पीछे धकेल दिया, जिसकी सजा भुगत रही और न जाने कब तक भुगतेगी भोली-भाली जनता।
सीधी बात : किशोर राय, महापौर नगर निगम बिलासपुर
प्र. दो-दो ठेके के बावजूद जब शहर गंदा का गंदा है तो फिर नए ठेके से क्या उम्मीद?
उ. ये कंपनियां महानगरों में कार्य कर रही हैं। परफार्में के आधार पर उन्हें इस शर्त पर कार्य दिया जा रहा है कि हमंे शहर साफ चाहिए। उनका अपना कंट्रोल रूम होगा, संसाधन होंगे, काम अच्छा होगा।
प्र. वेतन और बिजली बिल के भुगतान के लिए फंड का टोंटा है। एेसे में २६ करोड़ का इंतजाम कहां से करेंगे।
उ. दिक्कत तो है, सोर्स डेव्लप करने लगातार प्रयास किया जा रहा है। लेकिन शहर विकास के लिए फंड की कमी नहीं होने दी जाएगी। पुराने ढर्रे को बंद करने से जो बचत होगी उसका इस्तेमाल किया जाएगा।
प्र. सीवरेज की बेतरतीब खुदाई से शहर की सड़कें बदहाल हैं। जब शहर में सड़कें ही नहीं हैं ठेका कंपनी किसकी धुलाई करेगी।
उ. सड़कों की मरम्मत की कार्ययोजना तय कर ली गई है। 18 अक्टूबर से सड़कों पर डामरीकरण और सीसीकरण शुरू कराया जा रहा है।