छतरपुर

छतरपुर की महिलाओं का वेस्ट टू वेल्थ मंत्र, पुराने कपड़ों से सिल रहीं पर्यावरण की सुरक्षा, 17 महिलाओं ने छेड़ी पॉलीथिन मुक्त शहर की मुहिम

ये महिलाएं स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर स्टॉल लगाकर लोगों को जागरूक करती हैं कि कैसे एक छोटा सा कपड़े का थैला हजारों प्लास्टिक की थैलियों का विकल्प बन सकता है।

2 min read
Apr 27, 2026
महिलाओं का समूह

जब इरादे नेक हों और हाथों में हुनर, तो समाज में बदलाव लाना मुश्किल नहीं होता। छतरपुर शहर की कुछ प्रेरणादायी महिलाओं ने इसे सच कर दिखाया है। संगम सेवालय संस्था से जुड़ी ये महिलाएं न केवल घर के पुराने और बेकार कपड़ों को नया जीवन दे रही हैं, बल्कि पर्यावरण के सबसे बड़े दुश्मन प्लास्टिक के खिलाफ एक मौन क्रांति का नेतृत्व भी कर रही हैं।

पॉलीथिन के खिलाफ सिलाई मशीन की गूंज

शहर को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए इन महिलाओं ने कपड़े के थैले बनाना शुरू किया है। संस्था की संचालिका अंजू अवस्थी के नेतृत्व में वर्तमान में 17 महिलाएं इस अभियान का हिस्सा हैं। ये महिलाएं स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर स्टॉल लगाकर लोगों को जागरूक करती हैं कि कैसे एक छोटा सा कपड़े का थैला हजारों प्लास्टिक की थैलियों का विकल्प बन सकता है।

हुनर से बढ़ रही आत्मनिर्भरता की ओर कदम

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संस्था ने 10 सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई हैं। चौबे कॉलोनी स्थित एक निजी स्कूल में इन्हें बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं अपने घर के कामकाज के साथ-साथ प्रतिदिन 10 से 12 थैले तैयार कर रही हैं। इससे न केवल शहर को थैले मिल रहे हैं, बल्कि इन महिलाओं को अपने परिवार की आर्थिक मदद करने का एक मजबूत जरिया भी मिला है।

सिर्फ थैले नहीं, आस्था की पोशाकें भी हो रहीं तैयार

इन महिलाओं का हुनर सिर्फ थैलों तक सीमित नहीं है। ये महिलाएं भगवान की सुंदर पोशाकें भी तैयार कर रही हैं, जिनकी मांग स्थानीय मंदिरों और भक्तों के बीच काफी अधिक है। सिलाई के इस काम से होने वाली आय का एक हिस्सा समाज सेवा के कार्यों में भी खर्च किया जाता है। त्योहारों के समय जरूरतमंद बच्चों को कपड़े और उपहार बांटकर ये महिलाएं खुशियां बिखेर रही हैं।

आदिवासी क्षेत्रों तक पहुंच रही मदद

संस्था का कार्य केवल निर्माण तक सीमित नहीं है। ये महिलाएं शहर के संपन्न घरों से अनुपयोगी और पुराने कपड़े एकत्र करती हैं। इन कपड़ों की छंटनी कर इन्हें बिजावर क्षेत्र के दूरदराज के आदिवासी परिवारों तक पहुंचाया जाता है, ताकि कडकड़़ाती ठंड या गर्मी व बारिश के मौसम में वे कपड़े किसी जरूरतमंद के काम आ सकें।

Published on:
27 Apr 2026 10:46 am
Also Read
View All
मध्यप्रदेश में ‘स्कूलों की छुट्टी’ को लेकर नया आदेश जारी, टीचर्स को राहत नहीं

चीन से व्यापार घटने और फिनिशिंग यूनिट्स के अभाव में छतरपुर का ग्रेनाइट उद्योग संकट में, 47 में से सिर्फ 4 खदानें चालू, कारोबार एक चौथाई ही बचा

केन-बेतवा लिंक परियोजना: मुआवजे को लेकर खजुराहो में बड़ी बैठक, विस्थापितों ने रखी 25 लाख रुपए और गांव के बदले गांव की मांग, प्रशासन ने दिया उच्च स्तर पर प्रस्ताव भेजने का भरोसा

तपिश की चपेट में बुंदेलखंड: खजुराहो में पारा 44.6 डिग्री के पार, नौगांव भी भट्टी की तरह तपा, 29 अप्रेल तक बादलों की आवाजाही से मिल सकती है मामूली राहत

पत्रिका इम्पैक्ट: आगजनी की घटनाओं के बाद जागा प्रशासन, खेतों में नरवाई जलाने वाले 18 किसानों पर एफआईआर दर्ज