गांव-गांव जाकर एचआइवी के बारे में जागरूक कर रहे हैं और किस तरह एचआइवी फैलता है उसके बारे में जानकारी दे रहे हैं।
जिले में नशे के आदी और एचआइवी संक्रमित लोगों के लिए शहर के युवाओं की टीम सहारा बनकर उभर रही है। वे गांव-गांव जाकर एचआइवी के बारे में जागरूक कर रहे हैं और किस तरह एचआइवी फैलता है उसके बारे में जानकारी दे रहे हैं। वहीं ऐसे लोग जो एचआइवी पॉजीटिव हैं उनकी जांच और दवा आदि का भी प्रबंध, शासकीय स्वास्थ्य सुविधा भी मुहैया करा रहे हैं।
शहर के योगेश साहू और उनकी टीम मिलकर जिले भर में जाकर लोगों को नशे और एचआइवी के बारे में जागरूक कर रहे हैं। योगेश ने बताया कि जिले भर में एचआइवी के लक्षण वाले लोगों की संख्या तीन सौ है। इन्हें हम लोग अपनी भाषा में आइडी यूजर कहते हैं। ये ऐसे लोग हैं जो इंजेक्शन के माध्यम से नशे का सेवन करते थे और संक्रमित सुई के माध्यम से एचआइवी के लक्षण वाली श्रेणी में आ गए। इन लोगों को हमारी टीम सबसे पहले तो नशा छुड़वाने में मदद कर रही है। उसके बाद जिला अस्पताल छतरपुर और बीएमसी सागर में परीक्षण कराने ले जाती है। साथ ही हर तीन माह में इनका चैकअप करवाते हैं। इनमें से 160 लोगों को नशे से मुक्त कर दिया गया है।
ओएसटी छतरपुर में ड्रग एडिक्ट लोगों को उनकी ड्रग लेने की क्षमता के आधार पर दवाई दी जाती है। यह दवा पीसकर मुंह में दी जाती है। वहीं कुछ आइडी यूजर ऐेसे भी हैं जिन्हें इंजेक्ट रूप में ड्रग देते हैं तो उन्हें किस प्रकार इंजेक्शन का उपयोग करना चाहिए इसकी जानकारी और प्रैक्टिस कराते हैं।
योगेश का कहना है कि जिले में 140 लोग एचआरजी (हाई रिस्क ग्रुप) वाले हैं जो एचआइवी ग्रसित हैं उन्हें दवा देते हैं और उनकी मॉनिटिरिंग भी कर रहे हैं। इन लोगों को अभी ओएसटी आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कुछ लोगों में स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक बदलाव भी देखे गए हैं। इन्हें समझाइश दी जा रही है कि किन कारणों से इन्हें एचआइवी फैलाने से रोका जाए। कई बार एचआरजी ग्रुप के लोग नशे की हालत में असुरक्षित यौन संबंध बना लेते हैं तो ऐसे लोगों को सबसे पहले आइडी यूजर में लाया जा रहा है उसके बाद इन्हें ड्रग फ्री कराया जाएगा।