छतरपुर

बराना नदी आंदोलन पर प्रशासनिक एक्शन: 17 दिन बाद हटाए गए प्रदर्शनकारी

आंदोलन में शामिल पन्ना जिले के 176 प्रदर्शनकारियों को 3 बसों के माध्यम से उनके गृह ग्रामों के लिए रवाना कर दिया गया है।
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Jul 20, 2026
administration action
प्रशासनिक कार्रवाई

केन-बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापन और मुआवजे की मांगों को लेकर ग्राम कुपी में बराना नदी के किनारे बीते 17 दिनों से चल रहा धरना-प्रदर्शन रविवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो गया। प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पुलिस के सहयोग आंदोलन स्थल को खाली करा दिया है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर को स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण पुलिस अभिरक्षा में बिजावर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया है, जहां डॉक्टरों की देखरेख में रखा गया है। वहीं, आंदोलन में शामिल पन्ना जिले के 176 प्रदर्शनकारियों को 3 बसों के माध्यम से उनके गृह ग्रामों के लिए रवाना कर दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई पर प्रशासन इसे नागरिक सुरक्षा के तहत उठाया गया कदम बता रहा है, जबकि आंदोलनकारियों के नेताओं ने इसे जनता की आवाज को दबाने की कोशिश करार दिया है।

प्रशासन का पक्ष: भारी बारिश में डूब का खतरा था, मुख्य मांग पहले ही मंजूर

छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल और बिजावर एसडीएम विजय द्विवेदी ने प्रशासनिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यह कार्रवाई किसी आंदोलन को दबाने के लिए नहीं, बल्कि पूरी तरह मानवीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई है:

सुरक्षा और जलभराव का तर्क: प्रशासन के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में लगातार भारी बारिश हो रही है, जिससे बराना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया था। बिना किसी लिखित सूचना या प्रशासनिक अनुमति के नदी के ठीक समीप जलभराव क्षेत्र में बैठे लोगों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। मौसम की खराबी को देखते हुए उन्हें सुरक्षित हटाना जरूरी था।

कैबिनेट से मंजूर हो चुका है मुआवजा: कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग विस्थापन पैकेज को 5 लाख रुपए से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपए करने की थी। इस मांग को मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट पहले ही मंजूरी दे चुकी है और इसकी जानकारी आंदोलनकारियों को बार-बार दी गई थी।

घोटाले के आरोपों पर साक्ष्य नहीं: आंदोलनकारियों द्वारा लगाए गए करोड़ों रुपए के कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर प्रशासन ने साफ किया कि अब तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत या सबूत पेश नहीं किए गए हैं। यदि कोई प्रामाणिक शिकायत आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच की जाएगी।

प्रदर्शनकारियों का रुख: मांगों की अनदेखी हुई, जान जाने तक अनशन रहेगा जारी

दूसरी तरफ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिजावरl ले जाए गए आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर और उनके सहयोगियों ने प्रशासन के दावों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे दमनकारी कार्रवाई बताया है:

बर्बरतापूर्वक हटाने का आरोप: भटनागर का आरोप है कि प्रशासन ने विस्थापितों की समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने के बजाय आंदोलन स्थल पर बने टेंट, फेंसिंग और प्रतीकात्मक सूली को बलपूर्वक तहस-नहस कर दिया। स्थिति यह बनी कि महिलाओं और बच्चों को उफनती नदी पार करनी पड़ी।अस्पताल में भी सत्याग्रह: अमित भटनागर ने अस्पताल में किसी भी प्रकार का भोजन करने या चिकित्सा प्रक्रिया (ड्रिप) लेने से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि चाहे उन्हें जेल में डाला जाए या अस्पताल में, मांगों को लेकर उनका आमरण अनशन जान जाने तक जारी रहेगा।

भ्रष्टाचार के नए आरोप: विस्थापन के मुद्दे के साथ ही आंदोलनकारियों ने पन्ना टाइगर रिजर्व और वन विभाग की कीमती लकड़ियों के अवैध परिवहन और केन-बेतवा परियोजना से जुड़े अन्य कथित घोटालों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

176 आंदोलनकारी बसों से पन्ना ले जाए गए

ताजा अपडेट के अनुसार, आंदोलन स्थल पर मौजूद अधिकांश लोग पड़ोसी जिले पन्ना के निवासी थे। प्रशासन ने मौसम की स्थिति और उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कुल 176 प्रदर्शनकारियों को चिन्हित किया और उन्हें बसों के माध्यम से सकुशल उनके गृह ग्रामों के लिए विदा कर दिया गया है। फिलहाल, आंदोलन स्थल पर सुरक्षा के लिहाज से पुलिस बल तैनात है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

Updated on:
20 Jul 2026 11:59 am
Published on:
20 Jul 2026 11:59 am
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