समाज सेवा के लिए सिर्फ धन ही आवश्यक है यह कतई जरूरी नहीं है। लोगों को अच्छे विचार, संस्कार और अच्छे सुझाव तो दे ही सकती हूं। आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित कर सकती हूं। बच्चियों को जादू, टोना जैसे अंधविश्वास से दूर रखने के लिए उन्हें जागरूक करने का कार्य भी समाज सेवा से कहीं कम नहीं है।
डॉ. शिवकृपा मिश्र
बिलासपुर. समाज के अति पिछड़े वर्ग में आज भी जादू, टोना, झाड़ फूंक जैसे अंधविश्वास व्याप्त है। अधिकतर नई पीढ़ी अच्छे संस्कारों से अछूती है। इसी विकट समस्या को दूर करने का बीड़ा शहर की वरिष्ठ समाज सेविका शोभा त्रिपाठी ने उठाया है। समाज के कमजोर लोगों के प्रति सेवाभाव तो उनके मन में बचपन से ही था लेकिन जब उनकी बेटी ने बताया कि स्कूल में एक बच्ची अक्सर भूखी रहती है रोती रहती है तो उनके अंतरमन में बैठा सेवा बाहर निकल आया और उन्होंने अपनी बच्ची के टिफिन में उस बच्ची के लिए दो रोटी ज्यादा देने लगी। इसके बाद जो सिलसिला शुरू हुआ 30 साल से जारी है। बिलासपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ी व मलिन बस्तियों में जाकर बस्ती के बच्चों खासकर बच्चियों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चियों को संस्कार की शिक्षा देती हैं। बच्चियों को गुड एवं बैड टच के बारे में बारे बताती हैं। जादू, टोना, झाड़-फंूक जैसे अंधविश्वासों को कहानियों के माध्यम से दूर करती हूं। वह बताती है अब तक 10 हजार से ज्यादा बच्चियों को जागरूक कर चुकी हैं।
ब्यूटरीपार्लर पर पैसा फूंकने से ज्यादा जरूरतमंदों के चेहरे पर लाए मुस्कान
शोभा त्रिपाठी व्यक्तिगत जीवन से ज्यादा अपने सामाजिक जीवन को लेकर अधिक संवेदनशील रहती हैं। कहती हैं मुझे हमेशा से उन लोगों की जिंदगी अधिक व्यथित करती रही है जिन्हें मूलभूत चीजों के लिए भी मोहताज और संघर्षरत रहना पड़ता है। समाजसेवा एक चुनौती भरा कार्य है। कहती हैं ब्यूटीपार्लर में 5000 फूंकने से ज्यादा अच्छा इन पैसों से उन चेहरों पर मुस्कान लाना है जो जरूरतमंद हैं, अति पिछड़े हैं। इनकी थोड़ी सी मदद से ही आत्मा को जो सुकून व शांति मिलती है उसे शब्दों में नहीं पिरोया जा सकता।
कोरोना काल में प्रतिदिन 200 को भोजन कराया
शोभा त्रिपाठी बताती हैं कि कोरोना काल में ऐसे बहुत से परिवार देखे जिनके समक्ष भोजन के लाले पड़े थे, उन्होंने ब्राह्मण विकास मंच व अन्य संगठनों की ओर से राशन, वस्त्र व दवाओं की व्यवस्था कराई गई। प्रतिदिन 200 लोगों को भोजन बनाकर कराया गया। इसी प्रकार लायंस क्लब की ओर से हर 25 तारीख को हॉस्पिटलों में जाकर उस महीने में जन्म लेने वाली बच्चियों को मिठाई, वस्त्र देकर सम्मानित किया जाता है। ब्राह्मण समाज की ओर से प्रति वर्ष 101 बटुकों को यज्ञोपवीत संस्कार कराया जाता है।
पौधरोपण का नया तरीका इजाद
शोभा त्रिपाठी पौधरोपण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य करती हैं। नीम, पीपल, बरगद, मुनगा के बीज को सूखाकर मिट्टी में भरकर उसका गेंद बनाती हैं। बरसात के पूर्व सड़क के किनारे डाल देती हैं। बारिश होते ही अधिकतर बीज पनपकर कुछ ही दिनों में पेड़ का रूप धर लेते हैं।
सिर्फ धन से ही समाज सेवा नहीं
शोभा त्रिपाठी उम्र के 62वें पड़ाव पर भी वे समाज सेवा के प्रति दृढ़संकल्पित हैं। बालिका विकास और सामाजिक बदलाव जैसे कई क्षेत्रों में उनका योगदान लोगों के लिए प्रेरणास्पद है। जागृति महिला समिति से आरंभ हुआ उनका सफर लायंस क्लब इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3233सी की डिस्ट्रिक्ट चेयरपर्सन, शहर समता मंच प्रयागराज की प्रदेश अध्यक्ष, विश्व हिन्दी साहित्यकार मंच की प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंघ महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष सहित अनेकानेक संगठनों से जुड़कर समाजसेवा की उनकी यात्रा ने विराम नहीं लिया। शोभा त्रिपाठी एक लोकप्रिय कवियित्री भी हैं, इनकी फेमस बुक काव्य शोभा सहित 36 सांक्षा संकलन रचनाएं बेदह लोकप्रिय हैं। कहती हैं समाज सेवा के लिए सिर्फ धन ही आवश्यक है यह कतई जरूरी नहीं है। लोगों को अच्छे विचार, संस्कार और अच्छे सुझाव तो दे ही सकती हूं। आगे बढऩे के लिए प्रोत्साहित कर सकती हूं। बच्चियों को जादू, टोना जैसे अंधविश्वास से दूर रखने के लिए उन्हें जागरूक करने का कार्य भी समाज सेवा से कहीं कम नहीं है।इलाहाबाद में जन्मीं शोभा त्रिपाठी ने बीए व आयुर्वेदरत्न की शिक्षा प्राप्त की है। विवाह के बाद अपने पति के पास बिलासपुर आ गईं। बेटी के जन्म के बाद वे समाज सेवा के प्रति उन्मुख हुईं।