
दिमाग में हर वक्त गलत विचार आना जीवन को प्रभावित करता है।जिसकी वजह से कर्इ बार आप अनचाहे कर्इ परेशानियाें में फंस जाते हैं।आइए जानते हैं इससे निपटने के उपायाें के बारे में :-
नकारात्मकता क्या है?
नकारात्मकता निराशावादी दृष्टिकोण है जिसमें व्यक्तिको हर वक्तकुछ गलत होने का डर लगता है जैसे 'कोई मुझे प्यार नहीं करता', 'दुनिया बहुत ही बेकार है', 'कहीं घूमने जाएंगे तो दुर्घटना हो जाएगी'। इससे उसमें नकरात्मकता बढ़ती जाती है।
हम दूसरों को जल्दी सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित कर देते हैं पर खुद को नहीं समझा पाते, ऐसा क्यों? अक्सर व्यक्ति खुद को अच्छा काउंसलर मानता है लेकिन दूसरों को निराशा से बाहर निकालने के चलते थोड़ा निराशावादी दृष्टिकोण अंजाने में इकट्ठा कर लेता है। वह चाहकर भी सकारात्मक सोच नहीं बना पता। ऐसे में साइकोलॉजिस्ट से परामर्श लें।
क्या बढ़ती उम्र के साथ यह अधिक हावी होने लगती है?
नहीं, उम्र के साथ नहीं बल्कि यह माहौल या किसी पूर्वाग्रह के कारण भी हो सकती है। जैसे बुजुर्गों में जिंदगी के कड़वे अनुभव उन्हें नकारात्मकता से भर देते हैं। उन्हें मनपसंद कार्य में व्यस्त कर या उनसे बात की जाए तो वे इससे बाहर निकल सकते हैं।
यह किन स्थितियों में बढ़ती है व इलाज क्या है?
किसी लंबी बीमारी- स्वयं की या परिजन की, परीक्षा के परिणाम के समय, किसी मृत्यु या दुर्घटना की वजह से, बार-बार विफल होना जैसी चीजें नकारात्मक सोच को बढ़ाती हैं। नकारात्मकता सिर्फ एक सोच है जिसे बदला जा सकता है। इसके लिए साइकोथैरेपी की विभिन्न तकनीकों के जरिए नकारात्मक विचारों को सकारात्मक सोच में बदला जाता है।