छतरपुर

छतरपुर ग्रेनाइट उद्योग की उम्मीदें शासन और राजनीति के लाल फीताशाही में फंसी

विशाखापट्टनम और कंदला पोर्ट के माध्यम से अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब तक निर्यात करने की योजना थी। खदानों के नजदीक ही फिनिशिंग होने से तैयार ग्रेनाइट की लागत में कमी आएगी और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में छतराहो की पहचान बन सकेगी।

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Sep 10, 2025
granite
ग्रेनाइट खदान

जिले के ग्रेनाइट उद्योग को देश और विदेश तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। खजुराहो में स्थापित होने वाले स्टोन पार्क के जरिए ग्रेनाइट कटिंग और पॉलिशिंग की यूनिट लगाकर तैयार माल को विशाखापट्टनम और कंदला पोर्ट के माध्यम से अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब तक निर्यात करने की योजना थी। खदानों के नजदीक ही फिनिशिंग होने से तैयार ग्रेनाइट की लागत में कमी आएगी और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में छतराहो की पहचान बन सकेगी। इसके साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

खदानों का वर्तमान परिदृश्य

छतरपुर जिले में कुल 47 ग्रेनाइट खदानें चिन्हित हैं, जिनमें से तीन-चार को छोडकऱ अधिकांश फिलहाल बंद हैं। जिले से निकले ग्रेनाइट ब्लॉक्स को वर्तमान में राजस्थान के किशनगढ़ भेजा जाता है, जहां कटिंग-पॉलिशिंग के बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ में सप्लाई किया जाता है। विदेशों में निर्यात भी किशनगढ़ से कंदला पोर्ट के जरिए हो रहा है। इसका अर्थ यह है कि छतरपुर में उत्पादन होने के बावजूद, तैयार माल वापस जिले में आता है, जिससे ट्रांसपोर्ट और समय की लागत बढ़ जाती है।

स्टोन पार्क से बनने वाली संभावनाएं

खजुराहो में स्टोन पार्क बनने से तैयार माल सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच सकेगा। इस योजना के लागू होने पर न केवल ट्रांसपोर्ट की लागत कम होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी भी बढ़ सकेगी। विशेष रूप से अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब जैसे देशों में निर्यात सीधे किया जा सकेगा।

उद्योग और रोजगार की वर्तमान स्थिति

छतरपुर जिले में ग्रेनाइट कंपनियों में युवाओं को रोजगार मिलता रहा है। लवकुशनगर, चंदला, महाराजपुर, राजनगर जैसी जगहों पर खदानों में सैकड़ों युवाओं को काम मिला। यहां तक कि कोरोना काल में भी ग्रेनाइट की मांग बनी रही और जिले को करोड़ों की रॉयल्टी प्राप्त हुई। 2020-21 में लगभग 94000 घनमीटर ग्रेनाइट का निर्यात हुआ, जिससे शासन को 9.40 करोड़ रुपए रॉयल्टी मिली। 2021-22 में 1.11 लाख घनमीटर ग्रेनाइट का निर्यात हुआ और 11 करोड़ से अधिक राशि रॉयल्टी के रूप में शासन को प्राप्त हुई। लेकिन उसके बाद से निर्यात ठप पड़ा है। तीन से चार खदानों में सिर्फ उतना उत्पादन किया जा रहा है, जितना देश के मार्केट में मांग है। उत्पादन घटने से रोजगार भी घटे हैं।

हर साल 20 प्रतिशत बढ़ रहा मार्केट

विश्व के मार्केट में तैयार ग्रेनाइट का मार्केट हर साल करीब 20 फीसदी की ग्रोथ कर रहा है। विश्व में चीन स्टोन का सबसे बड़ा आयातक है, जो भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका से रॉ ब्लॉक आयात कर उन्हें तैयार माल के रुप में पूरे विश्व में निर्यात करता है। वर्ष 2006 में चीन की हिस्सेदारी विश्व के निर्यात मार्केट में 23.55 फीसदी थी, जो 2017 में बढकऱ 78.97 फीसदी हो गई। वर्ष 2024 में 83.21 फीसदी हिस्सेदारी बना ली। खजुराहो के स्टोन पार्क में रॉ ग्रेनाइट ब्लॉक की कटिंग और फिनिशिंग के बाद विदेशों में सप्लाई करने से चीन की मोनोपॉली कम की जा सकती है। इसके साथ ही भारत के स्टोन मार्केट को बढ़ाया जा सकता है।

इनका कहना है

स्टोन पार्क का प्रपोजल शासन को भेजा गया है और शासन स्तर पर समीक्षा जारी है। इंवेस्टर समिट में भी ग्रेनाइट उद्योग को लेकर प्रस्ताव आए हैं। शासन स्तर पर इस दिशा में काम चल रहा है।

अमित मिश्रा, खनिज अधिकारी

Published on:
10 Sept 2025 10:28 am
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