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Gold Price: पीएम मोदी की अपील का असर या है कोई और वजह? 3 महीने में 50 टन पुराना सोना बेच चुके हैं लोग

Gold Recycling India: सोने की ऊंची कीमतों के बीच भारतीय परिवार तेजी से पुराने गहने बेच रहे हैं। अप्रैल-जून तिमाही में करीब 50 टन पुराना सोना बाजार में आया, जो पिछले साल से 43% ज्यादा है।
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भारत

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Pawan Jayaswal

Jun 29, 2026

Gold Price Today

Gold Rate: मार्केट में पुराने सोने की आवक बढ़ रही है। (PC: AI)

Investment in Gold: पीएम मोदी ने 10 मई को देश की जनता से एक साल तक गोल्ड नहीं खरीदने की अपील की थी। इस अपील के बाद मई में सोने की डिमांड में कमी दर्ज हुई थी। वहीं, अब आंकड़े बता रहे हैं कि लोग बड़ी मात्रा में घरों में रखा पुराना सोना बेच रहे हैं। भारतीय परिवारों में सोना हमेशा बचत और मुश्किल वक्त का सहारा माना जाता रहा है। लेकिन अब इसकी एक नई तस्वीर सामने आ रही है। जब सोने के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे, तो लोगों ने पुराने गहनों को संभालकर रखने के बजाय उन्हें बेचकर कमाई करना ज्यादा बेहतर समझा। इस ट्रेंड से सोने के आयात में कमी लाने में मदद मिल सकती है।

मार्केट में आया 50 टन पुराना सोना

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में देशभर में करीब 50 टन पुराने सोने की बिक्री हुई। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 43 फीसदी अधिक है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ ऊंची कीमतों की वजह से नहीं, बल्कि आगे कीमतें और गिरने की आशंका के कारण भी हुई है।

मुनाफावसूली है बड़ी वजह

हाल के महीनों में जेवराती सोने का भाव करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहा। हालांकि, अब इसमें कुछ नरमी आई है। कई लोगों को डर है कि कीमतें 1.20 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक भी आ सकती हैं। इसी वजह से लोग पुराने गहनों को नए गहनों से बदलने के बजाय सीधे बेचकर नकदी जुटा रहे हैं और ऊंचे भाव का फायदा उठा रहे हैं।

IBJA के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता का कहना है कि लोग सोने की ऊंची कीमत का इस्तेमाल नकदी जुटाने के लिए कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस साल की शुरुआत में सोना करीब 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था। अब कीमतें घटकर करीब 1.40 लाख रुपये पर आ गई हैं और लोगों को आगे और गिरावट का डर सता रहा है। इसी वजह से वे सोना बेचने का फैसला ले रहे हैं।

गोल्ड रिसाइक्लिंग कारोबार को मिल रही रफ्तार

पुराने गहनों की बढ़ती बिक्री का फायदा संगठित गोल्ड रिसाइक्लिंग इंडस्ट्री को भी मिल रहा है। पहले जो सोना घरों की अलमारी या लॉकर में वर्षों तक पड़ा रहता था, अब वह दोबारा बाजार में लौट रहा है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि अब लोग सोने को सिर्फ गहना नहीं, बल्कि एक निवेश की तरह देखने लगे हैं। जब भाव अच्छे मिलते हैं, तो वे उसे बेचकर फायदा उठाने में हिचकिचाते नहीं हैं। इससे रिफाइनर और ज्वैलर्स को लगातार पुराना सोना मिल रहा है।

पुराना सोना खरीदने वाली कंपनियों का कारोबार उछला

पुराना सोना खरीदने वाली कंपनियों के कारोबार में भी तेज उछाल आया है। मुथूट एक्सिम ने बताया कि उसके देशभर के 100 से ज्यादा गोल्ड प्वाइंट्स पर पुराने सोने की मात्रा में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी के सीईओ केयूर शाह का कहना है कि अब लोग पारदर्शी और संगठित माध्यमों से अपना पुराना सोना बेचने में पहले की तुलना में ज्यादा भरोसा दिखा रहे हैं। इससे उन्हें बेहतर कीमत मिलती है और बाजार में सोने की उपलब्धता भी बढ़ती है।

मुथूट एक्सिम ग्राहकों से पुराना सोना खरीदकर उसे शुद्ध 24 कैरेट सोने में बदलती है। इसके बाद यही सोना ज्वैलरी और सोने के सिक्के बनाने वाली कंपनियों को उपलब्ध कराया जाता है। इससे नई खदानों से सोना निकालने की जरूरत कुछ हद तक कम होती है और घरेलू आपूर्ति मजबूत होती है।

आयात पर निर्भरता घटाने का मौका

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने करीब 72.4 अरब डॉलर का सोना आयात किया। वहीं 2025 के दौरान रिसाइक्लिंग के जरिए करीब 125 से 150 टन सोना बाजार में वापस आया। इंडस्ट्री का अनुमान है कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहा तो 2026 में रिसाइक्लिंग के जरिए मिलने वाला सोना 200 से 250 टन तक पहुंच सकता है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

घरों में पड़ा है 30 हजार टन सोना

अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास करीब 30 हजार टन सोना मौजूद है। इसका बड़ा हिस्सा आज भी इस्तेमाल में नहीं है। इसी वजह से गोल्ड रिसाइक्लिंग से जुड़ी कंपनियां इसे बड़ा अवसर मान रही हैं। ऑगमोंट ने भी अपना 'गोल्ड फॉर ऑल' नेटवर्क बढ़ाकर 114 केंद्रों तक पहुंचा दिया है, जहां लोग अपने सोने की जांच, रिसाइक्लिंग और बिक्री कर सकते हैं। कंपनी के निदेशक केतन कोठारी का कहना है कि दुनिया में सबसे बड़े घरेलू स्वर्ण भंडारों में भारत का नाम शामिल है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा अभी भी निष्क्रिय पड़ा हुआ है। अगर यह सोना संगठित तरीके से बाजार में आए तो देश को इसका बड़ा आर्थिक फायदा मिल सकता है।

कहां जाएंगी कीमतें?

केडिया एडवाइजरी के एमडी अजय केडिया ने पत्रिका डॉट कॉम को बताया कि जून-जुलाई महीना थोड़ा नरम रह सकता है। लेकिन अगस्त-सितंबर से दोबारा तेजी शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा, 'नीचे में सोने में 1.40 लाख से 1.38 लाख रुपये का लेवल देखा जा सकता है। वहीं, चांदी का भाव ज्यादा से ज्यादा 1.90 से 2 लाख रुपये तक नीचे जा सकता है। यहां से चरणबद्ध तरीके से बाइंग करें तो सालभर मे चांदी सवा तीन से साढ़े तीन लाख रुपये तक जा सकती है। उधर सोने में लगभग 2 लाख का लेवल फिर से देख सकते हैं।'