गरड़दा मध्यम सिंचाई परियोजना की 29 किलोमीटर की बची हुई नहर का निर्माण कार्य 70 करोड रुपए की लागत से शुरू होगा।
नमाना. गरड़दा मध्यम सिंचाई परियोजना की 29 किलोमीटर की बची हुई नहर का निर्माण कार्य 70 करोड रुपए की लागत से शुरू होगा। इसके लिए विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो बरसात से पहले नहर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। 29 किलोमीटर नहर का हिस्सा वन विभाग में आने के कारण पिछले कई वर्षों से अटका हुआ था।
वन विभाग ने अनांपति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 29 किलोमीटर नहर के दोनों सिरों पर 6 फीट ऊंचाई की दीवार बनाने की शर्त रखी थी, जिसकी लागत करीब 60 करोड रुपए के लगभग आ रही थी, लेकिन जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने वन विभाग की इस शर्त पुनर्विचार करने के लिए कहा गया और 60 करोड रुपए की लागत से दीवार का निर्माण करवाना मुश्किल बताया है इस पर वन विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस शर्त पर पुनर्विचार किया गया और फिर से वन विभाग ने 29 किलोमीटर के वन विभाग के नहर के हिस्से में हर 500 मीटर पर फुट ब्रिज बनाने की बात कही, जिस पर जल संसाधन विभाग सहमत हो गया।
जल संसाधन विभाग के सहमत होने के बाद वन विभाग ने जनवरी 26 में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया। अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करवाने में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अहम भूमिका रही है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य के लिए ठेकेदारों ने निविदाओं आमंत्रित की गई है। उन निविदाओं को अप्रैल में खोला जाएगा। गरडदा बांध की दायीं और बायीं मुख्य नहर के दोनों हिस्सों में 29 किलोमीटर का हिस्सा वन विभाग में आ रहा था। इस वजह से नहर का निर्माण अटका हुआ था बाकी का निर्माण पूरा हो चुका है।
44 गांव की भूमि पर होगी सिंचाई
बांध के नहर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इस परियोजना से करीब 44 गांव के किसानों को अपनी भूमि पर सिंचाई करने की सुविधा मिलेगी जल संसाधन विभाग का कहना है कि नहर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद किसानों को नहर से पानी दिया जाएगा, जिससे 9181 हेक्टेयर भूमि पर ङ्क्षसचाई हो सकेगी। किसानों को फसलों में पानी मिलने के समय सुविधा मिलेगी।
424 करोड़ पहुंची परियोजना की लागत
23 वर्ष पहले गरड़दा मध्यम सिंचाई परियोजना की शुरुआत की गई थी। उस समय परियोजना की लागत 81 करोड रुपए थी, लेकिन जब तक परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंची लागत बढक़र 424 करोड रुपए हो गई है। सितंबर 2003 में परियोजना की शुरुआत की गई थी। 2010 में परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हो गया था, लेकिन 15 अगस्त 2010 को बांध टूट गया, फिर इसे शुरू होने में करीब 8 वर्ष का समय लग गया। 2021 में टूटे हुए हिस्से के बांध का निर्माण कार्य पूरा हुआ। लेकिन 4 वर्षों से बांध में पानी का ठहराव हो रहा है।
पेयजल को लेकर भी चल रहा है काम
गरड़दा मध्यम सिंचाई परियोजना से बूंदी पंचायत समिति के कई गांवों को पेयजल के लिए जल सप्लाई की जाएगी। इसके लिए डेम में फाउंडेशन तैयार हो चुका है। परियोजना से पंचायत समिति बूंदी के 111 गांव व 98 ढाणियों पाइप लाइन के जरिए हर घर में पेयजल सप्लाई की जाएगी।
103 किलोमीटर हैं दोनों नहर
गरड़दा मध्यम सिंचाई परियोजना की दाएं और बायी मुख्य नहर की कुल लंबाई 103 किलोमीटर है, जिसमें से 74 किलोमीटर नहर का निर्माण हो चुका है। 29 किलोमीटर नहर का हिस्सा वन विभाग में आने के चलते निर्माण कार्य अटका हुआ था। अब इस हिस्से का कार्य शुरू हो जाएगा।
इनका कहना है
नहर निर्माण कार्य में वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र जनवरी में मिल गया है। अप्रैल माह में निविदा खुल जाएगी उसके बाद काम शुरू हो जाएगा। जल्दी किसानों को बांध से नहर का पानी मिल सकेगा।
नरेंद्र सिंह, कनिष्ठ अभियंता, गरड़दा मध्यम सिंचाई परियोजना