सातवें वेतन आयोग में DA की धीमी ग्रोथ के कारण आठवें वेतन आयोग में प्रभावी सैलरी हाइक अधिक दिख सकती है। DA के कम स्तर और नए फिटमेंट फैक्टर का संयोजन वेतन संरचना को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता यानी DA हमेशा से वेतन वृद्धि का अहम हिस्सा रहा है, जो बढ़ती महंगाई के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करता है। सातवें वेतन आयोग के दौरान DA में बढ़ोतरी की रफ्तार पहले के वेतन आयोगों की तुलना में अपेक्षाकृत धीमी रही है, जिससे वास्तविक वेतन वृद्धि पर असर पड़ा है। इसी सिलसिले में आठवें वेतन आयोग को लेकर यह चर्चा तेज हो गई है कि DA की धीमी ग्रोथ भविष्य में सैलरी बढ़ोतरी को किस तरह प्रभावित कर सकती है।
सातवें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ता अब तक सबसे धीमी गति से बढ़ा है, जबकि पांचवें और छठे वेतन आयोग के दौरान DA में कुल बढ़ोतरी कहीं अधिक रही थी। छठे वेतन आयोग के समय DA बेसिक सैलरी के 125 प्रतिशत तक पहुंच गया था, जबकि पांचवें वेतन आयोग में यह बढ़ोतरी करीब 74 प्रतिशत रही थी। इसके मुकाबले मौजूदा वेतन आयोग में DA वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित रही है, जो सैलरी स्ट्रक्चर में होने वाले लाभ को प्रभावित करती है।
हर नए वेतन आयोग के लागू होने पर DA को शून्य कर दिया जाता है और फिर नई दरों पर इसकी गणना शुरू होती है। उदाहरण के तौर पर, छठे वेतन आयोग के अंत में न्यूनतम वेतन का गणित देखें तो 7,000 रुपये बेसिक सैलरी, 8,750 रुपये DA, 2,100 रुपये HRA और 1,350 रुपये TA मिलाकर कुल वेतन करीब 19,200 रुपये बनता था। सातवें वेतन आयोग की शुरुआत में बेसिक सैलरी 18,000 रुपये तय की गई, HRA 4,320 रुपये, TA 1,350 रुपये और DA शून्य था, जिससे कुल वेतन करीब 23,670 रुपये पहुंचा।
सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई, यानी 157 प्रतिशत की बढ़ोतरी। हालांकि, 7वां वेतन लागू होने तक सैलेरी 19,200 रुपये हो चुकी थी और DA के रीसेट होने के कारण कुल वेतन करीब 23,670 रुपये पहुंचा। लेकिन इसमें प्रभावी बढ़ोतरी करीब 4,470 रुपये रही, जो लगभग 14.3 प्रतिशत बनती है।
अब आठवें वेतन आयोग से पहले DA करीब 60 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है। यदि उस समय बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, तो DA लगभग 10,800 रुपये होगा। अनुमानित बेसिक सैलेरी 28,000 रुपये तक जा सकती है। इसलिए नए वेतन आयोग में DA शून्य होने के बावजूद प्रभावी सैलरी में बढ़ोतरी तुलनात्मक रूप से अधिक दिखाई दे सकती है।