
नई दिल्ली: सितंबर के दस्तक देते ही जिस एक चीज की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई पड़ रही है वो है चालान । दरअसल 1 सितंबर से सरकार ने नया मोटर व्हीकल एक्ट लागू किया है और इसके लागू होने के बाद से ही हर दिन भारी-भरकम जुर्मानों की खबरें आने लगी है। इसे अच्छी खबर कहें या बुरी लेकिन नए मोटर व्हीकल एक्ट के लागू होने के बाद से चालान के डर से ही सही लेकिन लोग संजीदगी से ट्रैफिक रूल्स फॉलो कर रहे हैं। और ये हम कोरी लफ्फाजी नहीं कर रहे बल्कि आंकड़ें इस बात की गवाही देते हैं ।
मोटर व्हीकल एक्ट का प्रभाव-
जारी हुए 4 लाख Puc-
आंकड़ो के मुताबिर पिछले 15 दिनों सिर्फ दिल्ली में 4 लाख puc जारी किये जा चुके हैं । और लोग हर दिन इस मामूली से समझे जाने वाले पेपर को बनवाने के लिए लाइन में लगे नजर आते हैं ।
चालान के डर से बढ़ी इंश्योरेंस बिक्री-
वहीं इंश्योरेंस की बात करें तो policybazaar.com का कहना है कि पिछले तीन दिनों में बिके वाहन बीमा में 90 फीसदी ऐसे लोगों ने खरीदे हैं जिनके वाहन बीमा की वैधता समाप्त हो चुकी थी। कंपनी का कहना है कि नये मोटर वाहन कानून के अमल में आने के बाद वाहन बीमा की ऑनलाइन बिक्री दोगुनी से अधिक बढ़ गयी है। यानि सरकार ने जिस उद्देश्य से ये नियम बनाया है वो सफल होते दिख रहा है।
जब इस नए ट्रैफिक नियम का असर सही है तो फिर आए दिन वायरल होने वाले इन वीडियोज और जुर्माने की राशि को लेकर हंगामा करने वाले लोग कौन है और आखिर उन्हें इतनी समस्या क्यों हो रही है।
ट्रैफिक पुलिस के काम करने का तरीका-
दरअसल समस्या नियम या जुर्माने की नहीं बल्कि नियम को लागू कराने के तरीके से है। कई बार देखा जाता है कि पुलिस वाले वाहन चालकों को रोक कर एक के बाद एक लगातार तब तक पेपर और नियमों की तफ्सील करते हैं जब तक कि उनको कहीं कोई कमी न मिल जाए ऐसे में उनकी नियत पर शक होना लाजमी है। यही बात आम आदमी को खलती है।
तैयारी की जरूरत- इस नियम को लागू करने से पहले लोगों को इसके प्रति थोड़ा सा जागरूक करने की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और जल्दबाजी में लागू करने की वजह से लोग इसके लिए तैयार नहीं थे ।