
सोने की डिमांड में कमी की संभावना है। (PC: AI)
Festival Gold Demand: सोना महंगा हो गया है, लेकिन भारतीयों का सोने से मोह अभी कम नहीं हुआ है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार ग्राहक जेब देखकर खरीदारी करने की तैयारी में हैं। महंगाई और रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंची कीमतों के बीच लोग कम वजन की ज्वेलरी, हल्के डिजाइन और पुराने सोने को एक्सचेंज कराकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 सितंबर को लोगों से जरूरत के मुताबिक ही सोना खरीदने की अपील की थी। इससे त्योहारी सीजन में सोने की मांग को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
इंडिया बुलियन एंड जूलरी एसोसिएशन यानी IBJA के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता का मानना है कि प्रधानमंत्री की अपील का ग्राहकों की सोच पर असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक इस त्योहारी सीजन में सोने की बिक्री की मात्रा में 10 से 12 फीसदी तक कमी आ सकती है। अगर घरेलू मांग इतनी घटती है, तो सोने के आयात में भी लगभग इतनी ही गिरावट देखने को मिल सकती है।
पिछले साल सितंबर की तुलना में सोने की कीमत में करीब 39 फीसदी का उछाल आ चुका है। 24 कैरेट सोना पिछले साल करीब 11,100 रुपये प्रति ग्राम था, जो अब लगभग 15,500 रुपये प्रति ग्राम के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में ग्राहकों के सामने बड़ी चुनौती है। बजट वही है, लेकिन सोना महंगा हो गया है। यही वजह है कि इस बार लोग कम वजन की ज्वेलरी खरीद सकते हैं। यानी जेब से पैसा कम नहीं निकलेगा, लेकिन उसके बदले मिलने वाला सोना कम ग्राम का हो सकता है। क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर हिमांक शर्मा के मुताबिक त्योहारी सीजन में सोने की ज्वेलरी की डिमांड मात्रा के हिसाब से कमजोर रह सकती है, जबकि कुल बिक्री की रकम मजबूत बनी रह सकती है।
सोने की कीमतों में तेजी और कस्टम ड्यूटी बढ़ने से ग्राहकों का बजट पहले ही खिंच चुका है। क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में संगठित ज्वेलरी कारोबारियों की बिक्री की मात्रा में 13 से 15 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। पिछले वित्त वर्ष में भी इसमें करीब 8 फीसदी की कमी आई थी। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि लोग सोना खरीदना बंद कर देंगे। भारत में शादी और त्योहार सिर्फ खरीदारी नहीं, परंपरा का हिस्सा हैं। इसलिए ग्राहक तरीका बदल रहे हैं। कोई कम कैरेट की ज्वेलरी चुन रहा है तो कोई पुराना सोना देकर नया गहना ले रहा है।
महंगे सोने के दौर में बड़े और संगठित ज्वेलरी ब्रांडों की स्थिति छोटी दुकानों के मुकाबले मजबूत दिखाई दे रही है। क्रिसिल के अनुसार संगठित ज्वेलरी कारोबार की बाजार हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2025 के करीब 38 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2028 तक 50 फीसदी हो सकती है। ब्रांड पर भरोसा, हॉलमार्किंग में पारदर्शिता और छोटे शहरों में तेजी से बढ़ती पहुंच इसकी बड़ी वजह हैं।
सुरेंद्र मेहता का भी कहना है कि छोटे ज्वेलर्स पर दबाव ज्यादा पड़ सकता है। बड़ी ज्वेलरी चेन के पास पुराने ग्राहक, ऑफर, स्कीम और सेलिब्रिटी या इंफ्लुएंसर कैंपेन जैसे कई विकल्प हैं, जिनसे वे ग्राहकों को आकर्षित कर सकते हैं।
बाजार में त्योहारी सीजन को लेकर पूरी तरह मायूसी नहीं है। कई बड़े ज्वेलर्स को उम्मीद है कि रुपये के हिसाब से बिक्री बढ़ेगी, भले ही सोने की मात्रा कम रहे। Senco Gold & Diamonds के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ Suvankar Sen के मुताबिक कंपनी को त्योहारी सीजन में बिक्री की रकम में सालाना आधार पर 20 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस बढ़त के पीछे सोने की ऊंची कीमतें होंगी और बेचे जाने वाले सोने की मात्रा कम हो सकती है। यानी तस्वीर कुछ ऐसी बन रही है कि ग्राहक कम वजन की ज्वेलरी खरीदेगा, लेकिन बिल फिर भी बड़ा रहेगा।
सोने की मांग में मई और जून के दौरान सुस्ती देखने को मिली थी। इसके बाद जुलाई के मध्य से बाजार में सुधार शुरू हुआ। शुभ समय की शुरुआत और शादी के सीजन के साथ मांग ने रफ्तार पकड़ी और अगस्त में इसमें और मजबूती आई। स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के एमडी Mangesh Chauhan को भी सोने की कीमतों में हालिया स्थिरता से बाजार के बेहतर होने की उम्मीद है। उनके मुताबिक नए स्टोर खुलने और बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के विस्तार से इस साल ग्राहकों की बिक्री और B2B मांग दोनों में सुधार हो सकता है।
जोयालुक्कास के चेयरमैन और एमडी Joy Alukkas के मुताबिक सोने की कीमत बढ़ने से ग्राहक अपनी खरीदारी पर दोबारा सोच जरूर रहे हैं, लेकिन शादी और त्योहारों के लिए ज्वेलरी की मांग खत्म नहीं हुई है। यही भारत की असली तस्वीर है। सोने की कीमत चाहे जितनी बढ़ जाए, शादी-ब्याह और बड़े त्योहारों पर इसकी खरीदारी की परंपरा बनी रहती है।
बस खरीदने का तरीका बदल रहा है। ग्राहक हल्के गहने और ऐसे डिजाइन पसंद कर रहे हैं जिन्हें अलग-अलग मौकों पर पहना जा सके। इससे उन्हें अपने बजट में ज्यादा विकल्प मिलते हैं।
महंगे सोने ने पुराने गहनों को फिर से उपयोग में लाने का चलन तेज कर दिया है। ग्राहक नया सोना खरीदने के बजाय घर में रखे पुराने गहनों को एक्सचेंज करके नए डिजाइन ले रहे हैं। KISNA Diamond & Gold Jewellery के सीईओ Parag Shah के मुताबिक कंपनी में हर पांच में से करीब एक ग्राहक पुराने सोने की अदला-बदली का विकल्प चुन रहा है। सैन्को गोल्ड एंड डायमंड्स में तो हाल के कारोबार का करीब 45 से 50 फीसदी हिस्सा गोल्ड एक्सचेंज से आया है। इसका मतलब साफ है। लोग जेब से पूरा नया पैसा लगाने के बजाय घर में पड़े सोने की कीमत को नए गहनों में बदल रहे हैं। यह तरीका प्रधानमंत्री की उस अपील से भी मेल खाता है, जिसमें उन्होंने सोने की गैर-जरूरी खरीद को कम करने की बात कही थी।
Updated on:
15 Sept 2026 03:34 pm
Published on:
15 Sept 2026 03:34 pm
