छतरपुर

9वीं व 11वीं की किताबों का टोटा, एआई विषय तो जोड़ा पर सिलेबस गायब; निजी प्रकाशकों की चांदी, अभिभावकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत चरणबद्ध तरीके से लागू किए जा रहे नए पाठ्यक्रम के कारण एनसीईआरटी की नई पुस्तकों की छपाई और आपूर्ति में भारी देरी हुई है।
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Jul 04, 2026
book dipo
बुक डिपो

छतरपुर. नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जिले के हजारों छात्रों के हाथों में अब तक मुख्य पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत चरणबद्ध तरीके से लागू किए जा रहे नए पाठ्यक्रम के कारण एनसीईआरटी की नई पुस्तकों की छपाई और आपूर्ति में भारी देरी हुई है। इस लेटलतीफी का सीधा असर कक्षा 9वीं और 11वीं के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बाजार से मुख्य किताबें गायब होने के कारण निजी स्कूलों को मनमानी करने का पूरा मौका मिल गया है, जिससे अभिभावकों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है।

9वीं में सामाजिक विज्ञान और 11वीं में संकाय के सेट गायब

स्थानीय बुक डिपो की पड़ताल करने पर चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। कक्षा 9वीं में सामाजिक विज्ञान की किताबें पूरी तरह नदारद हैं, वहीं 11वीं के अलग-अलग विषयों (कॉमर्स, साइंस, आर्ट्स) के पूरे सेट बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि स्कूलों द्वारा एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की रेफरेंस बुक्स को ज्यादा तवज्जो दी जा रही है, जिसके कारण वे भी मांग के अनुरूप ही स्टॉक मंगाते हैं। 9वीं में गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसी मुख्य विधाओं के लिए छात्रों को महंगी रेफरेंस बुक्स खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

एमपी बोर्ड का एआई प्रयोग भी साबित हो रहा कागजी

एक तरफ जहां एनसीईआरटी की किल्लत है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) की स्थिति भी बेहतर नहीं है। बोर्ड ने इस सत्र से कक्षा 9वीं से 12वीं तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अनिवार्य विषय के रूप में शामिल करने की बड़ी घोषणा तो कर दी, लेकिन इसके लिए जरूरी किताबों की छपाई कराना भूल गया। नतीजतन, छात्र एआई शब्द से तो वाकिफ हो रहे हैं, लेकिन विषय की गहराई और तकनीकी बारीकियों को समझने के लिए उनके पास कोई प्रामाणिक सामग्री मौजूद नहीं है।

चैप्टर बदलने और लाइसेंस प्रक्रिया जटिल होने से बढ़ी किल्लत

इस वर्ष कक्षा 9वीं और 11वीं में अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, गणित और एग्रीकल्चर जैसे महत्वपूर्ण विषयों के अध्यायों में बड़े बदलाव (घटाने-बढ़ाने) किए गए हैं। इस वजह से छात्र पुरानी किताबों से भी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा, एनसीईआरटी की मूल पुस्तकें बेचने के लिए डीलरों के पास लाइसेंस होना अनिवार्य है, जिसकी प्रक्रिया बेहद जटिल है। बाजार में इसी कमी का फायदा उठाकर डुप्लीकेट किताबों की बिक्री और निजी प्रकाशकों का एकाधिकार बढ़ता जा रहा है। कइयों ने तो स्कूल परिसर के भीतर ही अवैध रूप से बुक स्टॉल खोल दिए हैं।

आंकड़ों की जुबानी: एनसीईआरटी बनाम रेफरेंस बुक्स का खेल

बाजार दरों के विश्लेषण से साफ है कि जहां एनसीईआरटी का पूरा सेट जितने रुपये में आता है, उतने में निजी प्रकाशक की महज एक या दो किताबें ही मिल पाती हैं।

कक्षा एनसीईआरटी सेट की कीमत (रुपए में) रेफरेंस बुक्स का कुल अनुमानित खर्च (रुपये में)

9वीं 700 से 800                         2,000 से 2,500

10वीं 800 से 1,000                         2,500 से 3,000

11वीं 900 से 1,200                         3,000 से 3,500

12वीं            900 से 1,200                         4,000 से अधिक

जिम्मेदारों का क्या है कहना?

नई पुस्तकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए उच्च स्तर पर और बोर्ड को तत्काल पत्राचार किया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों का सिलेबस न पिछड़े। इसके साथ ही सभी निजी व शासकीय स्कूलों को कड़े निर्देश दिए जाएंगे कि वे रेफरेंस बुक्स की जगह केवल एनसीईआरटी पैटर्न की प्रामाणिक किताबों को ही प्राथमिकता दें। हमारी कोशिश है कि शीघ्र ही सभी छात्रों तक पुस्तकें पहुंच जाएं।

कौशल सिंह, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी, छतरपुर

Published on:
04 Jul 2026 10:58 am
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