21 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

छतरपुर के ग्रामीण इलाकों में गहराया भीषण जलसंकट: नल-जल योजनाएं बनीं शो-पीस, सूखे हैंडपंपों के कारण 2 किमी दूर से पानी ढोने को मजबूर हुए ग्रामीण

गांवों में पानी की टंकियां और पाइपलाइनें तो बिछा दी गई हैं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है।

3 min read
Google source verification
water crisis

जलसंकट

भीषण गर्मी की शुरुआत होते ही छतरपुर जनपद के ग्रामीण अंचलों में पानी के लिए हाहाकार मच गया है। सरकार द्वारा हर घर जल पहुंचाने का दावा करने वाला जल जीवन मिशन धरातल पर पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रहा है। गांवों में पानी की टंकियां और पाइपलाइनें तो बिछा दी गई हैं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि लाखों-करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी ये योजनाएं सिर्फ शो-पीस बनकर रह गई हैं। भूजल स्तर लगातार नीचे गिरने से गांवों के पारंपरिक कुएं और हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे ग्रामीणों को भीषण गर्मी में दो-दो किलोमीटर दूर से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

छतरपुर जनपद के अंतर्गत आने वाले ढड़ारी, देरी, धौरी, खडग़ांय, बूदौर, राधनगर, कतरवारा, पिपौरा खुर्द, परा और उदयनपुरा सहित दर्जनों गांवों में पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है। कुओं का जलस्तर रसातल में जा चुका है और सरकारी हैंडपंप सिर्फ हवा उगल रहे हैं।

ढड़ारी पंचायत- एक महीने से बंद पड़े हैंडपंप, 2000 महीना फूंक कर टैंकर मंगाने को मजबूर ग्रामीण

ढड़ारी पंचायत के तिवारी मोहल्ले की स्थिति बेहद दयनीय है। यहाँ इस तपती गर्मी में एक भी चालू हैंडपंप नहीं है। स्थानीय लोगों को करीब 1 किलोमीटर दूर स्थित निजी कुओं से मिन्नतें करके पानी लाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, बंसल मोहल्ले का मुख्य हैंडपंप पिछले एक महीने से पूरी तरह खराब पड़ा हुआ है। प्रशासनिक स्तर पर इसकी मरम्मत कराने की सुध लेने वाला कोई नहीं है। थक-हारकर यहाँ के कई परिवार हर महीने 1500 से 2000 तक खर्च करके निजी टैंकरों से पानी मंगवाने को मजबूर हैं, जिससे गरीब परिवारों के बजट पर भारी बोझ पड़ रहा है।

पिपौरा खुर्द-4 हजार की बड़ी आबादी और पानी के स्रोत सिर्फ दो हैंडपंप

रमुआ पंचायत के अंतर्गत आने वाले पिपौरा खुर्द गांव की दास्तां और भी हैरान करने वाली है। करीब 4 हजार की घनी आबादी वाले इस बड़े गांव में कहने को तो 23 हैंडपंप स्थापित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इनमें से 10 हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं। 6 हैंडपंप पूरी तरह से खराब होकर गायब हो चुके हैं, जबकि 7 हैंडपंपों से बेहद कम और गंदा पानी निकल रहा है। स्थिति यह है कि पूरी 4 हजार की आबादी पानी के लिए महज 2 चालू हैंडपंपों पर निर्भर है। पानी भरने के लिए सुबह से ही हैंडपंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं। कई ग्रामीण 2 किलोमीटर दूर से साइकिल पर और महिलाएं सिर पर बर्तन रखकर पानी ढोने को विवश हैं।

ललोनी पंचायत के दौंरिया गांव में एक भी चालू हैंडपंप नहीं, हरिजन बस्ती परेशान

यही हाल ललोनी पंचायत के दौंरिया गांव का है, जहां जलसंकट चरम पर पहुंच चुका है। पूरे गांव में इस समय एक भी चालू हैंडपंप नहीं बचा है। सबसे ज्यादा मार हरिजन बस्ती के लोगों पर पड़ रही है। इस बस्ती के करीब 500 लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। महिलाएं और बच्चे 2 से 3 किलोमीटर दूर खेतों में स्थित निजी कुओं से पानी लाने को मजबूर हैं।

कतरवारा में भ्रष्टाचार और दबंगई की हद- पाइपलाइन चोरी, बोरवेल पर किसान का कब्जा

जल जीवन मिशन की नाकामी के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक लाचारी भी खुलकर सामने आ रही है। कतरवारा गांव में नल-जल योजना के तहत अस्थायी रूप से डाली गई लोहे की महंगी पाइपलाइन ही चोरी हो गई। हद तो तब हो गई जब गांव के ही एक रसूखदार किसान ने सरकारी बोरवेल पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। इस दबंगई के कारण मोहल्ले के आम लोगों को पानी मिलना पूरी तरह बंद हो गया है और पूरा इलाका भारी परेशानी झेल रहा है। इस संबंध में ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

जिम्मेदार का बयान

जलसंकट से जूझ रहे गांवों में जल्द ही पानी की वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाएगी। जिन गांवों में हैंडपंप खराब हैं, वहां तत्काल मैकेनिक भेजकर मरम्मत का काम शुरू कराया जाएगा। संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर समस्या का स्थाई समाधान निकाला जाएगा।

अजय सिंह, सीईओ, जनपद पंचायत, छतरपुर

बड़ी खबरें

View All

छतरपुर

मध्य प्रदेश न्यूज़

ट्रेंडिंग