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छतरपुर में हर साल मरम्मत के नाम पर डकार रहे करोड़ों का बजट! मानसून आते ही फिर उखड़ी 5 करोड़ की डामर सडक़, घटिया सीसी पैचवर्क के जुगाड़ पर उतरा पीडब्ल्यूडी

जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए से बनी डामर की सडक़ें पहली ही तेज बारिश में बह जाती हैं और जिम्मेदार अफसर हर बार तकनीकी वजहों का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
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जवाहर मार्ग

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अफसरों और ठेकेदारों की जुगलबंदी ने छतरपुर शहर की मुख्य सडक़ों को भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बनाकर रख दिया है। जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए से बनी डामर की सडक़ें पहली ही तेज बारिश में बह जाती हैं और जिम्मेदार अफसर हर बार तकनीकी वजहों का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं। आकाशवाणी तिराहा से लेकर जवाहर मार्ग और पुराना पन्ना नाका तक की सडक़ें आज गिट्टी और गहरे गड्ढों का ढेर बन चुकी हैं। अब इस महा-लापरवाही को छुपाने के लिए पीडब्ल्यूडी उखड़ी सडक़ों पर घटिया सीमेंट-कांक्रीट (सीसी) और पैचवर्क का लीपापोती वाला जुगाड़ लगा रहा है।

सवाल-1 हर साल क्यों उखड़ती है सडक़, क्या 5 दिन के लिए बिछाया जाता है डामर?

सडक़ों के निर्माण और गुणवत्ता को लेकर पीडब्ल्यूडी की कार्यशैली पर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर हर साल करोड़ों का बजट स्वाहा होने के बाद भी सडक़ें साल भर क्यों नहीं टिक पातीं?- वर्ष 2022 में लगभग 5 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से जवाहर रोड और आसपास के मार्गों पर डामरीकरण हुआ था, जो जुलाई 2022 की बारिश में महज 5 दिन के भीतर बह गया।- इसके बाद वर्ष 2023 और 2024 में भी मानसून बीतते ही डामरीकरण और पैचवर्क के नाम पर फिर से लाखों रुपए के टेंडर जारी किए गए।-आखिर ऐसा कौन सा इंजीनियरिंग फार्मूला है जिसके तहत हर साल सडक़ उखड़ती है और हर साल मरम्मत का नया बजट पास करा लिया जाता है?

सवाल-2- 30 एमएम डामर की दुहाई देकर किसे बेवकूफ बना रहा विभाग?

पीडब्ल्यूडी के जिम्मेदार अफसर हर बार यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि सडक़ पर केवल 30 एमएम (मिलीमीटर) का डामरीकरण हुआ था, जो भारी ट्रैफिक और बारिश का पानी नहीं झेल पाता।यहां सीधा सवाल उठता हैजब विभाग को अच्छे से पता है कि 30 एमएम का डामर शहर के भारी ट्रैफिक और बारिश को नहीं झेल सकता, तो बार-बार 30 एमएम की ही परत क्यों बिछाई जाती है? क्या जानबूझकर ऐसी कमजोर सडक़ें बनाई जाती हैं ताकि हर साल मरम्मत और पुननिर्माण के नाम पर सरकारी खजाने से नया बजट जारी कराया जा सके?

ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा पैचवर्क का नाटक

आकाशवाणी तिराहा से जवाहर मार्ग तक बिखरी गिट्टियों और गड्ढों को भरने के लिए विभाग जो सीसी और डामर का पैचवर्क कर रहा है, वह बेहद घटिया स्तर का है। उखड़े हुए गड्ढों पर ऊबड़-खाबड़ तरीके से सीमेंट और गिट्टी थोंप दी गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं। राहगीरों के लिए यह मरम्मत राहत देने के बजाय हादसों का नया सबब बन चुकी है।

जवाहर रोड से लेकर पूरे शहर में बदहाली का आलम

विभाग की इस नाकामी का दंश केवल जवाहर मार्ग ही नहीं, बल्कि पूरा छतरपुर झेल रहा है।

- जेल रोड, पन्ना रोड, संकट मोचन मंदिर मार्ग, पुलिस लाइन रोड और छत्रसाल चौराहा से पुराना पन्ना नाका मार्ग गड्ढों में तब्दील हो चुके हैं।

- बिजली विभाग कार्यालय, यूनिवर्सिटी तिराहा और एक्सीलेंस स्कूल नंबर 1 व 2 के पास सडक़ की डामर की परत पूरी तरह गायब है।

- डीजे बंगला, भाजपा जिला कार्यालय, पठापुर तिराहा और बस स्टैंड के पास सीसी के असमतल पैच लगाकर इतिश्री कर ली गई है।

व्यापारियों की रोजी-रोटी पर मार, राहगीरों का सांस लेना मुहाल

सडक़ किनारे ठेला, गुमटी और दुकानें चलाने वाले 500 से अधिक छोटे कारोबारियों का धंधा चौपट हो चुका है। दिन भर उड़ती धूल, भारी गाडयि़ों का काला धुआं और गड्ढों से छिटकते पत्थरों के बीच व्यापारी दिन काटने को मजबूर हैं। आम जनता का कहना है कि हर साल मरम्मत का यह नाटक बंद होना चाहिए।

जनता का सीधा आरोप- पैचवर्क नहीं, पूरे खेल की हो निष्पक्ष जांच

स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का आक्रोश अब चरम पर है। जनता का सीधा सवाल है कि बार-बार अस्थाई मरम्मत और पैचवर्क के नाम पर सरकारी पैसे की बर्बादी क्यों की जा रही है? नागरिकों ने मांग की है कि पिछले तीन सालों में डामरीकरण और पैचवर्क के नाम पर निकाले गए पूरे बजट और निर्माण की गुणवत्ता की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सरकारी पैसे का चूना लगाने वाले अफसरों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो सके।

विभाग का वही पुराना रटा-रटाया जवाब

आकाशवाणी तिराहा से जवाहर मार्ग तक फिलहाल गड्ढों को भरकर आवागमन सुचारू रखने के लिए अस्थाई पैचवर्क कराया गय है। बारिश के मौसम में नई सडक़ बनाने का कार्य तकनीकी रूप से उचित नहीं होता, क्योंकि इससे सडक़ की गुणवत्ता प्रभावित होती है। मानसून समाप्त होने के बाद पूरे मार्ग का नए सिरे से पुननिर्माण और डामरीकरण कराया जाएगा।

आशीष भारतीय, ईई, पीडब्ल्यूडी, छतरपुर

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