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महाराजपुर-गढ़ीमलहरा जलावर्धन योजना: अधिकारियों की सुस्ती से करोड़ों का प्रोजेक्ट ठप, इंटकवेल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर लगी रोक

47.70 करोड़ रुपए की लागत वाली महत्वाकांक्षी जलावर्धन योजना को तीन साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर उतारने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है।
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महाराजपुर -गढ़ीमलहरा जलावर्धन योजना

महाराजपुर नगरपालिका और गढ़ीमलहरा नगर परिषद के हजारों निवासियों के लिए शुद्ध पेयजल का सपना एक बार फिर अधिकारियों की घोर लापरवाही के चलते अधर में लटक गया है। 47.70 करोड़ रुपए की लागत वाली महत्वाकांक्षी जलावर्धन योजना को तीन साल बीत जाने के बाद भी धरातल पर उतारने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है। अब स्थिति यह है कि न केवल इंटकवेल का निर्माण ठप है, बल्कि उत्तर प्रदेश जल संसाधन विभाग द्वारा लगाई गई आपत्तियों के कारण वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण पर भी पूर्णत: रोक लग गई है।

42 हजार उपभोक्ताओं के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल

इस परियोजना का उद्देश्य महाराजपुर और गढ़ीमलहरा के 42 हजार नागरिकों को उनके घरों में नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था। योजना के तहत उर्मिल बांध पर इंटकवेल, बांध के निचले हिस्से में फिल्टर प्लांट और दोनों नगरों में पानी की टंकियां बनाई जानी थीं। 7 अक्टूबर 2023 को वर्क ऑर्डर जारी होने के बावजूद, आज तक निर्माण कार्यों की गति कछुआ चाल से भी धीमी रही है।

अनुमति की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही

परियोजना के पिछडऩे का सबसे बड़ा कारण निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की अदूरदर्शिता रही है। कार्य शुरू करने से पूर्व उत्तर प्रदेश जल संसाधन विभाग से अनिवार्य अनुमति प्राप्त करना आवश्यक था, जिसे समय रहते नहीं लिया गया। स्थिति तब और जटिल हो गई जब यूपी जल संसाधन विभाग ने बांध की संरचना को खतरे का हवाला देते हुए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण कार्य को रुकवा दिया। विभाग का मानना है कि प्रस्तावित निर्माण बांध की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, जिसके चलते निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।

प्राकृतिक बाधाएं और निर्माण की चुनौती

बांध में जलभराव की स्थिति ने भी निर्माण एजेंसी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले साल हुई औसत से अधिक बारिश के कारण महोबा रोड स्थित उर्मिल बांध अपनी पूर्ण क्षमता तक भर चुका है। बांध के उक्त हिस्से में 25 से 30 फीट पानी भरा होने के कारण अनुमति मिलने के बाद भी काम शुरू करना एक बड़ी चुनौती साबित होगा, क्योंकि जलस्तर कम होने तक निर्माण गतिविधियों को पूरी तरह प्रभावित माना जा रहा है।

फरवरी 2027 की समय-सीमा और दावों की हकीकत

इस परियोजना की पूर्णता की समय-सीमा फरवरी 2027 निर्धारित है। हालांकि, धरातल पर मौजूद इन समस्याओं को देखते हुए आम जनता में इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि क्या यह करोड़ों का प्रोजेक्ट समय रहते पूरा हो पाएगा या फिर प्रशासनिक लेटलतीफी के कारण इसे और अधिक विलंब का सामना करना पड़ेगा।

इनका कहना है

विभाग ने सभी आवश्यक दस्तावेज उत्तर प्रदेश जल संसाधन विभाग को सौंप दिए हैं और अगले सप्ताह तक अनुमति मिलने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए महाराजपुर और गढ़ीमलहरा के बीच एक नया स्थान भी चिह्नित कर लिया गया है।

पीडी तिवारी, प्रोजेक्ट मैनेजर, एमपीयूडीसी

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