
मेडिकल कॉलेज भवन
जिले के बहुप्रतीक्षित शासकीय मेडिकल कॉलेज को आगामी शिक्षण सत्र से शुरू करने की दिशा में प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए कॉलेज को मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (एमपीएमएसयू), जबलपुर से संबद्धता के लिए आधिकारिक सहमति प्राप्त हो गई है। इस अनिवार्य मंजूरी के बाद नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यक सभी दस्तावेज और पूर्व में आयोग द्वारा उठाए गए विभिन्न सवालों के बिंदुवार विस्तृत जवाब भी जमा करा दिए गए हैं। इन सभी औपचारिकताओं और कागजी तैयारियों के पूरे होने के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि एनएमसी की टीम द्वारा जल्द ही कॉलेज का भौतिक निरीक्षण किया जा सकता है।
इस प्रशासनिक कवायद और कागजी प्रगति के बीच सबसे बड़ा चिंता का विषय यह है कि जमीनी स्तर पर कॉलेज की कई बुनियादी और बेहद जरूरी कमियां अब भी पूरी नहीं हो सकी हैं। यदि एनएमसी के संभावित निरीक्षण से पहले इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो मान्यता की दौड़ में कॉलेज पिछड़ सकता है।
मेडिकल कॉलेज का सिविल निर्माण कार्य सितंबर 2023 से लगातार चल रहा है, जिसे हर हाल में दिसंबर 2025 तक पूरा होकर हैंडओवर हो जाना चाहिए था। हालांकि, यह तय समय-सीमा बीतने के बाद भी अधूरा पड़ा है। वर्तमान में कॉलेज परिसर के भीतर मुख्य पहुंच मार्गों (सडक़ों) का निर्माण, जल निकासी के लिए नालियों का काम और मुख्य प्रवेश द्वार का ढांचा अब भी पूरी तरह मुकम्मल नहीं हो पाया है। इसके अतिरिक्त, नवनिर्मित बिल्डिंग्स में फाइनल पुताई का काम रुका हुआ है और सुरक्षा के लिहाज से सबसे अनिवार्य माने जाने वाले फायर फाइटिंग सिस्टम यानी अग्निशमन उपकरणों की फिटिंग का काम भी अंतिम रूप से पूरा नहीं हो सका है। निर्माण एजेंसी पीआईयू द्वारा इन बचे हुए सिविल कार्यों को समेटकर विभाग को बिल्डिंग सौंपने में अभी कम से कम एक-दो महीने का समय और लग सकता है।
निर्माण कार्यों की सुस्त रफ्तार के अलावा लैब और मेडिकल उपकरणों की भारी कमी भी एक बड़ा रोड़ा बनी हुई है। हालांकि चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा बजट जारी होने के बाद पीआईयू ने क्लास रूम के डेस्क, ऑफिस और हॉस्टलों के लिए करीब 32 करोड़ रुपए के सामान्य फर्नीचर का टेंडर तो जारी कर दिया है, लेकिन कॉलेज की मुख्य रीढ़ माने जाने वाले प्रैक्टिकल लैब के वैज्ञानिक उपकरणों, रसायनों और जीवन रक्षक मशीनों की खरीदी को अब तक इस टेंडर प्रक्रिया में शामिल ही नहीं किया गया है।
संसाधनों के साथ-साथ कॉलेज में मानव संसाधन (स्टाफ) की किल्लत भी जस की तस बनी हुई है। मंत्री-परिषद द्वारा छतरपुर मेडिकल कॉलेज के सुचारू संचालन के लिए 330 नियमित और 205 आउटसोर्स पदों की मंजूरी काफी समय पहले ही दे दी गई थी, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इन स्वीकृत पदों पर भर्ती के लिए अब तक धरातल पर कोई व्यावहारिक प्रक्रिया शुरू नहीं की है। ऐसे में स्पष्ट है कि जहां एक ओर यूनिवर्सिटी से संबद्धता मिलना और एनएमसी को जवाब भेजना राहत देता है, वहीं दूसरी ओर उपकरणों की कमी, अधूरा निर्माण और खाली पड़े पद एनएमसी के निरीक्षण के दौरान कॉलेज के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।प्रभारी डीन बोले- प्रक्रिया आगे बढ़ा रहेभारतीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) में आवेदन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर (एमपीएमएसयू) से कॉलेज की संबद्धता के लिए सहमति मिल गई है। इसके साथ ही हमने डायरेक्टोरेट चिकित्सा शिक्षा विभाग को आवश्यक नियुक्तियां करने और लैब उपकरण उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है। विभाग ने कॉलेज में स्थाई डीन की नियुक्ति के लिए भी प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। स्थाई डीन नियुक्त होने से यहां काम की गति और तेजी से बढ़ेगी।
डॉ. प्रवीण खरे, प्रभारी डीन, मेडिकल कॉलेज छतरपुर
Updated on:
10 Jun 2026 10:55 am
Published on:
10 Jun 2026 10:55 am
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