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Chhatarpur Honor Killing: बात इतनी बिगड़ गई थी कि पिता ने टुकड़े-टुकड़े कर दिए, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने किया अंधे कत्ल का खुलासा

Chhatarpur Honor Killing: छतरपुर में सनसनीखेज अंधे कत्ल के खुलासे ने हर किसी को चौंका दिया है। बेटी के प्रेम प्रसंग से नाखुश पिता ने उसके प्रेमी को खेत पर बुलाया और कुल्हाड़ी से टुकड़े-टुकड़े कर शव को रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया। जानिए कैसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने किया अंधे कत्ल का खुलासा।
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Chhatarpur Honor Killing

Chhatarpur Honor Killing छतरपुर ऑनर किलिंग का खुलासा (source: patrika)

Chhatarpur Honor Killing:छतरपुर जिले से सामने आए सनसनीखेज रैकवार हत्याकांड में एक नया मोड़ सामने आया है। पुलिस जांच में साफ हुआ है कि यह वारदात पूर्व नियोजित हत्या से ज्यादा, आवेश और गुस्से का नतीजा थी। एक ही जाति के होने के बावजूद, लड़की का पिता इस प्रेम प्रसंग के सख्त खिलाफ था और उसे लड़का पसंद नहीं था। जब उसे पता चला कि दोनों शादी करना चाहते हैं, तो उसने लड़के को सिर्फ धमकाने और समझाने के लिए खेत पर बुलाया था। लेकिन वहां दोनों के बीच बात इतनी बिगड़ गई कि पिता ने तैश में आकर कुल्हाड़ी से युवक पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। इस वारदात को छिपाने के लिए बाद में शव के टुकड़े कर रेलवे ट्रैक पर फेंके गए। मातगुवां थाना पुलिस ने इस अंधे कत्ल का पर्दाफाश करते हुए आरोपी पिता और उसके नाबालिग पुत्र को गिरफ्तार कर लिया है।

क्षत-विक्षत हालत में मिला था शव

बीते 27 जून 2026 को मातगुवां थाना पुलिस को पटरियों पर एक संदिग्ध बोरा और क्षत-विक्षत शव मिलने की सूचना मिली थी। चूंकि बोरे के ऊपर से कई बार ट्रेनें गुजर चुकी थीं, इसलिए शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुका था। जांच के बाद मृतक की शिनाख्त ग्राम महेवा निवासी रामजी रैकवार के रूप में हुई, जिसकी गुमशुदगी पहले से ही ओरछा रोड थाने में दर्ज थी।

आरोपी गिरफ्तार, हथियार के साथ बाइक बरामद

मातगुवां पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी पिता मूलचंद और उसके नाबालिग पुत्र को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी, बाइक और मृतक का मोबाइल फोन बरामद कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों के खिलाफ हत्या व साक्ष्य मिटाने की धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई कर रही है।

कैसे बिगड़ी बात और कैसे हुई वारदात?

यह वारदात जिले के ओरछा रोड थाना क्षेत्र महेबा गांव की है। पुलिस की कड़ाई से की गई पूछताछ में आरोपियों ने घटना की जो सच्चाई बताई।

प्रेम प्रसंग और पिता की नापसंदगी: ग्राम महेवा निवासी मूलचंद रैकवार की 21 वर्षीय बेटी का गांव के ही रामजी रैकवार (मृतक) से पिछले पांच वर्षों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों एक ही जाति के थे और आगे चलकर विवाह करना चाहते थे। लेकिन लड़की का पिता मूलचंद इस रिश्ते के सख्त खिलाफ था, क्योंकि उसे रामजी बिल्कुल पसंद नहीं था।

धमकाने के लिए बुलाया था खेत पर: जब मूलचंद को यह भनक लगी कि दोनों हर हाल में शादी करने की जिद पर अड़े हैं, तो उसने 26- 27 जून की दरमियानी रात को रामजी को डराने-धमकाने और इस रिश्ते से पीछे हटने की चेतावनी देने के लिए अपने खेत पर बुलाया।

बात बिगडऩे पर तैश में मारी कुल्हाड़ी: खेत पर बातचीत के दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस शुरू हो गई। रामजी जब पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ, तो मूलचंद का आपा खो गया। गुस्से और तैश में आकर मूलचंद ने पास ही रखी कुल्हाड़ी उठा ली और रामजी पर जानलेवा हमला कर दिया। वार इतने घातक थे कि रामजी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस दौरान मूलचंद का नाबालिग बेटा भी मौजूद था।

साक्ष्य मिटाने रची ट्रेन हादसे की साजिश

तैश में आकर हत्या करने के बाद आरोपी पिता-पुत्र बुरी तरह घबरा गए। कानून के शिकंजे से बचने के लिए उन्होंने आनन-आन में शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई:

झाडिय़ों में छिपाया शव: खून से लथपथ शव को आरोपियों ने पहले खेत के पास ही झाडिय़ों में छिपा दिया ताकि कोई देख न सके।

बोरे में भरकर ट्रैक पर फेंका: अगले दिन रात का अंधेरा होते ही दोनों ने शव के टुकड़े किए, उसे एक बोरे में बंद किया और अपनी बाइक पर महाराजा छत्रसाल रेलवे स्टेशन और ईशानगर रेलवे स्टेशन के बीच पिपौरा कलां गांव के पास स्थित रेलवे ट्रैक पर ले गए। वहां उन्होंने बोरे को पटरियों के बीच फेंक दिया, ताकि ऊपर से ट्रेन गुजरने के बाद यह पूरा मामला एक आम ट्रेन हादसा या आत्महत्या का प्रतीत हो।

कैसे हुआ इस अंधे कत्ल का खुलासा?

शुरुआत में ट्रेन हादसा नजर आ रहे इस मामले को मातगुवां थाना प्रभारी अंकुर चौबे और टीम ने संदिग्ध माना। फॉरेंसिक जांच व पीएम रिपोर्ट से साफ हो गया कि ट्रेन से कटने से पहले ही युवक पर धारदार हथियार (कुल्हाड़ी) से हमला हुआ था। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान का सहारा लिया:

सीडीआर और लोकेशन: मृतक रामजी के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि लापता होने वाले दिन उसकी आखिरी बातचीत मूलचंद से हुई थी। तकनीकी लोकेशन भी मूलचंद के खेत के पास पाई गई।

जुर्म कबूला: संदेह के आधार पर जब पुलिस ने मूलचंद और उसके नाबालिग बेटे को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने पूरी कहानी बयां कर दी कि कैसे धमकाने के दौरान बात बिगड़ी और तैश में आकर उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया।

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