छतरपुर

खजुराहो में बुंदेलखंड, बघेलखंड, मालवा, चंबल, निमाड़ के पारंपरिक आवास दिखेंगे

अब खजुराहो के आदिवर्त जनजातीय लोक कला संग्रहालय के परिसर में मध्यप्रदेश के पांच लोक संस्कृतियों के पारंपरिक आवास तैयार किए जा रहे हैं। इनमें घरों के हस्तशिल्प के साथ ही क्षेत्रों में लोगों के रहन सहन के तरीकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस परिसर में भ्रमण में करके पर्यटक मध्यप्रदेश की लोक संस्कृतियों को समझ सकेंगे।

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Aug 18, 2024
आदिवर्त

छतरपुर. अब खजुराहो के आदिवर्त जनजातीय लोक कला संग्रहालय के परिसर में मध्यप्रदेश के पांच लोक संस्कृतियों के पारंपरिक आवास तैयार किए जा रहे हैं। इनमें घरों के हस्तशिल्प के साथ ही क्षेत्रों में लोगों के रहन सहन के तरीकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस परिसर में भ्रमण में करके पर्यटक मध्यप्रदेश की लोक संस्कृतियों को समझ सकेंगे। काम अंतिम चरण में है।

जनजजातियों का गांव पहले बनाया गया


संग्रहालय में मध्यप्रदेश के प्रमुख सातों जनजातियों बैगा, भारिया, कोल, भील, गोण्ड, सहरिया और कोरकू के पारंपरिक आवासों को तैयार करके एक गांव को किया गया है। मध्यप्रदेश का ग्रामीण और जनजातीय जीवन, उसके देवी-देवता और उनके चिह्नों को भी इस परिसर में निर्मित किया जा रहा है। पहले से स्थापित संग्रहालय की पूरी आन्तरिक साज-सज्जा नए सिरे से की गई है।

अप्रेल से दे रहे नया लुक


मध्यप्रदेश के अलग-अलग जनपदीय और जनजातीय समुदायों के 100 से भी अधिक कलाकार पिछले अप्रेल माह से निरंतरता से इस संग्रहालय की नई रचना में लगे हुए हैं। इस संग्रहालय का उद्देश्य मध्य प्रदेश के आदिवासी और लोक समुदायों पर एक नजर डालना और उनके जीवन, उनकी स्वदेशी ज्ञान प्रणाली और उनके सौंदर्यशास्त्र को सम्प्र रूप से करीब से समझने का प्रयास करना है। इसके तहत समय समय पर इस संग्रहालय में स्थानीय कलाकारों एवं प्रदेश के विभिन्न अंचलों की लोक कला एवं परंपरा का प्रदर्शन भी लोक गायन, नाट्य, चित्रकला के माध्यम से किया जाता है। इससे देश विदेश के पर्यटकों को एक ही छत और परिसर में विभिन्न कलाएं देखने को मिल जाती हैं।

गुरुकुल के माध्यम से सहेजेंगे विरासत को


26 फरवरी 2023 को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा खजुराहो नृत्य समारोह के दौरान पारंपरिक कलाओं के गुरुकुल के निर्माण की घोषणा की गई थी, जिसके फलस्वरूप इस गुरुकुल में जनजातीय और ग्रामीण समुदायों की पारंपरिक कलाओं मसलन शिल्प नृत्य, गायन, वादन, चित्र और उनके मौखिक साहित्य को वरिष्ठ गुरुओं के माध्यम से प्रशिक्षण की व्यवस्था रहेगी। इस गुरुकुल की परिकल्पना इस तरह होगी। जहां ग्रामीण जनजीवन में उनके समग्र विकास के साथ पारंपरिक हुनर और देशज, ज्ञान पद्धतियों को संरक्षण मिलेगा। विरासत को भी विस्तार मिलेगा।

विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में तैयार हो रहे आवास


अब संग्रहालय के दूसरे चरण में पांच लोक संस्कृतियों बुंदेलखंड बघेलखंड, चंबल, निमाड़ और मालवा के आवासों का निर्माण का किया जा रहा है। मिश्रा ने बघेलखंड के घर के लिए पद्मश्री बाबूलाल दाहिया सतना, बुंदेलखंड के लिए ओम प्रकाश चौबे सागर, मालवा के लिए एमएल वर्मा देवास, निमाड़ के लिए छोगालाल कुमरावत खंडवा और चंबल के लिए विनोद मिश्र दतिया के मार्गदर्शन में काम कराया जा रहा है। इन विशेषज्ञों द्वारा घरों की जीवन उपयोगी वस्तुओं का भी संग्रह किया जा रहा है। इसको घरों में प्रदर्शित किया जाएगा।


इनका कहना है


संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2000 में स्थापित आदिवर्त जनजातीय लोक कला राज्य संग्रहालय - खजुराहो के विस्तार का कार्य किया जा रहा है।

अशोक मिश्रा, प्रभारी अधिकारी, आदिवर्त

Published on:
18 Aug 2024 10:21 am
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