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कागज़ों में चमचमाते प्रोजेक्ट, ज़मीन पर बहती सडक़ें: 10.59 करोड़ लुटाकर भी अधूरा केल नदी का पुल, 10 किमी का अतिरिक्त चक्कर काटने को मजबूर ग्रामीण!

एक तरफ 10.59 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से संवारा जा रहा केल नदी का नया पुल समयावधि बीतने के 8 महीने बाद भी अधूरा पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक नाकामी के चलते बनाया गया अस्थायी डायवर्जन पहली ही बारिश में बह गया है।
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केल पुल

जिले के गौरिहार जनपद क्षेत्र में प्रशासनिक अनदेखी, ठेकेदारों की अकर्मण्यता और भ्रष्टाचार का खौफनाक नजारा सामने आ रहा है। मानसून की शुरुआत होते ही गौरिहार-सरवई मुख्य मार्ग और केल नदी पर आवागमन पूरी तरह चरमरा गया है। एक तरफ 10.59 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से संवारा जा रहा केल नदी का नया पुल समयावधि बीतने के 8 महीने बाद भी अधूरा पड़ा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक नाकामी के चलते बनाया गया अस्थायी डायवर्जन पहली ही बारिश में बह गया है।

6 साल से जर्जर पुल पर दांव पर लगी जिंदगी

गौरिहार जनपद क्षेत्र के बलरामपुर गांव के पास केल नदी पर स्थित पुराना पुल वर्ष 2020 में आई बाढ़ और तेज बहाव के कारण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके पिलर जमीन में धंस चुके हैं। इसके बावजूद हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इसी जर्जर और खतरनाक पुल से गुजरने को मजबूर हैं। प्रशासन ने वर्ष 2023 में 10.59 करोड़ रुपए की लागत से 175 मीटर लंबे नए पुल के निर्माण को स्वीकृति दी थी। सेतु विभाग की देखरेख में रामराजा कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा अप्रेल 2023 में इसका काम शुरू किया गया, जिसे अक्टूबर 2025 तक पूरा किया जाना था। लेकिन तय सीमा समाप्त होने के 8 महीने बीत जाने के बाद भी 25 प्रतिशत काम अधूरा पड़ा है। बारिश शुरू होते ही निर्माण कार्य एक बार फिर पूरी तरह ठप हो गया है।

जर्जर पुल पर मिट्टी डालकर झाड़ा पल्ला, हादसे की आशंका

बारिश के बीच प्रशासन ने जर्जर पुल पर मिट्टी डलवाकर जैसे-तैसे आवागमन चालू कराने की लीपापोती की है। हालांकि, हल्की सी बारिश में मिट्टी धंसने और दलदल बनने से इस जर्जर पुल पर किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। इस मार्ग से बलरामपुर, सिचहरी, खेराकासार, जरेहटा, सरवई, खड्डी, पहरा, मटीध सहित बांदा और चित्रकूट तक हजारों लोग रोजाना आवाजाही करते हैं। पुल अधूरा रहने से इन ग्रामीणों को मजबूरी में 10 से 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ रहा है।

ठेकेदार की सुस्ती से अटका काम, 3 बार निरस्त हुए थे टेंडर

केल नदी पर नए पुल के निर्माण में शुरू से ही अफ़सरों की मेहरबानी और ठेकेदार की लापरवाही हावी रही। टेंडर प्रक्रिया तीन बार निरस्त होने के बाद चौथी बार में रामराजा कंस्ट्रक्शन कंपनी ने निर्धारित लागत से 10 प्रतिशत अधिक दर पर इसका ठेका लिया था। अनुबंध के बाद 2023 में काम चालू हुआ, लेकिन ठेकेदार की लचर कार्यशैली के कारण प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हो सका। अब 15 जून से 15 अक्टूबर तक बारिश के मौसम में निर्माण बंद रहने के नियम का बहाना बनाकर काम को और लटकाया जा रहा है।

सरवई मार्ग पर पहली बारिश में ही बहा डायवर्जन, संपर्क कटा

लवकुशनगर क्षेत्र के गौरिहार-सरवई मुख्य मार्ग पर निर्माणाधीन पुल के पास बनाया गया अस्थायी डायवर्जन बीते दिनों हुई तेज बारिश के बहाव में बह गया। निर्माण एजेंसी जीआरटीसी द्वारा समय पर पुल न बनाए जाने के कारण यह डायवर्जन बनाया गया था, जो पहली ही बारिश का दबाव नहीं झेल सका। डायवर्जन बहने से मार्ग पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और दर्जनों गाँवों का संपर्क पूरी तरह कट गया। अब ग्रामीणों को गंज-सिचहरी मार्ग से होकर लगभग 10 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे विद्यार्थियों, मरीजों, व्यापारियों और रोजमर्रा की आवाजाही करने वाले लोगों को भारी आर्थिक व शारीरिक परेशानी उठानी पड़ रही है।

सुरक्षा के इंतजाम नदारद, निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय निवासियों का कहना है कि गौरिहार में जनपद पंचायत, एसडीएम कार्यालय सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर हैं, जिसके लिए इसी मार्ग का उपयोग करना पड़ता है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी न तो सुरक्षित डायवर्जन मार्ग बनाया गया और न ही तय समय सीमा में पुल निर्माण पूरा कराया गया। क्षेत्र की आक्रोशित जनता ने इस पूरे प्रोजेक्ट की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों व ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इनका कहना है

पुल का निर्माण कार्य जल्द ही पूरा करने के लिए ठेकेदार को निर्देशित किया गया है। बारिश के चलते कुछ दिनों के लिए काम प्रभावित रहेगा, इसके बाद तेजी से काम पूरा किया जाएगा।

आरएस सिंह, एसडीओ, सेतु विभाग

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