29 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Nifty Return Analysis: निफ्टी जब भी 2 वर्षों तक स्टेबल रहा तो उसके अगले साल आई 50% तक की अच्छी तेजी, देखिए ये आंकड़े

Nifty Return: निफ्टी की रिटर्न हिस्ट्री बताती है कि ग्लोबल स्तर पर आने वाले हर बड़े संकट के बाद बाजार में गिरावट का माहौल दिखाई देता है। लेकिन इसके बाद दो साल में तेजी वापस आती है।
2 min read
Google source verification
Nifty Return Analysis For Two Years

Nifty Analysis: बड़ी गिरावट के बाद निफ्टी ने अच्छा रिटर्न दिया है। (फोटो: AI)

Nifty Return Analysis: निफ्टी में अगर पिछले दो साल में आपकी कोई खास कमाई नहीं हुई है, तो हो सकता है आने वाले समय में आपको अच्छा खासा रिटर्न देखने को मिल जाए। दरअसल निफ्टी के ऐतिहासिक आंकड़ों को जब उठाकर देखते है तो पता चलता है कि जब भी निफ्टी बिना कोई रिटर्न दिए दो साल तक एक ही स्तर पर रहा है, तो उसके बाद उसने अच्छी तेजी दिखाई है।

एडलवाइस म्यूचुअल फंड (Edelweiss Mutual Fund) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2001 के बाद ऐसे 11 मौके आए, जब निफ्टी दो साल तक लगभग स्थिर रहा। इसके बाद अगले एक साल में 5 से 50 फीसदी तक का रिटर्न मिला। वहीं, इस डेटा में दो साल से ज्यादा समय तक मार्केट के फ्लैट रहने का कोई उदाहरण नहीं है।

हर दो साल बाद आई तेजी

सितंबर 2024 में निफ्टी 26,277 के उच्चतम स्तर पर पहुंचा। इसके बाद ग्लोबल टैरिफ के कारण बाजार गिरा, लेकिन जनवरी 2026 में इसने 26,373 के स्तर को फिर से छू लिया। इसके बाद शुरू हुए अमेरिका और ईरान के संघर्ष के कारण यह फिर से 24,000 के जोन में आ गया।

2 साल का स्थिर (Flat) दौरअगले 1 साल का रिटर्न
जून 2001 – जून 200333%
जुलाई 2018 – जुलाई 202042%
अगस्त 2018 – अगस्त 2020 (कोविड अवधि)50%
Source: Edelweiss Mutual Fund

आंकड़ों के मुताबिक, जून 2001 से जून 2003 तक निफ्टी लगभग स्थिर रहा था। इसके बाद अगले एक साल में 33 फीसदी रिटर्न दिया। इसी तरह जुलाई 2018 से जुलाई 2020 के बीच बाजार में खास बढ़त नहीं रही, लेकिन उसके बाद एक साल में 42 फीसदी का रिटर्न दिया।

बाजार की सबसे बड़ी तेजी संकट के समय आई

डेटा से पता चलता है कि पिछले दो दशकों में निफ्टी के टॉप 30 ट्रेडिंग डेज ऐसे समय में आए जब ग्लोबल स्तर पर गंभीर संकट थे। इसमें 2006 में FII और DII की बिकवाली, 2008 का ग्लोबल फाइनेंशियल संकट और 2020 की कोविड महामारी शामिल हैं। इसके बावजूद अकेले 2008 की गिरावट के दौरान ही 30 में से 22 सबसे बड़े तेजी वाले दिन दर्ज किए गए।

एक्सपर्ट्स की राय क्या कहती है?

ट्रस्ट म्यूचुअल फंड (TRUST Mutual Fund) के CEO संदीप बागला का कहना है कि लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन में काफी कमी आई है। इससे मीडियम टर्म के निवेशकों के लिए यह एंट्री का अच्छा मौका हो सकता है, क्योंकि कमाई का आउटलुक बेहतर हो रहा है और निवेशकों की चिंताएं कम हो रही हैं।

लेकिन इसके उलट नुवामा (Nuvama) ब्रोकरेज का मानना है कि मार्केट सीमित दायरे में रहेगा। क्योंकि कंपनियों और अर्थव्यवस्था को लेकर कई चिंताएं बनी हुई है। जैसे कि GST कटौती का फायदा अब कम हो रहा है, अल-नीनो के प्रभाव से खेती को नुकसान पहुंच सकता है। इसके साथ ही शेयरों की वैल्यूएशन कम हुई है। मार्केट कैप-टू-जीडीपी और पी/ई रेश्यो अभी भी अपने 10 साल के औसत से ऊपर हैं।