छतरपुर

182 साल पुरानी स्मार्ट सिटी नौगांव के खंडहर हो रहे ऐतिहासिक भवन

नौगांव देश का पहला स्मार्ट सिटी था जिसे अंग्रेजों ने बसाया, लेकिन नौगांव का आजादी के बाद तेजी से विकास नहीं हुआ जिससे यह शहर सिमटकर रहा गया।

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Jul 03, 2024
ब्रिटिशकालीन पॉलीटिकल एजेंट ऑफिस

देश के पहले स्मार्ट सिटी से चलती थी 36 रियासतें, अब तहसील तक सिमटा

छतरपुर/ नौगांव. ब्रिटिश शासन ने बुंदेलखंड क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए नौगांव को पॉलिटिकल एजेंट कार्यालय के लिए चुना गया। नौगांव देश का पहला स्मार्ट सिटी था जिसे अंग्रेजों ने बसाया, लेकिन नौगांव का आजादी के बाद तेजी से विकास नहीं हुआ जिससे यह शहर सिमटकर रहा गया। जबकि शहर ब्रिटिश शासनकाल के समय में विध्य क्षेत्र की राजधानी थी।
1841 में बनाई गई छावनी

अंग्रेजो ने वर्ष 1841 में जैतपुर के महाराज पारीक्षित को हराने के लिए छावनी बनाया गया। इसके बाद महाराज पारीक्षित को घेरने की रणनीति तैयार कर 12 फनी तोप से कैथासदर की छावनी को ध्वस्त किया गया। तभी से नौगांव अंग्रेजों की छावनी बन गया। सैनिकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत के कोने कोने से व्यापारी बुलाए गए। ब्रिटिश सैनिकों की सुविधाओं के लिए ग्वाल, टेलर, कपड़ा व्यापारी, मोची सहित अन्य समाज के लोगों को यहां बसाया गया। इसलिए नौगांव को अब भी छावनी के नाम जाना जाता है। नौगांव एक सुंदर शहर बसाया गया था। जिसमें 192 चौराहे जो आपस में एक दूसरी सड़क को मिलाते हैं। नौगांव को एक समय मिनी चंडीगड़ के नाम से भी जाना जाता था।
36 रियासतों का हुआ था विलय
15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ इसके बाद छोटी छोटी रियासतों को विलय करने के लिए भारत सरकार के तात्कालीन गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के नेतत्व में लगभग 600 रियासतों का विलय करवाया गया। इसी तारतम्य में गृह मंत्री के निज सचिव ने नौगांव और 36 रियासतों के राजाओं से पन्ना हॉउस बंगला नंबर 51 में बैठक कर सभी राजाओं से प्रण पत्र पर हस्ताक्षर करवाए । 1947 से अप्रेल 1948 तक नौगांव विंध्यप्रदेश की राजधानी रहा, जिसके मुख्यमंत्री कामता प्रसाद सक्सेना रहे। राजधानी के समय विधानसभा एवं सचिवालय प्राइमरी स्कूल में हुआ करता था। अप्रेल 1948 से 01 नवम्बर 1956 तक नौगांव कमिश्नरी रहा। उस समय मध्यप्रदेश की स्थापना हुई और सन 1980 में जब लोकनिर्माण विभाग का इइ कार्यालय यंहा से जाने लगा तो तत्कालीन विधायक सहित लोगों ने इइ कार्यालय वापस लाने के लिए आंदोलन भी किया। लेकिन फिर भी धीरे-धीरे बड़े कार्यालय जैसे कमिशनरी,मलेरिया ऑफिस,मत्स्य विभाग ट्रेनिग सेंटर,सेलटेक्स ऑफिस,लोकनिर्माण विभाग इ इ ऑफिस ट्रेजरी,टीबी अस्पताल का मुख्यालय,डाकघर का प्रधान कार्यालय जैसे आनेक विभाग चले गए। 1995 के आसपास नौगांव को तहसील का दर्जा प्राप्त हुआ तब से लेकर आज तक लगातार नौगांव विकास की मुख्य धारा से जुडऩे की राह देख रहा है। इसके अलावा नगर के बंगले और यंहा से जा चुके विभागों की बिल्डिंगे जर्जर स्थिति में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
खंडहर हो रहे ऐतिहासिक भवन
नौगांव के इतिहासकार दिनेश सेन ने बताया कि नौगांव में अंग्रेजों के शासन के समय नगर को एक स्मार्ट सिटी के रूप में जाना जाता था। नगर की अनमोल धरोहरें जो राजनीतिक व प्रशासन के उदासीनता के चलते धूमिल हो रहीं हैं। नगर का प्रथम भवन जिसमें कुछ समय पहले मलेरिया ऑफिस हुआ करता था जो सन 1861 में नगर का प्रथम भवन के रूप में जाना जाता था। अंग्रेजी हुकूमत के बाद जैसे ही देश आजाद हुआ उस भवन पर पहला तिरंगा झंडा फहराया गया था। आज वह भवन अपनी दुर्दशा पर आशु बहा रहा है। इंग्लिश चर्च जिसकी स्थापना 1889 में की गई जिसका इतिहास अपने आप में एक अलग देश में बनी चर्चों में नगर में बनी चर्च अपने आप में एक अलग है जिसका सही ढंग से संरक्षण न हो पाने से दिन प्रतिदिन भवन की हालत जीर्णशीर्ण होती जा रही है इसके अलावा नगर की बात करें तो पॉलिटेक्निक कालेज के अंदर काल कोठरी व कारावास के साथ-साथ परिसर में ही स्थित बाबड़ी, साथ ही यही पर जिम्नेसियम के अलावा नगर में दो दर्जन से अधिक जगहें हैं, जिनको अगर संरक्षित किया जाए, तो नगर का इतिहास आने वाली पीढिय़ों के साथ-साथ देश विदेशों में नगर को अलग पहचान मिलेगी। इन सबको संरक्षित करने के लिए नगर के लोगों ने प्रशासन से ऐसी उम्मीद की है कि इन धरोहरों को संरक्षण कर नगर की पहचान को बढ़ाया जाएगा।
रियासत कालीन प्रमुख इमारतों का अब क्या उपयोग
रियासत कालीन समय का गवर्मेंट प्रेस कार्यालय में वर्तमान में बालिका हरिजन छात्रावास संचालित किया जा रहा है। सचिवालय में प्राइमरी स्कूल, सर्जन ऑफिस वर्तमान में टीबी अस्पताल बन चुका है। वहीं उस समय का सिंचाई विभाग मुख्यालय व चीफ कंजर्वेटर फॉरेस्ट का भवन वर्तमान में सिविल अस्पताल बन चुका है। हाईकोर्ट भवन वर्तमान में अदालत भवन, आरटीओ कार्यालय भवन वर्तमान में सेलटैक्स ऑफिस, डीआईजी निवास का भवन अब केनाल कोठी हो गई। वहीं सेकेट्री आवास वर्तमान में यातायात चौकी हो चुकी है, शिक्षा विभाग का भवन वर्तमान में ग्राम विकास सहकारी समिति, वहीं 1969 में बनाई गयी पुरानी आर्मी चर्च आज भी है। यह आर्मी के अंडर में है। रेस्ट हाउस, पोलिटिकल एजेंट का बंगला, क्लब भवन, पॉलिटेक्निक कॉलेज भी है। वहीं बंदीगृह (पुरानी जेल) में अभी भी कालकोठरी व कैदियों की बेरिंग के नमूने मिलते हैं। नगर की धूप घड़ी जीटीसी स्कूल के प्रांगण में इतिहास बयां कर रही है।

Published on:
03 Jul 2024 04:56 pm
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