
हाई ब्लड प्रेशर की तरह ही लो ब्लड प्रेशर भी नुकसानदायक है। आजकल युवा इससे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। लो बीपी की स्थिति में शरीर में रक्तसंचार धीमा होने से जरूरी अंगों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता। जिससे चक्कर आने, आंखों के सामने अंधेरा व बेहोशी छाने, हृदयगति बढऩे, सिरदर्द, हाथ-पैर ठंडे पड़ने व थकान जैसे लक्षण महसूस होते हैं।संतुलित आहार लेने और कुछ योगासनों के अभ्यास से परेशानी में राहत मिलती है।
नौकासन
ऐसे करें: पीठ के बल लेटकर दोनों पैरों को एकसाथ जोड़ें। दोनों हाथों को शरीर के पास स्पर्श करें। सांस छोड़ते हुए हाथों को पैरों की तरफ खींचें। पैर-छाती ऊपर उठाएं। इस दौरान आंखें, हाथ-पैरों की अंगुलियां एक सीध में हों। पेट की मांसपेशियों के सिकुडऩे के साथ नाभि पर हो रहे खिंचाव को महसूस करें। गहरी सांस लेते हुए इस अवस्था में कुछ देर रुकें। सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं। शरीर ढीला छोड़ें।
ये न करें: जल्दबाजी व झटके से शरीर ऊपर न उठाएं। कमर दर्द, स्लिप डिस्क, हाई बीपी या हृदयरोगी हैं तो न करें।
सूर्यभेदी प्राणायाम
ऐसे करें : पद्मासन या सुखासन की मुद्रा में बैठें। बाएं हाथ को सीधा कर बाएं घुटने पर रखें। आंखें बंद रखें। दाएं हथेली की तर्जनी और मध्यमा अंगुली को मोड़ते हुए अंगूठे को नाक के दाएं नथुने पर रखें। बाएं नथुने से सांस अंदर लेते हुए अनामिका और कनिष्ठिका अंगूली से बायां नथुना बंद करें और सांस दाएं नथुने से बाहर छोड़ें। सांस अंदर लेने की प्रक्रिया के दौरान सांस को क्षमतानुसार अंदर रोककर रखें। 2-3 बार इसे दोहराकर प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
ये न करें: आमतौर पर प्राणायाम में किसी प्रकार की सावधानी की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन इसके बावजूद असहजता महसूस हो तो न करें।
मत्स्यासन
ऐसे करें: लो ब्लड प्रेशर के लिए इसे सबसे उत्तम योगासन मानते हैं। पद्मासन की मुद्रा में बैठकर पीछे की ओर झुकते हुए लेट जाएं। हथेलियों को आपस में मिलाकर लॉक कर लें। पीठ के कंधे वाले हिस्से को ऊपर उठाते हुए गर्दन मोड़ें और सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन पर टिकाएं। दोनों पैर के अंगूठे को हथेलियों से पकड़ें। काेहनियां जमीन से स्पर्श करें। सामान्य सांस लेते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
ध्यान रखें: हर्निया, पेट का अल्सर, माइग्रेन, अनिद्रा या कमरदर्द की समस्या है तो इसे न करें।