
Bilaspur Flood: बिलासपुर संभाग में कुदरत का ऐसा कहर बरपा है जिसने पिछले 100 से अधिक सालों का रेकॉर्ड तोड़ दिया। बिलासपुर और आसपास के इलाकों में 'बादल फटने' जैसी ऐतिहासिक घटना हुई है, जिससे पूरा क्षेत्र जलमग्न हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, बिलासपुर में 16 जुलाई की शाम से 17 जुलाई की शाम तक (24 घंटे में) रेकॉर्ड 415 मिमी पानी बरस गया। इसमें से 276 मिमी बारिश गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात महज दो घंटे (ढाई से साढ़े चार बजे) के भीतर दर्ज की गई।
मौसम विज्ञानी बी.के. चिंधालोरे के मुताबिक जब एक घंटे में 100 मिमी बारिश हो तो उसे वैज्ञानिक भाषा में बादल फटना कहते हैं। बिलासपुर में बिल्कुल ऐसी ही स्थिति बनी। बंगाल की खाड़ी से आ रही प्रचुर नमी के बीच कम दबाव का क्षेत्र, द्रोणिका और ऊपरी हवा का चक्रवात जैसे तीन सिस्टम एक साथ सक्रिय हो गए। इस वजह से बादल एक ही जगह ठहर गए और आगे बढ़ने के बजाय वहीं बरस पड़े। प्रदेश के इतिहास में दो घंटे में इतनी बारिश का कोई पुराना रेकॉर्ड नहीं है।
अब तक प्रदेश में औसत 286.7 मिमी पानी गिरा है, जो सामान्य से 27 फीसदी कम था, लेकिन इस एक सिस्टम ने बिलासपुर संभाग में सूखे के घाटे को पूरा कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक, यह वेदर सिस्टम अब उत्तर छत्तीसगढ़ (सरगुजा संभाग) की ओर बढ़ रहा है। 18 जुलाई को उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ में कहीं-कहीं भारी से अतिभारी बारिश होने की चेतावनी (ऑरेंज अलर्ट) जारी की गई है।
इस मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर में बीते 20 वर्षों की सबसे गंभीर बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है। शहर के सरकंडा, चांटीडीह, दोमुहानी, देवरीखुर्द और मानिकपुर जैसे निचले इलाके पूरी तरह डूब चुके हैं। अरपा चेक डैम की नहर टूटने से रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया है। सरकंडा के बंधवापारा में एसडीआरएफ की टीम ने नावों की मदद से 40 से अधिक लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया। वहीं, दोमुहानी में 10 से अधिक घर टापू बन गए, जहां लोग रातभर फंसे रहे।
बिजली के ट्रांसफार्मर पानी में डूब जाने के कारण आधे से ज्यादा शहर में ब्लैकआउट की स्थिति है। कलेक्टर बंगले सहित कई वीआईपी इलाकों में पानी भर गया है, जिसे निकालने में निगम की टीमें जुटी हैं। सुरक्षा के मद्देनजर स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।
बिलासपुर-मस्तूरी राष्ट्रीय राजमार्ग और लीलागर नदी पुल पर पानी आ जाने से सड़क संपर्क टूट गया है। रेलवे स्टेशन और यार्ड के ट्रैक पूरी तरह डूबने के कारण बिलासपुर रेल मंडल ने 5 मेमू ट्रेनें रद्द कर दी हैं, जबकि 3 एक्सप्रेस ट्रेनों को डायवर्टेड रूट से चलाया जा रहा है।
बिलासपुर के अलावा इस मौसमी सिस्टम का असर पड़ोसी जिलों में भी व्यापक रूप से देखा गया है। जांजगीर-चांपा, सक्ति और रायगढ़ जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से नदियां-नाले उफान पर हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जांजगीर के अकलतरा में 17 सेमी, जबकि नवागढ़, सीपत और पामगढ़ में 11 से 10 सेमी तक बारिश दर्ज की गई है। शिवरीनारायण और हसदेव नदी के तटीय गांवों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है। सक्ति जिले में कई ग्रामीण पुल-पुलिया डूबने से दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। खेतों में पानी भर जाने से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
रायगढ़ में भी लगातार बारिश से केलो नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है। निचले इलाकों की बस्तियों में पानी भरने के कारण प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकानों के ढहने और मवेशियों के बहने की खबरें हैं।