
Nifty IT के शेयरों का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले काफी खराब रहा है। इससे निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या आईटी शेयरों में अभी खरीदारी करनी चाहिए या इंतजार करना चाहिए। निफ्टी आईटी इंडेक्स साल 2026 में तक 28.71 फीसदी तक टूट चुका है। बीच-बीच में इसमें उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला है। लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुस्ती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी अनिश्चितता के कारण रिकवरी मुश्किल मानी जा रही है।
इस साल अब तक निफ्टी आईटी इंडेक्स में 28.71 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी-50 करीब 8.32 फीसदी ही गिरा है। हालांकि, पिछले एक महीने में आईटी इंडेक्स में 7.13 फीसदी की तेजी भी आई, जो निफ्टी 50 की 1.74 फीसदी बढ़त से बेहतर है। इसके बावजूद एक्सपर्ट्स इसे स्थायी सुधार नहीं मान रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में दोबारा तेजी आई है। इससे भारत में महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, मजबूत डॉलर का कुछ फायदा निर्यात आधारित आईटी कंपनियों को मिल सकता है, लेकिन यदि अमेरिकी कंपनियां तकनीक पर खर्च घटाती हैं, तो आईटी कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा भारतीय आईटी कंपनियों को ग्राहकों के फैसलों में देरी, खर्च में कमी, अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुस्ती और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) के निवेश पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। जून में FPI ने अब तक 53,022 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं। हालांकि, महीने के दूसरे हिस्से में बिकवाली कम देखने को मिली। FPI कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी कर रहे हैं। पिछले हफ्ते के सभी चार ट्रेडिंग सेशन में FPI नेट बायर रहे हैं।
SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल हेड सुदीप शाह का मानना है कि पिछले हफ्ते की रिकवरी के बावजूद निफ्टी आईटी इंडेक्स का आउटलुक कमजोर बना हुआ है। क्योंकि इंडेक्स डेली और विकली दोनों चार्ट पर अपने मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेंड कर रहा है, जो यह बताता है कि मुख्य ट्रेंड दबाव में है।