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महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बड़ा फर्जीवाड़ा: भाई की जगह बीएड की परीक्षा दे रहा मुन्नाभाई दबोचा, पहले भी दे चुका था 3 पेपर; गोपनीयता और प्रवेश व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

चौंकाने वाली बात यह है कि यह शातिर युवक विश्वविद्यालय प्रशासन और उडऩदस्ते की आंखों में धूल झोंककर इससे पहले तीन अन्य महत्वपूर्ण पेपर भी दे चुका था। गुरुवार को जब वह चौथे पेपर में शामिल होने पहुंचा, तब जाकर उसकी चालाकी पकड़ी गई।

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महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय

छतरपुर. महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (एमसीबीयू) में चल रही बीएड और अन्य वार्षिक परीक्षाओं के बीच गुरुवार को एक सनसनीखेज फर्जीवाड़ा सामने आया है। परीक्षा की शुचिता को ताक पर रखकर अपने सगे भाई की जगह बीएड की परीक्षा दे रहे एक फर्जी परीक्षार्थी (मुन्नाभाई) को परीक्षा प्रबंधन ने रंगे हाथों दबोचा है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह शातिर युवक विश्वविद्यालय प्रशासन और उडऩदस्ते की आंखों में धूल झोंककर इससे पहले तीन अन्य महत्वपूर्ण पेपर भी दे चुका था। गुरुवार को जब वह चौथे पेपर में शामिल होने पहुंचा, तब जाकर उसकी चालाकी पकड़ी गई। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय की सुरक्षा और जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बालों के स्टाइल और एडमिट कार्ड की फोटो से खुला राज

मिली जानकारी के अनुसार, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में इन दिनों बीएड द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। गुरुवार को बीएसफ में तैनात देवेन्द्र यादव रोल नंबर 25109251 की आलेख भवन पीजी-2 कक्ष में द्वितीय पाली में परीक्षा थी। लेकिन परीक्षा के दौरान देवेन्द्र का भाई नव जीवन ज्योति कॉलेज का छात्र दीपक यादव परीक्षा हॉल में पेपर दे रहा था। वह अपने सगे भाई की जगह परीक्षा में बैठा था।

परीक्षा हॉल में ड्यूटी कर रहे जेआरएफ कल्याण सत्यकामी जब परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) की जांच कर रहे थे, तभी उन्हें दीपक के हाव-भाव और उसकी फोटो पर शक हुआ। प्रवेश पत्र में लगी छात्र की फोटो में बाल काफी छोटे थे, जबकि परीक्षा दे रहे दीपक यादव के बाल काफी बड़े थे। फोटो का चेहरे से सही मिलान न होने पर कल्याण सत्यकामी ने तुरंत इसकी सूचना द्वितीय पाली की परीक्षा अधीक्षक गायत्री वाजपेयी को दी।

कड़ाई से पूछताछ में कबूला जुर्म: दे चुका था 3 पेपर

पाली अधीक्षक गायत्री वाजपेयी ने जब युवक को परीक्षा हॉल से बाहर लाकर कड़ाई से पूछताछ की और दस्तावेजों की गहनता से जांच की, तो युवक के पैर उखड़ गए। युवक ने सच उगलते हुए स्वीकार किया कि उसका नाम दीपक यादव है और वह अपने भाई के स्थान पर परीक्षा दे रहा था। आरोपी मुन्नाभाई ने यह भी कबूल किया कि वह परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए इससे पहले के तीन पेपर भी इसी तरह दे चुका है और यह उसका चौथा पेपर था। परीक्षा अधीक्षक ने तुरंत इस फर्जीवाड़े की सूचना विश्वविद्यालय प्रबंधन और पुलिस को दी। गायत्री वाजपेयी ने पत्रिका से फोन पर इस बात की पुष्टि की, भाई की जगह परीक्षा देता परीक्षार्थी पकड़ा गया। लेकिन जब पत्रिका ने असली परीक्षार्थी का नाम जानना चाहा उन्होंने उत्तरपुस्तिका का बंडल बांधने में व्यस्तता का हवावा दिया और कहा कि मुझे परीक्षार्थी का नाम याद नहीं पर पकड़ा गया है।

पत्रिका की खबर पर लगी मुहर: दांव पर परीक्षा की गोपनीयता

विश्वविद्यालय में परीक्षाओं के लचर संचालन और अव्यवस्थाओं को लेकर पत्रिका समाचार पत्र द्वारा पहले ही प्रमुखता से खबर प्रकाशित की जा चुकी थी। इस मुन्नाभाई के पकड़े जाने से पत्रिका की खबर पर पूरी तरह मुहर लग गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन पर परीक्षा की गोपनीयता और शुचिता से समझौता करने के संगीन आरोप लग रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, जिन नियमित विश्वविद्यालय कर्मचारियों और पूर्व में रोके गए अनुभवी सहायक प्राध्यापकों को परीक्षा के मुख्य व संवेदनशील कार्यों में लगाया जाना चाहिए था, उन्हें सोची-समझी रणनीति के तहत इस महत्वपूर्ण ड्यूटी से दूर रखा जा रहा है। इसके विपरीत, कई ऐसे बाहरी, अप्रशिक्षित और चहेते लोगों से परीक्षा से जुड़े बेहद गोपनीय कार्य कराए जा रहे हैं, जो इसके लिए तय आवश्यक न्यूनतम योग्यता तक पूरी नहीं करते हैं। अपात्र लोगों के हाथों में परीक्षा की कमान होने से पूरी परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता अब गहरे संदेह के घेरे में आ गई है।

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