चिप्स को व्यापारी दोबारा उपयोग कर विभिन्न कार्यो में इस्तेमाल कर रहे हैं।
बिलासपुर. एसईसीआर ने प्लास्टिक कचरे से पर्यावरण को बचाने बॉटल क्रशर प्लांट की स्थापना की है। इससे महीनेे में 1046 किलो ग्राम चिप्स तैयार कर पुन: उपयोग में लाया जा रहा है। इससे वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग भी हो रहा है,और पर्यावरण को नुकसान से बचाने प्रयास भी जारी है। रेलवे स्टेशन और ट्रेनों के भीतर मिलने वाले प्लास्टिक बॉटल को लगातार ठिकाने लगाने से रेलवे का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा था। इस समस्या से निजात पाने के लिए रेलवे के इंजीनियरों ने प्लास्टिक बॉटल क्रशर प्लांट की स्थापना की है। कोचिंग यार्ड में रिसायकिल कर दुबारा उपयोग में लाने प्लास्टिक बॉटल को क्रशर प्लांट की सहायता से चिप्स में तबदील किया जा रहा है। इसे व्यापारियों को नीलामी के माध्यम से बेचा जा रहा है। चिप्स को व्यापारी दोबारा उपयोग कर विभिन्न कार्यो में इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्रश बोटलों का रिसायकलिंग स्टोर विभाग में : एसईसीआर कोचिंग प्लांट में प्लास्टिक क्रश चिप्स को रिसाइकिल करने के लिए स्टोर विभाग जीएसडी के पास भेज देता है वहां चिप्स की पैकिंग के बाद नीलामी होती है, जिसे व्यापारी खरीद कर पुन: प्लास्टिक के अन्य उत्पाद बनाने में उपयोग करते हंै।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण : पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान अगर प्लास्टिक से होता है। क्योंकि प्लास्टिक में जो नान बायोडिग्रेडिबल तत्व होता है वह जल्द नष्ट नहीं होता। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है इसे देखते हुए एसईसीआर कोचिंग डिपो में मौजूद संसाधनों से प्लास्टिक क्रशर बॉटल मशीन का आविष्क ार किया है।
महीने में 1046 चिप्स का निर्माण : बिलासपुर स्थित कोचिंग डिपो में लगा प्लास्टिक बाटल क्रशर प्लांट में उन खाली प्लास्टिक की बोतलों को स्टेशनों और गाडिय़ों से इक्टठा क्रश किया जाता हैं। और माह में लगभग 1046 प्लास्टिक चिप्स में तबदील किया जाता है।
पर्यावरण की दिशा में रेलवे काम कर रहा है : कोचिंग डिपो में प्लास्टिक बॉटल क्रशर प्लांट लगाया गया हैं. प्लांट में महिने में लगभग 1046 चिप्स तैयार कर व्यापारियों को नीलाम की जा रही है। इससे रेलवे के एकत्र हो रहे प्लास्टिक डस्ट से निजाद मिल रही है वही पर्यावरण संरक्षण की दिशा रेलवे कार्य भी कर रहा है।
डॉ प्रकाश चंद्र त्रिपाठी, उप महाप्रबंधक व सीपीआरओ जोनल मुख्यालय