
डायबिटीज में ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए दवाओं के अलावा शारीरिक सक्रियता भी जरूरी है ताकि पेन्क्रियाज की सेहत सुधर सके। तनाव रोग को बढ़ाता है। ऐसे में ये योगासन तनाव कम कर पाचनक्षमता व मांसपेशियों को मजबूती देकर इंसुलिन बनाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में-
सुप्तबद्धकोणासन
चटाई पर बैठकर गोल तकिए को सीधा कर उसपर कमर टिकाएं। घुटनों से मोड़ते हुए पैरों के तलवों को एक-दूसरे से मिलाएं। एक बेल्ट को कमर के पीछे से लेते हुए आगे लाएं व पंजों को इस तरह बांधें कि तलवे मिल जाएं। तकिए पर चादर रखकर गर्दन-सिर को सपोर्ट दें। दोनों हथेलियां ऊपर की ओर रखते हुए दाएं-बाएं फैलाएं। १०-१५ सेकंड इस स्थिति में रुककर प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
ध्यान रखें : हाल ही जिनकी घुटने, कूल्हा, कंधा या पेट से जुड़ी सर्जरी हुई हो वे न करें। प्रेग्नेंसी में डॉक्टरी सलाह से करें।
मत्स्यासन
इसमें गोल व लंबे तकिए को रीढ़ की हड्डी की उल्टी दिशा में रखें। इसपर एक समतल तकिए को भी रखें। दंडासन की मुद्रा में बैठकर कमर के बल पीछे झुकें। इस दौरान कमर को तकिए पर टिका लें। हाथों को पीछे ले जाएं व हथेलियों को आपस में मिला लें। सपोर्ट के लिए सिर के नीचे 2-3 चादरों को एक के ऊपर एक रखें। पैरों को घुटने से मोड़ें व तलवों को आपस में मिलाएं। 3-10 मिनट के लिए इस आसन को कर सकते हैं। प्रारंभिक अवस्था में आने के लिए जल्दबाजी न करें।
ध्यान रखें : हाई ब्लड प्रेशर या जिन्हें रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी हो वे इसका अभ्यास न करें।
मेरूदंडासन
एक कुर्सी पर बैठ जाएं। घुटनों के बीच गोल-लंबा तकिया दबाएं। तकिया जमीन से ३ इंच ऊपर हो व कूल्हे का जोड़, घुटना और टखना एक सीध में हो। गहरी-लंबी सांस लें व छोड़ते समय एक के बाद एक पहले सीने फिर पेट, कंधे व गर्दन को दाईं ओर ले जाएं व दोबारा सांस लेकर छोड़ते समय पुन: वाली स्थिति में आएं। ऐसा बाईं तरफ से भी दोहराएं। कमर सीधी रखें व सीने को आगे बढ़ाएं। कंधा पीछे की ओर खीचें। थोड़ी देर बाद प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
ध्यान रखें : जिनकी हाल ही कोई सर्जरी हुई हो वे डॉक्टरी सलाह के बाद ही इसे करने का प्रयास करें।