राजस्थान विधानसभा में शीघ्र प्रस्तुत होने वाले आगामी बजट को लेकर प्रदेशभर के कर्मचारी संगठनों, पेंशनर समाज, मानदेय कर्मचारियों एवं विभिन्न सेवा संघों में व्यापक चर्चा और अपेक्षाओं का दौर जारी है।
बूंदी. राजस्थान विधानसभा में शीघ्र प्रस्तुत होने वाले आगामी बजट को लेकर प्रदेशभर के कर्मचारी संगठनों, पेंशनर समाज, मानदेय कर्मचारियों एवं विभिन्न सेवा संघों में व्यापक चर्चा और अपेक्षाओं का दौर जारी है। राज्य के लाखों कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कार्मिकों की निगाहें इस बजट पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह बजट न केवल वर्तमान आर्थिक चुनौतियों का समाधान करेगा, बल्कि कर्मचारियों व पेंशनर्स के भविष्य की नीतियों की दिशा भी तय करेगा। जिले में भी इस बजट को लेकर विभिन्न कर्मचारी संगठनों, पेंशनर समाज एवं यूनियनों ने अपनी मांगों और अपेक्षाओं को लेकर विचार-विमर्श किया।
राज्य सरकार के समक्ष कर्मचारियों से जुड़े अनेक ज्वलंत मुद्दे लंबित हैं, जिनका समाधान आगामी बजट में किया जाना अत्यंत आवश्यक है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, जबकि कर्मचारियों की क्रय शक्ति में गिरावट आई है। ऐसे में महंगाई भत्ते की बकाया किश्तों का भुगतान और वेतन विसंगतियों को दूर करना समय की मांग है।
पुरुषोत्तम पारीक, मुख्य संरक्षक, अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ
राज्य सरकार को कार्मिकों की समस्याओं को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि ठोस निर्णय लेते हुए उन्हें धरातल पर लागू करना चाहिए। नियमित भर्ती, रिक्त पदों को भरने, पदोन्नति में आ रही बाधाओं को दूर करने तथा संविदा एवं मानदेय कर्मचारियों को स्थायित्व देने की मांग प्रमुखता से रखी।
सत्यवान शर्मा, जिलाध्यक्ष अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ
विभागों में संसाधनों की कमी और कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यभार को देखते हुए बजट में मानव संसाधन विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। आर्थिक एवं सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है, जिससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आंकड़ों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
महेश वर्मा, कोषाध्यक्ष, अधीनस्थ कर्मचारी संघ
बजट में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आईटी कर्मचारियों के हितों को शामिल करने की आवश्यकता जताई। ई-गवर्नेंस के इस दौर में आईटी कार्मिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके लिए न तो पर्याप्त पद सृजित किए गए हैं और न ही स्पष्ट सेवा नियम बनाए गए हैं। आगामी बजट में तकनीकी कर्मचारियों के लिए विशेष कैडर, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन की घोषणा की जानी चाहिए।
लोकेंद्र मालव, प्रतिनिधि, कंप्यूटर एवं आईटी यूनियन
सरकार को यह समझना होगा कि पेंशनर समाज भी एक सशक्त मतदाता वर्ग है। उन्होंने बजट में सामाजिक सुरक्षा, पारिवारिक पेंशन और पारदर्शी पेंशन नीति की आवश्यकता पर बल दिया। यदि सरकार वास्तव में ‘‘कल्याणकारी राज्य’’ की अवधारणा को साकार करना चाहती है, तो पेंशनरों के हितों को प्राथमिकता देनी होगी।
मनोज जोशी, पेंशनर्स
मानदेय कर्मचारियों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें न तो नियमित किया जा रहा है और न ही उचित मानदेय मिल पा रहा है। बजट में मानदेय कर्मचारियों के नियमितीकरण और न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रावधान किए जाने चाहिए।
भूपेंद्र बैरवा, मानदेय कर्मचारी वर्ग
बढ़ती उम्र के साथ पेंशनरों की चिकित्सा आवश्यकताएं भी बढ़ती हैं। बजट में पेंशनरों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा, दवाओं पर अनुदान और विशेष स्वास्थ्य योजनाओं की मांग की। यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार का विषय भी है।
नरेंद्र त्रिवेदी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, पेंशनर समाज
पेंशनर समाज को हर बजट से बड़ी उम्मीदें रहती हैं, लेकिन अक्सर उनकी अपेक्षाएं अधूरी रह जाती हैं। पेंशन विसंगतियों को दूर किया जाए, चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार किया जाए तथा पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत का लाभ दिया जाए। उन्होंने कहा कि पेंशनर समाज ने अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष राज्य की सेवा में लगाए हैं, ऐसे में उनकी उपेक्षा किसी भी स्तर पर उचित नहीं है।
चतुर्भुज महावर, जिला अध्यक्ष एवं शिक्षाविद,पेंशनर समाज
सेवानिवृत्त सैनिकों और बैंक कर्मचारियों की भी अनेक समस्याएं हैं। चिकित्सा सुविधाएं और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों को बजट में स्थान मिलना चाहिए। देश की सेवा कर चुके सैनिकों और वित्तीय प्रणाली को सु²ढ़ करने वाले बैंक कर्मियों के अनुभव का उपयोग सरकार विभिन्न सलाहकार भूमिकाओं में कर सकती है।
नाहर सिंह राठौड़, रिटायर्ड फौजी एवं रिटायर्ड बैंककर्मी