
चेन्नई.
भारतीय तटरक्षक बल में निगरानी पोत विग्रह को शामिल किया गया है। चेन्नई में एक कमीशनिंग इवेंट में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा निगरानी पोत विग्रह को कमीशन किया गया है। समारोह में सेना प्रमुख जनरल एम.एम.नरवणे भी मौजूद रहे।
इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस तरह दुनिया में बदलाव हो रहे हैं, सुरक्षा घेरा मजबूत करने की जरूरत है। वैश्विक सुरक्षा, सीमा विवाद और समुद्री प्रभुत्व के कारण दुनियाभर के मुल्क अपनी सैन्य शक्ति को आधुनिकीकरण और मजबूत बना रहे हैं। हमारा देश इन घटनाओं से अछूता नहीं रह सकता। उन्होंने आगे कहा कि यह हमारे देश पर अधिक लागू होता है। एक ऐसा देश होने के नाते जिसका हित सीधे हिंद महासागर से जुड़ा हुआ है।
कमीशनिंग समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने निगरानी पोत की खूबियों के बारे में बताते हुए कहा कि इस पोत का शामिल होना हमारी तटीय रक्षा क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता को भी दर्शाता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि विग्रह एडवांस्ड रडार से लैस है, जो नेविगेशन और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में नवीनतम है। यह 100 मीटर का पोत आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित होगा और 11 अधिकारियों और 110 नाविकों की कंपनी इसका संचालन करेगी। इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो शिप बिल्डिंग लिमिटेड ने किया है। इस निगरानी पोत के कमीशनिंग के बाद भारतीय तटरक्षक बल में 157 पोत और 66 विमान होंगे।
रक्षा मंत्री ने आगे बताया कि इस निगरानी पोत की डिजाइन अवधारणा से लेकर विकास तक पूरी तरह से स्वदेशी है। यह पोत हेलीकाप्टरों से लैस होते हैं और समुद्री सीमाओं में निगरानी करने के साथ-साथ तस्करी रोकने और समुद्री लुटेरों को पकडऩे में भी सहायक होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय तटरक्षक बल हर चुनौती से लडऩे को तैयार है।
राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि हमारे पास अपनी क्षमताओं का पूरा उपयोग करने, नीतियों का लाभ उठाने और देश को स्वदेशी जहाज निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढऩे की काफी गुंजाइश है। उन्होंने दुनियाभर में हो रहे बदलाव पर बात करते हुए कहा कि इस उथल-पुथल के समय हमें अपने पहरेदारों को मजबूत रखना होगा। हालांकि ये चुनौतीपूर्ण समय हमें एक अवसर भी देते हैं जिसका हमें लाभ उठाना चाहिए। वैश्विक सुरक्षा कारणों, सीमा विवादों और समुद्री प्रभुत्व के कारण दुनियाभर के देश अपनी सैन्य शक्ति के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण की दिशा में कार्य कर रहे हैं।