
coronavirus Update: कोरोनावायरस संकट के दौरान कई शोधकर्ता ये दावा करते रहे हैं कि युवा लोगों को कोरोना का ज्यादा खतरा नहीं है। लेकिन हाल में हुए एक अध्ययन में सामने आया कि भले युवाओं को शारीरिक तौर पर कोरोना संक्रमण का खतरा कम हो सकता है खतरा नहीं हैं, पर उनके मेंटल हेल्थ के कोरोना बेहद गंभीर साबित हुआ है। शोध में कहा गया है कि यूके में मानसिक बीमार का इतिहास रखने वाले 80% से अधिक युवाओं ने इस बात को स्वीकार किया कि कोरोनावायरस संकट शुरू होने के बाद से उनकी स्थिति खराब हो गई है।
मेंटल हेल्थ चैरेटी यंगमाइंड्स के इस अध्ययन में, 25 वर्ष से कम आयु के, मानसिक बीमारी का इतिहास रखने वाले 2,111 लोगों से पूछा गया था कि महामारी ने उन्हें कैसे प्रभावित किया है। तो 83% युवाओं ने कहा कि महामारी ने उनके मानसिक स्वास्थ्य को खराब कर दिया है, 32% ने कहा कि वे बहुत बुरा अनुभव कर रहे हैं, जबकि 51% ने कहा कि उनकी मानसिक स्थिति थोड़ी बदतर हा गई है।
सर्वेक्षण 20 मार्च से 25 मार्च के दौरान किया गया। जब ब्रिटेन के स्कूल ज्यादातर छात्रों के लिए बंद थे, और कोरोना को रोकने के लिए प्रतिबंधात्मक उपाय किए गए थे।
जब चैरिटी ने उत्तरदाताओं से पूछा कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे अधिक किस बात का प्रभाव पड़ा है, तो दिनचर्या और सामाजिक अलगाव के नुकसान सबसे बड़े करण नजर आए।
मानव त्रासदी
यंगमाइंड्स की मुख्य कार्यकारी एम्मा थॉमस ने कहा कि महामारी एक "मानव त्रासदी" थी जो हमारे समाज में हर किसी के जीवन में बदलाव लाती रहेगी। इस सर्वेक्षण के परिणाम बताते हैं कि युवा लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका कितना बड़ा प्रभाव पड़ा है और आगे भी रहेगा। "
यंगमाइंड्स के अभियानों के निदेशक टॉम मैडर्स ने कहा कि हालांकि, उत्तरदाताओं ने संक्रमण को रोकने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन किया। लेकिन कुछ गतिविधियों और दिनचर्या उनमें से कई के लिए प्रतिबंध से ज्यादा महत्वपूर्ण थी। युवाओं ने माना कि उनकी मानसिक स्थिति नकारात्मक होती जा रही है।
मडर्स ने यह भी सुझाव दिया कि सोशल मीडिया के माध्यम से भी परिवार और दोस्तों के साथ संबंध बनाए रखना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन सोशल मीडिया का उपयोग नियंत्रित होना चाहिए।