Health Insurance Guide: बिगड़ती लाइफस्टाइल से युवाओं को कई बीमारियो ने घेर रखा है। हार्ट अटैक के मामले अब युवाओं में भी देखे जा रहे हैं। ऐसे में पर्याप्त रकम का हेल्थ इंश्योरेंस होना आवश्यक हो गया है।
भारत में अधिकतर नौकरीपेशा लोगों की लाइफस्टाइल उन्हें कहां ले जा रही है, यह सोचने का विषय है। रोज घंटों ऑफिस डेस्क पर लैपटॉप में बिजी रहना, EMI का बोझ, काम की टेंशन, जीरो वर्कआउट, कम नींद, जंक फूड और पलूशन। यह सब लोगों को तेजी से बीमारियों के करीब ला रहा है। बीपी और डायबिटीज तो आम बात थी ही, अब हार्ट अटैक भी काफी ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। डराने वाली बात यह है कि अब हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों की प्रॉब्लम नहीं रही है। आपने कई ऐसी वीडियोज देखी होंगी, जिनमें डांस फ्लोर, जिम, जूम कॉल्स, बोर्डरूम्स यहां तक कि मॉर्निंग वॉक करते समय भी लोगों को हार्ट अटैक आ रहा है और इनमें से अधिकतर युवा होते हैं।
जो बीमारियां पहले 50 से 70 की उम्र में होती थीं, वे अब 30 से 40 की उम्र वालों में भी काफी हो रही हैं। इसका एक कारण लोगों की बिगड़ती लाइफस्टाइल माना जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में 50 फीसदी हार्ट अटैक 50 साल से कम उम्र के लोगों को हो रहे हैं। वहीं, 25 फीसदी हार्ट अटैक 40 साल से कम उम्र के लोगों को हो रहे हैं। आईसीयू वार्ड में 4 में से एक मरीज दिल की बीमारी के चलते भर्ती हो रहा है। यह अब पैटर्न बन गया है।
विडंबना यह है कि अधिकांश युवा भारतीय हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर जागरुक नहीं हैं। या फिर उनके पास काफी कम रकम का इंश्योरेंस है, जो कि अपर्याप्त है। ज्यादातर नौकरीपेशा वालों के पास कंपनी से मिला हेल्थ इंश्योरेंस होता है। अगर कोई बड़ी मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, तो यह नाकाफी साबित होगा। मान लीजिए आपके पास 5 लाख रुपये का हेल्थ कवर है। कोई बड़ी मेडिकल इमरजेंसी आने पर आपको ICU में जाना पड़ गया तो आपका खर्चा काफी बढ़ जाएगा। हार्ट अटैक की स्थिति में एंजियोप्लास्टी+ICU+कार्डियक रिहैब+फॉलोअप्स का खर्चा। अगर आपके साथ ही आपके पति/पत्नी को भी मेडिकल इमरजेंसी आ गई तो क्या होगा? यह मेडिकल इमरजेंसी आपकी सारी सेविंग्स को बर्बाद कर सकती हैं।
पहले लोग राइडर और लिमिट एक्सटेंशन जैसी चीजों को लग्जरी समझते थे। लेकिन अब ये चीजें फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए जरूरी हो गई हैं। बड़ी संख्या में लोग हेल्थ इंश्योरेंस के साथ कोई क्रिटिकल इलनेस राइडर नहीं लेते हैं। आईसीयू लिमिट एक्सटेंशन नहीं लेते हैं। लोगों के पास सम इंश्योर्ड रिस्टोरेशन की सुविधा नहीं होती, जो उसी साल दोबारा कवरेज की जरूरत पड़ने पर काम आती है।
-क्या आपकी पॉलिसी में एनुअल हेल्थ चेकअप्स शामिल है?
-अगर मेडिकल इमरजेंसी एक ही साल में दोबारा आती है, तो क्या वह कवर होगी?
-क्या आपका कवरेज आपके पूरे परिवार को प्रोटेक्ट करने के लिए पर्याप्त है?
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह आर्टिकल वित्तीय या मेडिकल एडवाइस नहीं है। आपके लिए कितनी इंश्योरेंस कवरेज सही होगी, इसके लिए एक योग्य इंश्योरेंस एडवाइजर या हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स से परामर्श लें।)