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पित्त, कफ व रक्त विकार के लिए फायदेमंद हैं गूलर के कच्चे और पके फल

गूलर बहुगुणी है। इसका कच्चा और पका दोनों तरह का फल उपयोगी है। साथ ही इसकी जड़, छाल आदि भी चिकित्सकीय रूप से इस्तेमाल होती है।
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Oct 18, 2019
पित्त, कफ व रक्त विकार के लिए फायदेमंद हैं गूलर के कच्चे और पके फल
sycamore benefits for health

आयुर्वेद में कई वर्षों से रोगों के इलाज में इस्तेमाल किया जा रहा गूलर बहुगुणी है। इसका कच्चा और पका दोनों तरह का फल उपयोगी है। साथ ही इसकी जड़, छाल आदि भी चिकित्सकीय रूप से इस्तेमाल होती है। गर्मी के मौसम में खासतौर पर इसके फूल काम में लिए जाते हैं जो कि अंजीर के फल के समान होते हैं।

पोषक तत्त्व : कच्चे गूलर का स्वाद फीका व पके का मीठा होता है। एंटीऑक्सीडेंट, एंटीडायबिटिक, एंटीअल्सर, एंटीइंफ्लेमेट्री, एंटीअस्थमेटिक तत्त्वों से युक्त गूलर कई अन्य रोगों में प्रयोग होता है।

इस्तेमाल : गूलर के कच्चे फल का चूर्ण 10-20 ग्राम, इसका काढ़ा 50-100 एमएल और इसका दूध 10-15 बूंद की मात्रा में लिया जा सकता है। गूलर के पेड़ के विभिन्न तत्त्वों से निकलने वाले दूध को कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी बनाने में भी प्रयोग किया जाता है।

ये हैं फायदे : प्रकृति में ठंडा होने के कारण गूलर पित्त, कफ व रक्त विकार को दूर करता है। आंखों से संबंधी रोगों के अलावा मधुमेह, शारीरिक कमजोरी, अल्सर, हड्डियों से जुड़े रोगों में लाभदायक है। यह त्वचा के घाव भरने में भी सहयोगी है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
18 Oct 2019 01:36 pm
Published on:
18 Oct 2019 01:36 pm