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RTE सीटें 85 हजार से घटकर 30 हजार, छत्तीसगढ़ HC ने पूछा- अगस्त में एडमिशन होगा तो गरीब बच्चे पढ़ाई कब करेंगे?

RTE Admission 2026: हाईकोर्ट ने कहा कि जब नया शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू हो चुका है, तो अगस्त तक एडमिशन होने पर गरीब बच्चे पढ़ाई कब शुरू करेंगे और उनका कोर्स कैसे पूरा होगा?
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RTE Admission 2026

RTE Admission(photo-patrika)

Chhattisgarh RTE Admission 2026: छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर चल रही जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में विस्तृत शपथपत्र प्रस्तुत किया। सरकार ने बताया कि दूसरे चरण की लाटरी पूरी हो चुकी है, जिसमें 1174 बच्चों का चयन किया गया है।

वहीं, शेष रिक्त सीटों को भरने के लिए विभाग व्यापक प्रचार-प्रसार और अभिभावकों की सहायता करेगा। सरकार की ओर से कहा गया कि आरटीई के तहत अगस्त तक बच्चों के एडमिशन की प्रक्रिया चलेगी। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि अप्रैल में सत्र शुरू हो गया है। ऐेसे में यह गरीब बच्चे पढ़ाई कब शुरू करेंगे और इनका कोर्स कैसे पूरा होगा। क्या राज्य सरकार इनके लिए कोई अलग से व्यवस्था करने वाली है।

हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से शपथपत्र प्रस्तुत कर आरटीई सीटों की स्थिति, प्रतिपूर्ति और प्रवेश प्रक्रिया की ताजा जानकारी दी गई। हलफनामे में कहा गया कि विभाग न्यायालय के सभी आदेशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जा रहे हैं।

सरकार ने बताया कि 6 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी 33 जिलों में आरटीई के तहत बची हुई सीटों के लिए दूसरी लाटरी आयोजित की गई। लाटरी के लिए 9984 सीटें उपलब्ध थीं। इनके लिए 12,934 आवेदन प्राप्त हुए। लाटरी के बाद 1174 बच्चों का चयन किया गया। चयनित बच्चों का प्रवेश 8 जुलाई से 17 जुलाई 2026 तक कराया गया। बची हुई सीटों को भरने के लिए अभिभावकों को हरसंभव सहायता दी जाएगी।

339.73 करोड़ रुपए प्रतिपूर्ति राशि जारी

राज्य सरकार ने शपथपत्र में बताया कि निजी गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों को आरटीई के तहत प्रवेश देने के एवज में फीस प्रतिपूर्ति के लिए 339 करोड़ 73 लाख 36 हजार रुपए की राशि स्वीकृत कर दी गई है। यह राशि वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए स्वीकृत की गई है और इसे लोक शिक्षण संचालनालय के खाते में स्थानांतरित भी कर दिया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि निजी स्कूल संचालकों द्वारा प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने की मांग को 10 जून 2026 के आदेश से अस्वीकार कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि वर्तमान प्रतिपूर्ति राशि पर्याप्त है और इसमें वृद्धि की आवश्यकता नहीं है।

सीटें घट कर 85 हजार से रह गईं 30 हजार

शपथपत्र में यह भी बताया गया कि 16 दिसंबर 2025 के सरकारी निर्णय के अनुसार अब आरटीई अधिनियम की धारा 12(1)(सी) का लाभ केवल कक्षा पहली में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा। इसी कारण आरटीई सीटों की संख्या में कमी आई है। हाईकोर्ट ने हलफनामे पर गौर करने के बाद कहा कि अभी भी आरटीई की कुछ सीटें रिक्त हैं और उन्हें भरने की प्रक्रिया जारी है।

याचिकाकर्ता के वकीलों ने सवाल उठाया कि पहले प्रदेश भर में आरटीई की 85 हजार से अधिक सीटें थीं। बाद में इसे घटाकर 55 हजार और अब 30 हजार कर दिया गया है। सीटें कम होने से गरीब बच्चे बड़े स्कूलों में प्रवेश और पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं।