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Bundi : कालदां वन क्षेत्र में बाघों की ट्रेकिंग के लिए ट्रेक बनाने का काम शुरू

रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कालदां के जंगलों में भी वन विभाग ने ट्रेकिंग रूट बनाने का काम शुरू कर दिया है।
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Mar 10, 2026
Bundi : कालदां वन क्षेत्र में बाघों की ट्रेकिंग के लिए ट्रेक बनाने का काम शुरू
गुढ़ानाथावतान क्षेत्र के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कालदां बफर जोन में ट्रेक का कार्य प्रगति पर।

गुढ़ानाथावतान. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कालदां के जंगलों में भी वन विभाग ने ट्रेकिंग रूट बनाने का काम शुरू कर दिया है। स्थानीय पंचायत के नीमतलाई प्लांटेशन से मशीन द्वारा ट्रेक बनाया जा रहा है। इसी प्रकार से ऊपर पठारी इलाके में भी ट्रेक बनाए जा रहे हैं, ताकि बाघों की ट्रेकिंग को प्रभावी बनाया जा सके। हिण्डोली रेंज में डाटुंदा क्षेत्र में भी कालदां से देवझर महादेव तक ट्रेक बनाया जाना है। जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में युवा बाघिन आरवीटी-8 की टेरेटरी है और ट्रेकिंग रूट नहीं होने से बाघिन की ट्रेकिंग में वन कर्मियों को परेशानी होती है। अब ट्रेक बनने से वाहनों से बाघिन की ट्रेकिंग की जा सकेगी।

बाघों के लिए बेहतरीन आश्रय स्थल
रामगढ़-विषधारी टाइगर रिजर्व के टेरिटोरियल डीएफओ के अधीन आने वाले कालदां के जंगल बाघों के लिए बेहतरीन आश्रयस्थल है। शहर से भीमलत महादेव तक के करीब 40 किलोमीटर लंबे व 6 किलोमीटर चौड़ाई में फैली पर्वत मालाओं वाले जंगल समृद्ध जैवविविधता वाले है। इस जंगल में बाघ-बघेरों के लिए प्राकृतिक गुफाएं व पेयजल स्रोत मौजूद हैं। इस इलाके में सदियों से बाघों की मौजूदगी रही है। टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र रामगढ़ सेंचुरी में बाघों के कुनबा बढऩे पर बाघ इसी जंगल में अपना आशियाना बनाएंगे। इसकी शुरुआत युवा बाघिन आरवीटी-8 ने कर दी है जो चार महीने से इस जंगल में अपनी टेरेटरी बना चुकी है।

Updated on:
10 Mar 2026 04:49 pm
Published on:
10 Mar 2026 04:49 pm