Home Loan Tax Rules: होम लोन पर ओल्ड टैक्स रिजीम के तहत कई सारे टैक्स बेनिफिट्स मिलते हैं। खुद के कब्जे वाले मकान पर सालाना 2 लाख रुपए तक का ब्याज टैक्सेबल आय में से घटा दिया जाता है।
Home Loan Tax Rules: होम लोन से मकान खरीदना आसान हो जाता है और आयकर अधिनियम के तहत ओल्ड टैक्स रिजीम में टैक्स बेनिफिट भी मिलते हैं। हालांकि, टैक्सेबल आय में कटौती के साथ कुछ शर्तें, बंदिशें और समयसीमा होती हैं, जिनके बारे में अक्सर टैक्सपेयर भ्रम में रहते हैं। नई कर व्यवस्था में होम लोन पर कटौती के ज्यादातर फायदे नहीं मिलते। मगर किराए पर चढ़ी प्रॉपर्टी के ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है।
खुद के कब्जे वाले मकान पर सालाना 2 लाख रुपए तक का ब्याज टैक्सेबल आय में से घटा दिया जाता है, बशर्ते कर्ज मकान खरीदने या निर्माण के लिए लिया गया हो और निर्माण तय मियाद
के भीतर पूरा हो गया हो। मरम्मत के लिए कर्ज लिया गया है या मकान के निर्माण में देर हो रही हो तो सालाना 30,000 रुपए तक की ही कटौती हो सकती है।
को-बॉरोअर ब्याज और मूलधन पर कटौती का दावा कर सकते हैं पर उन्हें प्रॉपर्टी का को-ओनर होना चाहिए। को बॉरोअर होने से ही टैक्स लाभ नहीं मिल जाता। कटौती का दावा करने के लिए प्रॉपर्टी का को-ओनर होने के साथ ऋण अदायगी में भी योगदान करना होता है।
को-बॉरोअर अगर को-ओनर भी हैं, तो प्रॉपर्टी में अपने हिस्से व ईएमआई में अपने वास्तविक योगदान के अनुपात में ही कटौती का फायदा ले सकते हैं। अगर दोनों को-ओनर आधे-आधे हकदार हैं, तो वे ब्याज की आधी-आधी रकम की कटौती का फायदा उठा सकते हैं।
होम लोन के मूलधन की अदायगी पर धारा 80सी के तहत सालाना 1.5 लाख रुपए तक की कटौती का प्रावधान है। मगर 1.5 लाख रुपए की इस सीमा में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), ईएलएसएस और जीवन बीमा प्रीमियम के एवज में मिलने वाली कटौती भी शामिल होती है। अदा किए गए मूलधन पर कटौती का दावा प्रॉपटी पर कब्जा मिलने के बाद ही किया जा सकता है।
जिस वित्त वर्ष में कब्जा मिला है, उसके खत्म होने के बाद 5 साल के भीतर प्रॉपर्टी बेच दी गई तो मूलधन अदायगी पर कटौती वाले सारे दावे निरस्त हो जाते हैं और यह रकम करदाता की आय में जोड़ दी जाती है।