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Why Share Market Fall Today: सेंसेक्स 777 पॉइंट टूटकर हुआ बंद, रियल एस्टेट शेयरों में बड़ी गिरावट, जानिए इस मंदी के बड़े कारण

Stock Market Today 15th September 2026: भारतीय शेयर बाजार आज बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ है। महंगा कच्चा तेल, अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड का 5 फीसदी के पार जाना और फेड के ब्याज दर फैसले की चिंता बाजार पर भारी पड़ी।
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Sep 15, 2026
Share Market News
शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ है। (PC: AI)

Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार आज मंगलवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ है। बीएसई सेंसेक्स आज 1.04 फीसदी या 777 अंक की गिरावट के साथ 74,003 पर बंद हुआ है। वहीं, एनएसई निफ्टी आज 1.19 फीसदी या 279 अंक टूटकर 23,118 पर बंद हुआ है। आज सबसे अधिक गिरावट निफ्टी रियल्टी में 4.04 फीसदी दर्ज हुई। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 2.41 फीसदी, निफ्टी पीएसयू बैंक में 2.29 फीसदी, निफ्टी मेटल में 2.54 फीसदी, निफ्टी मीडिया में 2.17 फीसदी और निफ्टी ऑटो में 2.01 फीसदी गिरावट दर्ज हुई है। आइए जानते हैं कि आज आई इस बड़ी गिरावट के पीछे प्रमुख वजह क्या हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में आई इस गिरावट से बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक गिरकर 472 लाख करोड़ रुपये रह गया।

बाजार में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इसके साथ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5 फीसदी के पार जाना और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर अगले फैसले को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों का मूड बिगाड़ दिया है।

कच्चा तेल फिर बना सिरदर्द

भारत के लिए सबसे बड़ी परेशानी इस समय कच्चे तेल की कीमत है। ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। मंगलवार को भी तेल की कीमतों में तेजी जारी रही। सऊदी अरब की एक अहम ऑयल पाइपलाइन के अब तक बंद रहने से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया था। यह मई के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक तेल महंगा रहने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ने, महंगाई पर दबाव आने और कंपनियों की कमाई प्रभावित होने का खतरा रहता है। यही वजह है कि निवेशक तेल की हर चाल पर नजर रख रहे हैं।

अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5% के पार

शेयर बाजार के लिए दूसरी बड़ी चिंता अमेरिका से आई है। अमेरिकी 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 5 फीसदी के पार पहुंच गई है। यह अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार हुआ है। बढ़ती महंगाई, अमेरिकी फेड की ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका और अमेरिकी सरकारी कर्ज को लेकर चिंता ने बॉन्ड यील्ड को ऊपर धकेला है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक अमेरिकी 10 साल की यील्ड का 5 फीसदी का स्तर पार करना दुनियाभर के शेयर बाजारों के लिए दबाव बढ़ाने वाला है। उनके मुताबिक महंगा कच्चा तेल भी बाजार के लिए परेशानी बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि ब्रेंट क्रूड के 108 डॉलर के आसपास रहने और सऊदी ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को हुए नुकसान का असर बाजार पर आगे भी दिखाई दे सकता है।

अब सबकी नजर US Fed पर

निवेशकों का ध्यान अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिक गया है। फेड बुधवार को अपनी मौद्रिक नीति का फैसला सुनाएगा। बाजार में इस बात की चर्चा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, असली चिंता फैसले से ज्यादा उसके संकेतों को लेकर है। अगर फेड का रुख उम्मीद से ज्यादा सख्त यानी hawkish रहा और उसने महंगाई या आर्थिक विकास को लेकर ज्यादा चिंता जताई, तो शेयर बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है। खासकर मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और उससे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर फेड के रुख पर निवेशकों की नजर रहेगी।

महंगे तेल और ब्याज दरों का दोहरा दबाव

भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए महंगा क्रूड और अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों का मेल परेशानी बढ़ा सकता है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है। इससे रुपये और महंगाई पर भी दबाव आ सकता है। दूसरी तरफ अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड और दूसरी डॉलर आधारित संपत्तियां ज्यादा आकर्षक हो सकती हैं। इस स्थिति में उभरते बाजारों से विदेशी पैसा निकलने का जोखिम बढ़ जाता है।

भारतीय आईटी कंपनियों और दूसरी अमेरिकी बाजार पर निर्भर कंपनियों के लिए भी ऊंची अमेरिकी ब्याज दरें चिंता की वजह बन सकती हैं, क्योंकि इससे कंपनियों का खर्च और ग्राहकों की discretionary spending प्रभावित हो सकती है।

आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल?

सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, फिलहाल बाजार के सामने घरेलू संकेतों से ज्यादा ग्लोबल फैक्टर्स चुनौती बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेड का ब्याज दरों पर फैसला आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और अमेरिकी फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है तो बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, अगर तेल की कीमतों में नरमी आती है और फेड का रुख बाजार की उम्मीद के मुताबिक रहता है तो निवेशकों को कुछ राहत मिल सकती है।

(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)

Updated on:
15 Sept 2026 04:21 pm
Published on:
15 Sept 2026 04:21 pm