उपभोक्ता आयोग ने एक मामले में मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 1 लाख रुपए अदा करने का आदेश दिया है।
छतरपुर.उपभोक्ता आयोग ने एक मामले में मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 1 लाख रुपए अदा करने का आदेश दिया है। परिवादी नितिन मिश्रा निवासी आरटीओ ऑफिस के सामने महोबा रोड छतरपुरने 8 जुलाई 2023 को स्टार ऑटोमोबाइल्स से एक इलैक्ट्रिक कार महेंद्रा एक्सयूवी 400 ईएल 5 एसजेड कार खरीदी थी,जिसका गाड़ी क्रमांक एमपी 16 जेडसी 3999 है। इस कार की कीमत 18 लाख 47 हजार 290 रुपए । जिसे उन्होंने फायनेंस के माध्यम से खरीदा था। नितिन मिश्रा ने आरोप लगाया कि उन्हें कार की रेंज 456 किलोमीटर बताई गई थी और कहा गया था कि फुल चार्ज करने पर यह 370 किलोमीटर चलेगी। हालांकि कार खरीदने के बाद उन्होंने पाया कि एक बार फुल चार्ज करने पर कार कभी 250 किलोमीटर से अधिक नहीं चल पाती।
आवेदक ने यह भी कहा कि अनावेदक ने उन्हें बताया था कि कार में फास्ट चार्जिंग की सुविधा होगी और कार के साथ फास्ट चार्जिंग दिया जाएगा, जिससे कार 45 मिनट में फुल चार्ज हो जाएगी। लेकिन उन्हें जो चार्जर दिया गया, वह 6-7 घंटे में चार्ज करता है। जब उन्होंने फास्ट चार्जर की मांग की, तो अनावेदक ने देने से इंकार कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि अनावेदकगण ने उनसे यह भी वादा किया था कि महिन्द्रा के हर शोरूम में 15 से 20 दिन के अंदर चार्जिंग की सुविधा प्राप्त हो जाएगी,लेकिन इस प्रकार की कोई सुविधा अभी तक नही दी गयी है। परिवादी ने उक्त इलैक्ट्रिक कार अनावेदकगण द्वारा बतायी गई कार की रेंज एवं उसके फास्ट चार्ज हो जाने से प्रभावित होकर खरीदी थी। इन्ही समस्यायों को लेकर आवेदक ने 7 अगस्त 2023 को अनावेदक के शोरूम में संपर्क किया, लेकिन उनकी शिकायत का समाधान नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से विधिक नोटिस भेजा और मामला उपभोक्ता न्यायालय में पेश किया।
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सनत कुमार और सदस्य निशा गुप्ता ने मामले का अवलोकन किया दस्तावेज का निरीक्षण किया जिस पर न्यायालय द्वारा यह पाया गया कि महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी के द्वारा न्यायलय मे कोई उपस्थित नहीं हुआ और न्यायालय ने कहा कि परिवाद के द्वारा परिवादी के प्रति सेवा में कमी किया जाना प्रमाणित है। आदेश में कहा गया है कि अनावेदकगण को 30 दिन के भीतर मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 1 लाख रुपए अदा करने होंगे। इसके साथ ही उन्हें कार के मूल्य पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 5000 रुपए का परिवाद व्यय भी अदा करना होगा। यदि आदेश का पालन नहीं किया गया, तो आवेदक द्वारा निष्पादन प्रकरण प्रस्तुत करने पर अनावेदक को अतिरिक्त 5000 रुपए का भुगतान भी करना होगा।