
चेन्नई में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के विधानसभा बयान के विरोध में डीएमके का प्रदर्शन। (फोटो सोर्स-IANS)
Tamil Nadu Politics:तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के विधानसभा भाषण को लेकर विवाद बढ़ गया है। उनके बयान के विरोध में डीएमके नेताओं ने चेन्नई के सैदापेट इलाके में प्रदर्शन किया। पार्टी का आरोप है कि विजय ने विधानसभा में डीएमके को लेकर अपनी बात तो रखी, लेकिन विपक्ष के नेता को जवाब देने का पूरा मौका नहीं दिया गया।
प्रदर्शन में डीएमके के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी के डिप्टी जनरल सेक्रेटरी ए. राजा भी यहां मौजूद रहे। नेताओं ने मुख्यमंत्री के बयान पर नाराजगी जताई और उनके खिलाफ नारे लगाए।
डीएमके नेताओं का कहना है कि विधानसभा में सरकार और विपक्ष दोनों को अपनी बात रखने का बराबर मौका मिलना चाहिए। अगर मुख्यमंत्री विपक्ष को लेकर कोई बात कहते हैं तो विपक्ष को भी उसका जवाब देने का अवसर मिलना जरूरी है।
डीएमके विधायक पीके शेखर बाबू ने भी इसी मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में डीएमके को निशाना बनाकर बात की, लेकिन विपक्ष के नेता को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया।
पार्टी का कहना है कि मामला सिर्फ एक भाषण तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि विधानसभा में विपक्ष को अपनी बात रखने का कितना मौका दिया जा रहा है।
विधानसभा में उठे इस विवाद के बाद डीएमके नेताओं ने सैदापेट में प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ नारे लगाए और उनके भाषण पर आपत्ति जताई।
ए. राजा जैसे वरिष्ठ नेता की मौजूदगी से प्रदर्शन को राजनीतिक तौर पर भी काफी अहम माना जा रहा है। डीएमके ने इस प्रदर्शन के जरिए यह बताने की कोशिश की कि वह मुख्यमंत्री के बयान को चुपचाप स्वीकार करने वाली नहीं है।
टीवीके के राजनीति में आने के बाद विजय और डीएमके के बीच सियासी मुकाबला लगातार चर्चा में रहा है। विजय की लोकप्रियता और उनकी पार्टी की सक्रियता ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नया समीकरण बनाया है।
ऐसे में विधानसभा में मुख्यमंत्री का बयान और उसके बाद डीएमके का सड़क पर उतरना महज एक प्रदर्शन नहीं माना जा रहा। इसे दोनों पक्षों के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान के तौर पर भी देखा जा रहा है।
फिलहाल विवाद विजय के विधानसभा भाषण को लेकर है। डीएमके का कहना है कि विपक्ष को सदन में अपनी बात रखने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। अब देखना यह है कि इस विरोध के बाद मुख्यमंत्री या टीवीके की ओर से क्या जवाब आता है। एक बात तो साफ है कि विधानसभा में शुरू हुई यह बहस अब चेन्नई की सड़कों तक पहुंच चुकी है।
Updated on:
12 Sept 2026 01:00 pm
Published on:
12 Sept 2026 01:00 pm
