इंश्योरेंस प्रीमियम निर्धारित करने के लिए बीमा कंपनियां इस डेटा का उपयोग ड्राइवर के रिस्क प्रोफाइल का आकलन करने के लिए कर सकती हैं।
नई दिल्ली : कार इंश्योरेंस खरीदना हर कार मालिक के लिए जरूरी होता है और इसका प्रीमियम कार के मॉडल पर निर्भर करता है। लेकिन अब ये नियम बदल सकता है। कार इंश्योरेंस कार के मॉडल नहीं बल्कि अापके ड्राइविंग के तरीके पर निर्भर करेगा। जी हां, ये सच है। इसका मतलब है कि अगर आप खराब ड्राइविंग करते हैं तो आपके कार इंश्योरेंस का प्रीमियम ज्यादा देना पड़ेगा।
यूजर बेस्ड होगा इंश्योरेंस प्रीमियम-
इंश्योरेंस कंपनियां आपकी कार में लगे सेंसर्स और टेलिमैटिक्स डिवाइसेज की मदद से यह अनुमान लगा पाएंगी कि आप कितने अच्छे या खराब तरीके से अपनी कार चला रहे हैं। ड्राइविंग के आधार पर होने वाले इंश्योरेंस को यूजेज बेस्ड इंश्योरेंस नाम दिया गया है।
कार में लगे सेंसर भेजते हैं डेटा-
कार में कम से कम 70 सेंसर होते हैं। ये सेंसर क्लाउड पर लगातार डेटा भेजते हैं। इंश्योरेंस प्रीमियम निर्धारित करने के लिए बीमा कंपनियां इस डेटा का उपयोग ड्राइवर के रिस्क प्रोफाइल का आकलन करने के लिए कर सकती हैं।
रिकॉर्ड होता है ड्राइविंग का तरीका-
यूजेज बेस्ड इंश्योरेंस यानि UBI के लिए कार में देने वाली टेलीमैटिक्स डिवाइसेस के माध्यम से डेटा जुटाया जाता है। यानि किस तरह से आप अपनी कार के फीचर्स का इस्तेमाल करते हैं इस बात से तय होता है कि आपकी ड्राइविंग स्किल्स कैसी हैं। इनमें अचानक ब्रेक लगाना, कॉर्नर पर फास्ट ड्राइविंग, तेजी से अक्सेलरेटर दबाना और कार से तय की गई दूरी, गाड़ी की बॉडी पर नुकसान के कारण, तेजी से डायरेक्शन बदलाव और एयरबैग्स का काम करना जैसे ड्राइविंग पैटर्न शामिल हैं।
यानि अगर कोई इंसान अचानक से ब्रेक लगाता है या लंबे समय तक एक्सलरेटर को ज्यादा देर तक दबाकर कार चलाता है तो उसे खराब ड्राइवर माना जाता है। तो उसे जोखिमभरा ड्राइवर माना जाएगा और ज्यादा प्रीमियम का भुगतान करना पड़ेगा । जो व्यक्ति कम दूरी और धीमी गति से ड्राइव करता है, उसे प्रीमियम में छूट मिलेगी, क्योंकि उसे 'सुरक्षित' ड्राइवर माना जाता है।